Wednesday, 30 December 2020
जिन्दगी क्या है ? जन्म से मृत्यु तक का सफर जिन्दगी है , जिन्दगी साधन है साध्य नहीं ! साधन है हरि का दिव्य प्रेम पाने के लिय |
Tuesday, 22 December 2020
पहले पुर्ण रूप से हरिगुरू पर श्रद्धा और विस्वास करो फिर मेरा प्रचार करो । मैं और मेरा संत एक हैं, भक्त (संत) और भगवान एक हैं ।
वातावरण का प्रभाव हमारे गुरुदेव ने बहुत सुन्दर एक बात कही है, जिसमें उन्होंने वातावरण का हमारे मन पर क्या प्रभाव पड़ता है, उसकी चर्चा की है |- पूज्यनियां मां
श्रद्धा व विश्वास से प्रभुप्राप्ति।
Sunday, 13 December 2020
दो शब्द हमारे युवाओं से , बच्चों से :-
Saturday, 12 December 2020
सब यहीं पड़ा रह जावेगा, जब छोड चलेगा तन बन्जारा,जब प्राण जावेगा निकल निकल ।
प्रेम की परिभाषा आसान नही हैं | संसारिक प्रेम , प्रेम नही स्वार्थ है | इसमे स्वार्थ पुरा नही होने पर द्वेश की संभावना छुपी हैं |
प्रेम की पराकाष्ठा।
कैसा तुम्हारा काम है!
Friday, 11 December 2020
दु:ख का असली कारण और निदान ।
Thursday, 10 December 2020
How to give up your fear and become fearless in your life . the life will made easy and happy .
क्रोधाद्भवति. सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम:। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति। । (गीता 2.63)
God is omnipresence . He permeates every particle equal measures with all his powers and qualities .
success and failure .
Compiled spiritual insights by scientists, including some of the greatest physicists of the 20th century...
कमजोर मानसिक अवस्था वाला मनुष्य आसानी से दुसरे के बहकावे में आ जातें हैं ।
मानव के रोगी होने का महत्त्वपूर्ण कारण ।
Wednesday, 9 December 2020
धर्म से क्या मिलता है ? धर्म क्या है ?
Friday, 4 December 2020
गोलोक - जिस गोलोक में नित्य नवीन लीलाएँ हो रही हैं , उस गोलोक का वर्णन संक्षिप्त में :- श्री कृपालु महाप्रभु जु ।
Monday, 30 November 2020
अंतर्चेतना और सद्गुरू देव श्री कृपालु महाप्रभु ।।
Sunday, 29 November 2020
*‼क्या पाया और क्या खोया❓‼*
Saturday, 28 November 2020
मृत्यु के प्रकार ।।
Thursday, 26 November 2020
शिक्षा का प्रमुख चार उद्देश्य
मैकोले की रोमन शिक्षा पद्धति उखाड़ कर जबतक हमारे देश हमारी अपनी मूल शिक्षा निति जो की नालंदा , विक्रमशिला और तक्षशिला की शिक्षा निति लागु नहीं होगी तब तक हमारा देश विश्वगुरू नहीं बन सकता , हमारे देश के लोग गुलामी की मानसिकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी अवचेन मन में समाई हुई है जो नहीं निकल सकती । इसलिए हम हिंदुओं को एक जुट होकर रोमन शिक्षा को देश से बाहर खदेड़ना होगा हीं । तभी नीचे लिखे शिक्षा का उद्देश्य पुरा होगा । हमारे देश के 80% मुसलमानों का ओरिजिन , मूल हिंदु हैं । इनका भी काया पलट नहीं हो सकता तब तक जबतक वो