बड़ी मुद्दत् से भूला था जिनको बड़ी सिद्दत् से पाया हुँ उनको | चाहता हुँ कि बस तु मुझे प्यार करे , कहां है होश जो मै भी तुझे प्यार करुँ , तु ही बन जा अब मेरी तक़दीर सांवरे मेरी हैसियत का क्या ,मै तेरा बनुँ ना बनुँ | तीफ्ले सरकश का कोई आंजाम तो दे दे दे एक बूँद अपनी आँखो के मैखाने से | (संजीव)
तेरे कूचे से जो हो के बरबाद चले ऐ हमदम मेरी ये मुहब्बत रुसवा होगी मेरा कुछ है नहीं बदनाम मैं कल भी था तेरी चुप्पी से बदतर मौत भी क्या होगी ! तू सोच कर, कर ले कदर अब मेरी भी एक बार कह दे 'मेरा' फिर न तमन्ना होगी ||
हम तरसते थे तशब्बुर से फ़कत जिन दिदारे यार की हाय ! वो पहलु में विठा के मालोमाल कर दिया | ता क़यामयत अब ये नशा फिर कभी न उतरेगी उफ़ ! वे नज़रो से पिला के जो मद़होश कर गया | (संजीब)