Sanjeev Kumar blogs
Monday, 7 March 2016
किसे है होश तेरी महफील में |
अब बहारो से दिल बहलाऊँ कैसे !
जामे उल्फत का जो पिलाया है मुझे |
वज़्मे दिल अब पेश करुँ कैसे
किसे है होश तेरी महफील में ||
( संजीव )
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