Monday, 12 July 2021

इँसानी फितरत है इस पर कभी यक़ीन मत करनाअक्सर इँसान मददगार को ही बलि का बकरा बनाता है।

एक आदमी का घोडा बीमार हो गया।
उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया,
डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला -
"आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है।

हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं,
अगर यह ठीक हो गया तो ठीक , नहीं तो हमें
इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में
भी फैल सकती है।"

यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था।
अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी और चला गया।
उसके जाने के बाद बकरा उस घोड़े के पास गया और बोला,
"उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।"

दूसरे दिन
डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।
बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला,
"दोस्त
तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो
नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ।
चलो उठो"

तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो आदमी से बोला,
"मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा
क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।"

जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास
फिर आया और बोला,
"देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली
स्थिति बन गयी है।
अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे।
इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे।
थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो।
शाबाश,
अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।"

इतने में आदमी वापस आया तो उसने देखा कि
उसका घोडा भाग रहा है।
वो ख़ुशी से झूम उठा  और सब घर वालों को
इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा,
"चमत्कार हो गया,
मेरा घोडा ठीक हो गया। हमें जश्न मनाना चाहिए..
आज बकरे की बिर्यानी खायेंगे।"

ये सुन बकरे की सुट्टी पिट्टी गुम हो गयी, घोडा बोला , भाई ये इँसानी फितरत है इस पर कभी यक़ीन मत करना
अक्सर इँसान मददगार को ही बलि का बकरा बनाता है।
श्री‌ राधे।। :- संजीव कुमार 

Thursday, 8 July 2021

कोई युसुफ खान अपने कौम के प्रति वफादार हैं तो यह उसकी अच्छाई है कमी नहीं । हम 70 % हिन्दूओं की कमिया :-

 Karmesh Sinha भाई साहब मैं भी हिन्दु हुं । पर दुसरे मे दोष देखने से पहले खुद की कमी को देखता हुं ।  कोई युसुफ खान अपने कौम के प्रति वफादार हैं तो यह उसकी अच्छाई है कमी नहीं । 
हम 70 % हिन्दूओं की कमिया  :- 
१. हमे हर समय दुसरे में दोष नजर आता है , खुद की कमी , खुद का कर्तव्य , खुद की जिम्मेदारी नजर नहीं आती । 
२. हम केवल अपने अधिकार की बात करते हैं , राष्ट्र भक्ति की बात करते हैं , सेना के वलिदान की बात करते हैं, पर जब कर्तव्य की बात आती है तो पिछे हट जाते हैं चाहे राष्ट्र के प्रति हो , या समाज के प्रति या परिवार के प्रति । हम हमेशा यह कामना करते हैं कि देश को भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद , खुद्दी राम बोस , प्रफुल्लचंद्र चाकी आदि  मिले पर मेरे घर , मेरे कोख से नहीं पड़ोसी के घर से ।‌

३. हम असंगठित हैं,   हम  धर्म,  संप्रदाय , जाति , दलित,  अगड़ा,  पिछड़ा , और तो और प्रांत के अंदर भी अनेक भाषाओं  में बंटे हुए हैं । भाई भाई का दुश्मन है, भाई भाई का तरक्की नहीं देखना चाहता , अपने भाई से,  दोस्त से जलन,  द्वेष , टांग खिचने , उसकी किसी भी तरक्की पर उसको निचे दिखाना 90% हम हिंदुस्तानियों हिन्दुओं का संस्कार बन गया है । 

4. हम हिन्दू अपने ही धर्म के असली  संत , महात्मा ,‌साधु को अहमियत नहीं देते और ना उनको प्रमोट करते हैं । उनकी सेवा ( सनातन धर्म के प्रचार हेतु व जीव सेवा , गौ गोरू सेवा के उनके काम में उनको अपना एक छोटा सा एमाऊंट धन दान )   करना तो दुर उनका बुराई करते हैं,   हम अपनी उर्जा छाती पीट कर दुसरे की बुराई करने में लगाते हैं । पर अपने संतों के प्रचार करना तो दुर उनके बातों के पोस्ट को वर्जुअल दुनिया में पसंद करने से भी भागते हैं । 

