तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे .....
अब तो तरस खाओ ,साँवरे
तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे ......
जनम जनम मैं बिरथा गामायों
कबहुँ न पायो चैन रे
अब तो दरस दे दो , साँवरे .....
तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे .......
कित मैं जाँऊ , का से गांऊ ........
सुर ना सजे अब ,साँवरे .........
तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे ....
दिन रैन बित्यो युग युग बित्यो
पलहुँ न पायो चैन रे
तुम बिनु जिया नही लागे ,साँवरे .....
धन्य ' कृपालु ' पायो गुरु रुप सो
लै के बतायो तेरो नाम रे
तुम बिनु जिया नाही लागे , साँवरे ...
कलि-काल का कौन भरोषो
किस दिन निकसत प्राण रे
अब तो तरस खाओ साँवरे
तुम बिनु जिया नाही लागे , साँवरे ......
तुम बिनु जिया नाही लागे , साँवरे .......
( संजीव )
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