हिंदुस्तानी मूल शिक्षा और संस्कृति को नहीं अपनाऐंगें । दया क्षमा , परोपकार , राष्ट्रियता का असली भाव नहीं आ सकता , देश द्रोहीं ब्रेन हैकर भारतिए युवा को दिग्भ्रमित करने वाले एजेंट पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहें हैं देश में । उनका सफाया , तभी होगा जब हमारी अपनी मूल भारतीय शिक्षा लागु होगी देश में । और यह तमाम भारत के लोगों का कर्तव्य है इसके लिए आंदोलन करें । किसी भी व्यक्ति को कोई व्यक्ति , समाज , समुदाय से नफ़रत नहीं होता , वल्कि उसके गलत नितियों से होता है , । हमने देश से अंग्रेजों को तो भगा दिया पर अंग्रेजियत -उसकी शिक्षा पध्द्ति , उसकी डीभाइड एण्ड रूल , और उनकी शासन प्द्धति ,न्याय पद्धति , पीनल कोड , शासन और सोंचने का तरिका आदि आदि आज तक देश में लागु है । यही एक बड़ा रोग है जिससे देश ग्रसित हैं ।
शिक्षा का प्रमुख चार उद्देश्य है :-
१. पहला उद्देश्य - आध्यात्मिक विकास ।
२. दुसरा उद्देश्य - शारीरिक व मानसिक विकास ।
३. तीसरा उद्देश्य - बौद्धिक विकास ।
४. चौथा उद्देश्य - आर्थिक व भौतिक विकास।
१. आध्यात्मिक विकास क्या है :- मैं कौन हुं शरीर हुं या आत्मा ? आत्मा क्या है ? मेरा कौन है , परमात्मा कौन हैं ? धर्म , अर्थ , काम , मौक्ष क्या है । चरित्र का उत्थान कैसे हो ? मानव जीवन के उद्देश्य का ज्ञान , पुरूषार्थ किसे कहतें हैं नैतिकता का समावेश जीवन में कैसे हो , स्वार्थ से ऊपर उठकर प्रत्येक जीव और प्राणी के प्रति दया , क्षमा , त्याग कैसे करें , यहां तक की बृक्ष , पेड़ , पौधे और प्रकृति , राष्ट्र समाज के प्रति मानव जाति का कर्तव्य क्या है ? जाति , पांति, अमीर गरीब भेद भाव और धर्म भेद से उपर उठकर सर्वधर्म समभाव कैसे हो ? हमारा नैतिक कर्तव्य और जीवन मूल्य एवं आदर्श क्या होना चाहिए ? समाज में सद्भावना कैसे बनी रहें , हम काम, क्रोध , मद् , मोह, लोभ अहंकार , घृणा , द्वेष आदि का दमन कैसे करें ? मानविए गुणों का , दैविक गुणों का विकास , मानविए मूल्यों का विकास आध्यात्मिक शिक्षा से हीं संभव हैं ।
अत: सही शिक्षा का सबसे पहला उद्देश्य आध्यामिक विकाश है जो दो पैर वाले जन्में जीव को पशु से मानव बनाता है । आज के मैकोले शिक्षा में मौरल एजुकेशनल या तो समाप्त है या फोकस्ड नहीं हैं ।
श्री कृपालु जी महाराज महाप्रभु जी का पुस्तक 'प्रेम रस सिद्धांत' " वह " मैं कौन ,मेरा कौन " और "गीता" देश के सभी शिक्षण संस्थानों में खास कर उच्च सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों में लागु कर देनें से शिक्षा के स्तर में सुधार और मौरल एजुकेशनल में बड़ी उन्नति अवश्य संभव है ।
२. दुसरा उद्देश्य है शारीरिक विकास :- शारीरिक विज्ञान शिक्षा का दुसरा महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है । मनुष्य को क्या खाना चाहिए क्या नहीं , कब खाना चाहिए , कितना खाना चाहिए , कितना सोना चाहिए कितना व्यायाम करना चाहिए , कितना योगा करना चाहिए ?