5. हम 90% हिंदु गंदी राजनीति से प्रेरित है और उसी चश्मे से दुनिया को देखते हैं , घर , परिवार , समाज हर जगह राजनीति।

6. हम अपने ही रास्ते , स्टेशन , बस स्टैंड आदि बहुत दुर , मंदीरों ,  दुसरे के खेत , बगीचे , पड़ोसी के घर के आगे बिच रास्ते पर कुड़ा फेंकते हैं । और जब कोई रोकता है तो लड़ने लगते हैं उससे ।

7. हम 90% हिन्दु केला और कोई भी चीज खाकर सड़क पर उसका छिलका और रैपर , पानी का वोतल बड़े ठाठ से फेंकते हैं और खुद को बहुत पढ़ें लिखे मानते हैं ।

8. हम 90% हिन्दु के कथनी और करनी में 180 डिग्री का फर्क है । 

9. हम 90% हिन्दु  निस्वार्थ दान तो बहुत दुर की बात किसी के मदद में पिछे हट जाते हैं । एसिडेंट में रोड पर परा एक हमारा भाई मर रहा होता है और हम साइड से निकल लेते हैं ।‌

१०. हम 80% हिंदु बराबर उनके किसी दुसरे मजहब के मजार पर  सिर झुकाते और मजार के चादर चढ़ाने और  दान देते नजर आते हैं । 50% हिन्दु उनके यहां ईद के भोज उनके साथ खाते मिलेंगे । और उनका टोपी और गमछा पहनते मिलेगें ।।

और भी बहुत सी कमियां है हममें जिस कारण वो लोग हमको बखुबी समझते हैं और हमारा फायदा उठाते हैं ।

अब उनके मजबुती का कारण :+ 
१. उनमें खाने के लिए पैसा हो या ना हो पर धर्म के नाम पर चंदा में खुब भाग लेते हैं।
२. दुनिया के किसी भाग में कोई उनके धर्म या जाति , मजहब का हो । वो चाहे आतंकी यूं ना हो , उनके लिए वो ह्रदय से साथ खरे मिलेंगे ।

३. वो हमेशा अपने मजहब के लोगों का साथ देने के लिए संगठित होकर खड़े मिलेगे , चाहे वो किसी देश का हो ।

४. वो कभी भी किसी भी हिन्दु मंदिरों के अंदर किसी भी हालत में ना प्रवेश करते हैं और ना मंदीर के सामने सिर झुकाते मिलेंगे । और दान तो एक अठ्ठनी भी नहीं दिया आज तक ।

5. वो खुद में इतना संगठित है कि उनके जाति का नाम भी दुसरे मजहब के लोग नहीं जान पाते ।

6. वो दुसरे मजहब के लोगों के किसी भी भोज में शरीक कभी नहीं होते ।

7. वो आपका कितना भी बड़ा दोस्त क्यूं नहीं पर जरूरत पड़ने पर वो अपने मजहब का पक्ष लेते हुए आपके खिलाफ तलवार उठाने से जरा भी नहीं हिचकिचाते ।

8. उनके लिए राष्ट्र से पहले उनका मजहब है , उनका कौम है ।

9. वो जहां घर बनाएंगे अपने कौम के मुहल्ले में ।
पर हम अपने घर के बगल का जमीन पैसे के लोभ में अपने किसी हिन्दु भाई को ना बेचकर उनको बेचना पसंद करते हैं । जिसमें वो मस्जिद और मांस का दुकान खोल देते हैं । 

तो अगर युसुफ खान ने मरने से पहले अपना धन वक्फ बोर्ड को देकर अपने मजहब , अपने भाई , अपने कौम के प्रति वफादारी साबित किया तो हमको मिर्ची क्यों लग रही है । हम 100कड़ोर हिन्दु ही तो सलमान , शाहरूख , आदि के फिल्म का टिकट और सी डी  ब्लैक में खड़ीद कर देखना पसंद करते हैं और उनको हिरो नं वन बना कर धन और शोहरत देकर ताकतवर और असरदार बनाते हैं। 

