Monday, 7 March 2016

बस आप आए और सहर हो गइ |

बड़ी हसरतों से रात में सजाए थे सपने
बस आप आए और सहर हो गइ |
अपनी सुरत भी, अब याद नही संजु
दिलो दिमाग पे जो छाइ है तशवीर यार की ||
(संजीव)


किसे है होश तेरी महफील में |

अब बहारो से दिल बहलाऊँ कैसे !
जामे उल्फत का जो पिलाया है मुझे |
वज़्मे दिल अब पेश करुँ कैसे
किसे है होश तेरी महफील में ||
( संजीव )


दे दे एक बूँद अपनी आँखो के मैखाने से |

बड़ी मुद्दत् से भूला था जिनको
बड़ी सिद्दत् से पाया हुँ उनको |
चाहता हुँ कि बस तु मुझे प्यार करे ,
कहां है होश जो मै भी तुझे प्यार करुँ ,
तु ही बन जा अब मेरी तक़दीर सांवरे
मेरी हैसियत का क्या ,मै तेरा बनुँ ना बनुँ |
तीफ्ले सरकश का कोई आंजाम तो दे 
दे दे एक बूँद अपनी आँखो के मैखाने से |
(संजीव)


एक बार कह दे 'मेरा' फिर न तमन्ना होगी ||

तेरे कूचे से जो हो के बरबाद चले 
ऐ हमदम मेरी ये मुहब्बत रुसवा होगी 
मेरा कुछ है नहीं बदनाम मैं कल भी था 
तेरी चुप्पी से बदतर मौत भी क्या होगी !
तू सोच कर, कर ले कदर अब मेरी भी 
एक बार कह दे 'मेरा' फिर न तमन्ना होगी ||



वे नज़रो से पिला के जो मद़होश कर गया |

हम तरसते थे तशब्बुर से फ़कत जिन दिदारे यार की 
हाय ! वो पहलु में विठा के मालोमाल कर दिया |
ता क़यामयत अब ये नशा फिर कभी न उतरेगी 
उफ़ ! वे नज़रो से पिला के जो मद़होश कर गया |
(संजीब)