यानि हम अपने शरीर को कैसे स्वस्थ रखें हमेशा ? यह कम से कम दसवें क्लास तक के स्टुडेंट को सही सही जरूर ज्ञान हो जाना चाहिए , एक स्वस्थ शरीर में हीं स्वस्थ मस्तिस्क का विकाश होता है वर्णा एक मां वाप अस्वस्थ हैं तो उससे विकारयुक्त बच्चे का , कमजोड़ मन वाले बच्चे का जन्म होता है , शारीरिक ज्ञान के विकाश के क्रम में यह भी ज्ञान होना चाहिए की एक दम्पत्ति को कब साथ करना चाहिए कब नहीं जिससे मेधावी और संस्कारवाण बच्चे का जन्म हो , पर आज की शिक्षा में इन सब बातों का स्थान शुन्य सा है ।
३. तीसरा उद्देश्य है बौद्धिक विकास - बौद्धिक शिक्षा का विकास का मतलब , मेडिकल साइंस , लौ , इंजिनियरिंग, सीए , शिक्षक , विद्वान , ज्ञान , विज्ञान , वैज्ञानिक , राजनितिज्ञ ( राष्ट्र समाज देश के हित में निति बनाने बाला ना की लुटकर अपना घर भरने वाला ) यानि बौद्धिक विकास का मतलब हीं हैं ज्ञान विज्ञान ,न्याय शास्त्र , टेक्नौलौजी आदि में दक्षता हासिल करना ।
४. चौथा और अंतिम उद्देश्य है आर्थिक व भौतिक विकास - जब उपर का सभी शिक्षा , ज्ञान का विकास सही सही हो जाएगा तो आर्थिक उन्नति उस व्यक्ति का हीं नहीं पुरे समाज का , देश का और राष्ट्र का अपने आप हो जाएगा , सारी बुराई समाज से समाप्त हो जाएगी ।
लोगों के हाथ में स्कूल कौलेज युनिवर्सिटी आदि कागज का टुकड़ा ( डिग्री ) धरा कर यह नहीं कहेगा की जाओ रोजगार के लिए वेरोजगारी के लाईन में खड़े होकर नौकड़ी की भीख मांगों , सारा बचपन और युवा वस्था और धन गलत शिक्षा नीति के जाल में खर्च कर दिया , मैकोले कि दूषित , प्री प्लान , गंदे शिक्षा नीति में जो देश में , वैरोजगार नहीं वेकार लोगों की फौज बना रहा है यह रोमन शिक्षा नीति , जो अंग्रेजों की देन हैं ।
1828 ई में जब विलियम बैंटिक भारत का गवर्नर जेनरल था , मैकोले ने हमारे देश के प्रमुख शिक्षा संस्थान , नालंदा , तक्षशिला , विक्रमशीला विश्वविधालय को तबाह कर दिया जिससे वेकार लोग पैदा किया जा सके , हमारे देश की शिक्षा विश्व में अव्वल था , विदेशी यहां पढ़ने आतें थे । ह्वेनशांग , फाहीयान आदि ।
उस वक्त की हमारी अपनी शिक्षा नीति उपर के चारों उद्देश्य को सौफी सदी पुरा करता था , देश के लोगों का चरित्र ऊंचा था , घरों में ताले नहीं लगते थे , हमारे देश की तत्कालिन टेक्नोलौजी विश्व में ऊंचा था , चाणक्य , आर्यभट्ट , आदि पैदा हुए , अनेकों रियल देश भक्त पैदा हुए ।
शिक्षा का अगर उपर का प्रथम तीन उद्देश्य पुरा होगा तो लोग दक्ष होंगें , अंतर्पन्योर , लोभ-लालच रहित उधोगपति , व्यवसाई ज्यादा पैदा होंगें जो रोजगार देने वाले बनेंगें , पूंजी बाद समाप्त हो जाएगा , लोग चरित्रबाण बनेंगें , टीभी के स्टुडियो में बैठकर लंबी लंबी भाषण देश सेवक दिखाने का नाटक , समाज सेवी होने का प्रचार नहीं करेंगें वल्कि वास्तव में अपनें कर्तव्यों का निर्वाह बिना लोभ लालच , छल प्रपंच , के करेंगें । श्री राधे ।
आज देश में फिर से हमारा अपना वही स्वदेशी शिक्षा नीति की नितांत आवश्यकता है । मैकोले की शिक्षा नीति में पढ़ने वाले से स्वकल्याण असंभव है । - संजीव कुमार , रांची ।