इसलिए मेरे हिन्दु भाई घडियाली आंसु बहाते हो ना और कोई युसूफ खान अपने कौम को दान देता है तो छाती पिटते हो तो मुझे आपलोगो पर बड़ा तरह आता है ।और शर्म भी । 
वो अपने कौम , मजहब के प्रति पुरी तरह वफादार हैं इमानदार है और हम अपने कौम , मजहब, समाज और परिवार  और राष्ट्र के प्रति गद्दार , द्रोही है । यह सत्य स्वीकार कर ले और सुधरे तो अच्छा है नहीं तो वजूद समाप्त हो जाएगा पचास साल के अंदर अंदर ।‌
:- संजीव कुमार ।

Saturday, 3 July 2021

फिर हम पतितो का उद्धार कैसे हो ?

सफर कितना भी मुश्किल हो
प्यास और प्रयास सही हो तो राह,
"गुरूदेव" आसान कर देंगे,,
जो हमसे हो न पायेगा
उसे " गुरू भगवान " स्वयं कर देंगे !!!

भगवान तो केवल अधिकारी जीव को हीं पुछते है, बने बने को पुछते हैं । वांकी के लिए वो न्यायी बन जाते हैं । वो तो भक्त वत्सल हैं। और हम तो पतित है भक्त हैं हिं नहीं । उनके भक्त तो केवल सभी महापुरुष और उनके वास्तविक संत आदि हैं । वो पतितो के तरफ देखते भी नहींं ।

फिर हम पतितो का उद्धार कैसे हो ? 
फिर तो अनाधिकारी जीवों का कभी कल्याण हो हीं नहीं ।
पर एक रास्ता है -  
" भक्त वत्सल नाम सुनि तब हृदय कांपत मेरे श्याम,
पतित पावन नाम सुनि तब होत साहस बनहीं काम ।। (श्री महाराज जी )

तो वो स्वयं गुरू रूप धारण करके हम पतितो का उद्धार करने के लिए कभी कभी धरा धाम पर आतें है ।
 अब जो जीव एक बार गुरू वरण कर लेता है और गुरू का अनुगामी होकर भक्ति करता है उसके लिय सातों खुन माफ । अब वो उस गुरूवर्णेश्वर के लिए अपना जैसे का तैसा और भक्त वत्सल, दोनों स्वरूप भुल जाते हैं । उसके लिए वो पतित पावन स्वरूप हो जाते हैं और इस रूप मे हम पतित जीवों के अवगुणों के तरफ , दोषों के तरफ देखते भी नहीं । माफ कर देते हैं । और थोड़ा भी प्रेम भक्ति करने वाले को अपना लेतें हैं ।

गुरू तो है माता सम गोविंद राधे,
शिशु मन मल धोवे हरि गोद बैठा दे । :- श्री महराज जी ।।

अवगुण करूँ समुद्र सम , गिनत ना अपनों जान ।
राई के सम भजन को मानत मेरू समान ।।

ये तो हमारे कृपालु महाप्रभु की परम उदारता है । अवगुण धारण किए हुए हम दिन-रात अपराध कर रहें हैं, लेकिन समुद्र जैसे अवगुणों को मेरे गुरूवर देखते हीं नहीं हैं , क्यों - 

गिनत न अपनों जान ।

अरे यह मेरा है, कोई बात नहीं । 
और राई सम यानी थोड़ा सा भी हम भजन करतें हैं तो - 

मानत मेरू समान ।

विभोर हो जातें हैं । बड़े विभोड़ हो जाते हैं । अरे मेरा बच्चा कर तो रहा है न । चल रहा है, मेरी आज्ञा-पालन कर रहा है । काम-वाम सब हो जाएगा । 

इतने आशावादी हैं हमारे गुरूवर । तो सद्गुरू की कृपा से हीं यह उत्कट लालसा प्राप्त होती है ।:- पूजनीयां मां राजेश्वरी देवी जी 

