उत्तर :-
प्रेम पुजा है , बंदगी है , समर्पण है ,
प्रेम शरणागति है, उपासना है प्रेम,
प्रेम भक्ति है , तप तथा योग है
प्रेम साधना है साध्य भी है प्रेम ,
प्रेम दिव्य ज्ञान तथा धर्म है,
प्रेम दिव्य संगीत है, रिद्धी तथा सिद्धी है प्रेम
प्रेम निष्काम सेवा है ,
प्रेम दिव्य अमृत है ,
प्रेम दिव्य औषधि है ,
प्रेम अलौकिक शक्ति है ,
प्रेम योगक्षेम वहाम्यं है ,
प्रेम भरोसा और विश्वास है ,
प्रेम तृप्ति है , संतुष्टि है , दिव्य एहसास है ,
प्रेम श्रद्धा है , शांति, सकून और आनंद हैं ,
प्रेम करूणा है त्याग है तपस्या है क्षमा है,
प्रेम दया है दान है प्रेम , प्रेम चेतना है,
प्रेम दिव्य प्रकाश है , समृद्धि है प्रेम ,
प्रेम सत चित्त आनंद का दिव्य नाम है
इसलिए प्रेम दिव्यानंद है ,
प्रेम जिंदगी है तथा मृत्यु से परे जीवन भी है ,
प्रेम भगवान श्री कृष्ण के ह्रलादिनी शक्ति के सार तत्व का दुजा नाम यानि श्री राधा है प्रेम,
प्रेम गुरू का दिव्य एवं पवित्र उपहार है
प्रेम भगवान का स्थाई वरदान है,
प्रेम गुरू का सुरक्षा चक्र है,
यथा ब्रजगोपिका नाम और धाम है प्रेम,
प्रेम का परिभाषा असिमित है ।।
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