Karmesh Sinha भाई साहब मैं भी हिन्दु हुं । पर दुसरे मे दोष देखने से पहले खुद की कमी को देखता हुं । कोई युसुफ खान अपने कौम के प्रति वफादार हैं तो यह उसकी अच्छाई है कमी नहीं ।
हम 70 % हिन्दूओं की कमिया :-
१. हमे हर समय दुसरे में दोष नजर आता है , खुद की कमी , खुद का कर्तव्य , खुद की जिम्मेदारी नजर नहीं आती ।
२. हम केवल अपने अधिकार की बात करते हैं , राष्ट्र भक्ति की बात करते हैं , सेना के वलिदान की बात करते हैं, पर जब कर्तव्य की बात आती है तो पिछे हट जाते हैं चाहे राष्ट्र के प्रति हो , या समाज के प्रति या परिवार के प्रति । हम हमेशा यह कामना करते हैं कि देश को भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद , खुद्दी राम बोस , प्रफुल्लचंद्र चाकी आदि मिले पर मेरे घर , मेरे कोख से नहीं पड़ोसी के घर से ।
३. हम असंगठित हैं, हम धर्म, संप्रदाय , जाति , दलित, अगड़ा, पिछड़ा , और तो और प्रांत के अंदर भी अनेक भाषाओं में बंटे हुए हैं । भाई भाई का दुश्मन है, भाई भाई का तरक्की नहीं देखना चाहता , अपने भाई से, दोस्त से जलन, द्वेष , टांग खिचने , उसकी किसी भी तरक्की पर उसको निचे दिखाना 90% हम हिंदुस्तानियों हिन्दुओं का संस्कार बन गया है ।
4. हम हिन्दू अपने ही धर्म के असली संत , महात्मा ,साधु को अहमियत नहीं देते और ना उनको प्रमोट करते हैं । उनकी सेवा ( सनातन धर्म के प्रचार हेतु व जीव सेवा , गौ गोरू सेवा के उनके काम में उनको अपना एक छोटा सा एमाऊंट धन दान ) करना तो दुर उनका बुराई करते हैं, हम अपनी उर्जा छाती पीट कर दुसरे की बुराई करने में लगाते हैं । पर अपने संतों के प्रचार करना तो दुर उनके बातों के पोस्ट को वर्जुअल दुनिया में पसंद करने से भी भागते हैं ।
5. हम 90% हिंदु गंदी राजनीति से प्रेरित है और उसी चश्मे से दुनिया को देखते हैं , घर , परिवार , समाज हर जगह राजनीति।
6. हम अपने ही रास्ते , स्टेशन , बस स्टैंड आदि बहुत दुर , मंदीरों , दुसरे के खेत , बगीचे , पड़ोसी के घर के आगे बिच रास्ते पर कुड़ा फेंकते हैं । और जब कोई रोकता है तो लड़ने लगते हैं उससे ।
7. हम 90% हिन्दु केला और कोई भी चीज खाकर सड़क पर उसका छिलका और रैपर , पानी का वोतल बड़े ठाठ से फेंकते हैं और खुद को बहुत पढ़ें लिखे मानते हैं ।
8. हम 90% हिन्दु के कथनी और करनी में 180 डिग्री का फर्क है ।
9. हम 90% हिन्दु निस्वार्थ दान तो बहुत दुर की बात किसी के मदद में पिछे हट जाते हैं । एसिडेंट में रोड पर परा एक हमारा भाई मर रहा होता है और हम साइड से निकल लेते हैं ।
१०. हम 80% हिंदु बराबर उनके किसी दुसरे मजहब के मजार पर सिर झुकाते और मजार के चादर चढ़ाने और दान देते नजर आते हैं । 50% हिन्दु उनके यहां ईद के भोज उनके साथ खाते मिलेंगे । और उनका टोपी और गमछा पहनते मिलेगें ।।
और भी बहुत सी कमियां है हममें जिस कारण वो लोग हमको बखुबी समझते हैं और हमारा फायदा उठाते हैं ।
अब उनके मजबुती का कारण :+
१. उनमें खाने के लिए पैसा हो या ना हो पर धर्म के नाम पर चंदा में खुब भाग लेते हैं।
२. दुनिया के किसी भाग में कोई उनके धर्म या जाति , मजहब का हो । वो चाहे आतंकी यूं ना हो , उनके लिए वो ह्रदय से साथ खरे मिलेंगे ।
३. वो हमेशा अपने मजहब के लोगों का साथ देने के लिए संगठित होकर खड़े मिलेगे , चाहे वो किसी देश का हो ।
४. वो कभी भी किसी भी हिन्दु मंदिरों के अंदर किसी भी हालत में ना प्रवेश करते हैं और ना मंदीर के सामने सिर झुकाते मिलेंगे । और दान तो एक अठ्ठनी भी नहीं दिया आज तक ।
5. वो खुद में इतना संगठित है कि उनके जाति का नाम भी दुसरे मजहब के लोग नहीं जान पाते ।
6. वो दुसरे मजहब के लोगों के किसी भी भोज में शरीक कभी नहीं होते ।
7. वो आपका कितना भी बड़ा दोस्त क्यूं नहीं पर जरूरत पड़ने पर वो अपने मजहब का पक्ष लेते हुए आपके खिलाफ तलवार उठाने से जरा भी नहीं हिचकिचाते ।
8. उनके लिए राष्ट्र से पहले उनका मजहब है , उनका कौम है ।
9. वो जहां घर बनाएंगे अपने कौम के मुहल्ले में ।
पर हम अपने घर के बगल का जमीन पैसे के लोभ में अपने किसी हिन्दु भाई को ना बेचकर उनको बेचना पसंद करते हैं । जिसमें वो मस्जिद और मांस का दुकान खोल देते हैं ।
तो अगर युसुफ खान ने मरने से पहले अपना धन वक्फ बोर्ड को देकर अपने मजहब , अपने भाई , अपने कौम के प्रति वफादारी साबित किया तो हमको मिर्ची क्यों लग रही है । हम 100कड़ोर हिन्दु ही तो सलमान , शाहरूख , आदि के फिल्म का टिकट और सी डी ब्लैक में खड़ीद कर देखना पसंद करते हैं और उनको हिरो नं वन बना कर धन और शोहरत देकर ताकतवर और असरदार बनाते हैं।
इसलिए मेरे हिन्दु भाई घडियाली आंसु बहाते हो ना और कोई युसूफ खान अपने कौम को दान देता है तो छाती पिटते हो तो मुझे आपलोगो पर बड़ा तरह आता है ।और शर्म भी ।
वो अपने कौम , मजहब के प्रति पुरी तरह वफादार हैं इमानदार है और हम अपने कौम , मजहब, समाज और परिवार और राष्ट्र के प्रति गद्दार , द्रोही है । यह सत्य स्वीकार कर ले और सुधरे तो अच्छा है नहीं तो वजूद समाप्त हो जाएगा पचास साल के अंदर अंदर ।
:- संजीव कुमार ।