🙏🌹जय श्रीमहाराज जी, जय श्री राधे,जय श्रीकृष्णा 🌹🙏

मेरा निज अनुभव साक्षी मंदिर उड़िसा और बरसाना धाम ।

मैं इसी साक्षी गोपाल मंदिर उड़िसा में, भगवान श्रीकृष्ण के बगल में खड़ी राधा रानी जी का पैर साक्षी गोपाल मंदीर में पीछले साल अचानक छु लिया था । पंडित जी गुस्सा गए थे । मेरे मुख से विनम्रता के साथ , दीनता से अपने आप निकल गया था उनके सामने " मैं तो अपनी मां का पैर छुआ है , आपके लिए ए भगवान् हैं, लेकिन ए तो मेरी मां है मां सिर्फ मां ,और बच्चे को मां के पास जाने से कौई रोक सकता है भला ! चाहे बच्चा गन्दा में हीं लिपटा क्युं ना हो ! 
तब पंडित जी हंसने लगे , क्रोध शांत हो गया उनका । श्री राधे । वो वोले राधा रानी का चरण दर्शन साल में एक बार हीं दर्शकों को होता है , इसलिए वोला था ,‌अब उनकी जैसी इच्छा । 

एक बार बरसाना‌ धाम में राधा रानी के दरवार में 2017 में दर्शन के लिए गए । प्रसाद पाने के लिए बहुत भीड़ देखकर थक कर उनके महल में बैठ गया , उस दिन बहुत पैदल चलना पड़ा था मुझे धाम में। और आंखों में अपने आप हीं आंसु बहने लगे , मुझे बहुत भीड़ अच्छा नहीं लगता है , मन हीं मन सोच रहा था कि राधा रानी तो मेरी भी मां हैं । अगर वो प्रसाद देना हीं चाहेंगी तो मुझे प्रसाद जरूर मिल जाएगा । 
कुछ समय में देखता हुं भीड़ कम हो गई और मां के बगल में खड़े एक पंडित मुझे बुला रहे हैं । पहले तो नहीं समझा मैं , पर वो आवाज़ देकर हाथ के इशारे से वोले की तुमको हीं बुला रहा हुं । मैं गया उनके पास , वो मेरे सिर को हाथ से दवा कर राधारानी के चरण में झुका दिए और उनका एक माला मेरे सिर में डाल दिय और हाथों में ढ़ेर सारा प्रसाद डाल दिए । श्री राधे ।- आपका संजीव

Thursday, 1 July 2021

बहुत सुंदर दर्शन । भगवान उसी की मदद करते हैं जो उनकी शरण में आता है । एक कहानी से समझते हैं ।

एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल कटवाने गया। नाई और उस व्यक्ति के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग बातें करते-करते भगवान के विषय पर बातें करने लगे।

तभी नाई ने कहा: मैं भगवान के अस्तित्व को नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो।

तुम ऐसा क्यों कह रहे हो व्यक्ति ने पूछा।
नाई ने कहा: बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे तो तुम समझ जाओगे कि भगवान का अस्तित्व नहीं है। अगर भगवान होते, तो क्या इतने सारे लोग भूखे मरते? क्या इतने सारे लोग बीमार होते? क्या दुनिया में इतनी हिंसा होती? क्या कष्ट या पीड़ा होती? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता जो इन सब की अनुमति दे।

व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा। नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया। वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे।

वह व्यक्ति वापस मुड़कर नाई की दुकान में दुबारा घुसा और उसने नाई से कहा: क्या तुम्हें पता है? नाइयों का अस्तित्व नहीं होता।

नाई ने कहा: तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो? क्या तुम्हे मैं दिखाई नहीं दे रहा? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ। और मैंने अभी अभी तुम्हारे बाल काटे है।

व्यक्ति ने कहा: नहीं! नाई नहीं होते हैं। अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी वाला होता?

नाई ने कहा: अगर वह व्यक्ति किसी नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा?

व्यक्ति ने कहा: तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, यही बात है। भगवान भी होते है लेकिन कुछ लोग भगवान पर विश्वास ही नहीं करते तो भगवान उनकी मदद कैसे करेंगे।

श्रद्धा और विश्वास ही सत्य है! अगर भगवान पर विश्वास करते है तो हमें हर पल उनकी अनुभूति होती है। और अगर हम विश्वास नहीं करते तो हमारे लिए उनका कोई अस्तित्व नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य :- भगवद् मार्ग , प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग में कोई भी बाधा आए , डिगना नहीं चाहिए हमें , हिम्मत नहीं हारना चाहिए।

भगवद् मार्ग , प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग में कोई भी बाधा आए , डिगना नहीं चाहिए हमें , हिम्मत नहीं हारना चाहिए , जितनी बाधा आए उतना बल लगा कर अपने गुरू देव के बताए मार्ग का अनुशरण और अनुगमन करके और जोर से अपने भक्ति को बढ़ाना चाहिए ।
इतिहास गवाह है । जब जब कोई भाग्यशाली जीव भगवद् भक्ति , भगवद् प्रेम मार्ग पर चला है , अपने प्रीतम श्री कृष्ण के लिए तड़पा है तब तब कुछ काल के लिए उसकी परीक्षा हुई है ।  और जीत प्रेमी की हुई है । प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग को इसिलिए तलवार के धार पर चलने की उपमा दी गई है । 
जैसे संत ज्ञानेश्वर को जल नहीं पीने दिया कूऐं पर , कुएं पर जाना बंद करवा दिया । तालाव पर धक्का देकर निकालने वाले तो कुछ भटके हुए हिंदू हीं थे ।

सुरदास पर वेश्यागामी का आरोप मढ़ दिया गया उनके हीं समाज के दुष्ट लोगों ने ।

कबीरदास जी के घर में आग लगाने वाले कौन थे ?

तुलसीदास पर मारक मंत्र का इस्तेमाल करवाने वाले तथाकथित अहंकारी हिन्दु हीं तो थे ।

तूकाराम पर व्यभिचार का आरोप लगाने वाले उनके हीं समाज के कलुषित अज्ञानी हिंदु हीं तो थे ।

मीरा को बिष पिलाने वाला हिंदु हीं तो था । अरे दुर का भी नहीं अपने ससुराल वाले हीं थे ।
चैतन्य महाप्रभु को नदियां में नहीं रहने दिया , परेशान किया और पंडालोग पुरी में अपमान किया । 

पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ साजिश करके अपमान करने बाले भी भटके हुए मुसलमान  हीं तो थे ।

जीसस को सूली पर चढ़ाने वाले इसाई हीं तो थे ।

नानक को अपमान करने वाले कुछ भटके हुए सिख हीं तो थे । हजारों उदाहरण हैं ।
जब भगवान और महापुरूषों को नहीं छोड़ा अश्रद्धावान लोगों ने तो हमलोग तो वास्तव में पतित हैं ।

इसलिए भक्ति मार्गी को , भगवद् प्रेम मार्गी को किसी का परवाह नहीं करना चाहिए कभी ।
एवं विरोधी के खिलाफ बुरा भी नहीं सोचना चाहिए , बिना किसी को अपशब्द कहे उल्टा उसके कल्याण के लिय सोंच कर आगे बढ़ना चाहिए ।
यह सब कठीन परीक्षा होती है भक्तों का भगवान के द्वारा , गुरू के द्वारा । कोई बाधा आए , कोई विरोध करें तो खुश होना चाहिए कि हमारा परीक्षा अपने हरिगुरू के द्वारा शुरू हो गया है । 
विरोधी तो निमित्त मात्र है यह सोंच कर और खुश होकर विरोध करने वाले को , कौमेंट करने वाले को धन्यवाद देना चाहिए दिल से और अपने भक्ति को , प्रेम को परीपक्क करना चाहिए ।
मैने जो यह सुनाया आप सबको वो मेरी पुज्यनियां मां रासेश्वरी देवी जी का मुझे समझाया गया निर्देश है ।
श्री राधे ।