Monday, 30 November 2020
अंतर्चेतना और सद्गुरू देव श्री कृपालु महाप्रभु ।।
Sunday, 29 November 2020
*‼क्या पाया और क्या खोया❓‼*
Saturday, 28 November 2020
मृत्यु के प्रकार ।।
Thursday, 26 November 2020
शिक्षा का प्रमुख चार उद्देश्य
मैकोले की रोमन शिक्षा पद्धति उखाड़ कर जबतक हमारे देश हमारी अपनी मूल शिक्षा निति जो की नालंदा , विक्रमशिला और तक्षशिला की शिक्षा निति लागु नहीं होगी तब तक हमारा देश विश्वगुरू नहीं बन सकता , हमारे देश के लोग गुलामी की मानसिकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी अवचेन मन में समाई हुई है जो नहीं निकल सकती । इसलिए हम हिंदुओं को एक जुट होकर रोमन शिक्षा को देश से बाहर खदेड़ना होगा हीं । तभी नीचे लिखे शिक्षा का उद्देश्य पुरा होगा । हमारे देश के 80% मुसलमानों का ओरिजिन , मूल हिंदु हैं । इनका भी काया पलट नहीं हो सकता तब तक जबतक वो हिंदुस्तानी मूल शिक्षा और संस्कृति को नहीं अपनाऐंगें । दया क्षमा , परोपकार , राष्ट्रियता का असली भाव नहीं आ सकता , देश द्रोहीं ब्रेन हैकर भारतिए युवा को दिग्भ्रमित करने वाले एजेंट पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहें हैं देश में । उनका सफाया , तभी होगा जब हमारी अपनी मूल भारतीय शिक्षा लागु होगी देश में । और यह तमाम भारत के लोगों का कर्तव्य है इसके लिए आंदोलन करें । किसी भी व्यक्ति को कोई व्यक्ति , समाज , समुदाय से नफ़रत नहीं होता , वल्कि उसके गलत नितियों से होता है , । हमने देश से अंग्रेजों को तो भगा दिया पर अंग्रेजियत -उसकी शिक्षा पध्द्ति , उसकी डीभाइड एण्ड रूल , और उनकी शासन प्द्धति ,न्याय पद्धति , पीनल कोड , शासन और सोंचने का तरिका आदि आदि आज तक देश में लागु है । यही एक बड़ा रोग है जिससे देश ग्रसित हैं ।
शिक्षा का प्रमुख चार उद्देश्य है :-
१. पहला उद्देश्य - आध्यात्मिक विकास ।
२. दुसरा उद्देश्य - शारीरिक व मानसिक विकास ।
३. तीसरा उद्देश्य - बौद्धिक विकास ।
४. चौथा उद्देश्य - आर्थिक व भौतिक विकास।
१. आध्यात्मिक विकास क्या है :- मैं कौन हुं शरीर हुं या आत्मा ? आत्मा क्या है ? मेरा कौन है , परमात्मा कौन हैं ? धर्म , अर्थ , काम , मौक्ष क्या है । चरित्र का उत्थान कैसे हो ? मानव जीवन के उद्देश्य का ज्ञान , पुरूषार्थ किसे कहतें हैं नैतिकता का समावेश जीवन में कैसे हो , स्वार्थ से ऊपर उठकर प्रत्येक जीव और प्राणी के प्रति दया , क्षमा , त्याग कैसे करें , यहां तक की बृक्ष , पेड़ , पौधे और प्रकृति , राष्ट्र समाज के प्रति मानव जाति का कर्तव्य क्या है ? जाति , पांति, अमीर गरीब भेद भाव और धर्म भेद से उपर उठकर सर्वधर्म समभाव कैसे हो ? हमारा नैतिक कर्तव्य और जीवन मूल्य एवं आदर्श क्या होना चाहिए ? समाज में सद्भावना कैसे बनी रहें , हम काम, क्रोध , मद् , मोह, लोभ अहंकार , घृणा , द्वेष आदि का दमन कैसे करें ? मानविए गुणों का , दैविक गुणों का विकास , मानविए मूल्यों का विकास आध्यात्मिक शिक्षा से हीं संभव हैं ।
अत: सही शिक्षा का सबसे पहला उद्देश्य आध्यामिक विकाश है जो दो पैर वाले जन्में जीव को पशु से मानव बनाता है । आज के मैकोले शिक्षा में मौरल एजुकेशनल या तो समाप्त है या फोकस्ड नहीं हैं ।
श्री कृपालु जी महाराज महाप्रभु जी का पुस्तक 'प्रेम रस सिद्धांत' " वह " मैं कौन ,मेरा कौन " और "गीता" देश के सभी शिक्षण संस्थानों में खास कर उच्च सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों में लागु कर देनें से शिक्षा के स्तर में सुधार और मौरल एजुकेशनल में बड़ी उन्नति अवश्य संभव है ।
२. दुसरा उद्देश्य है शारीरिक विकास :- शारीरिक विज्ञान शिक्षा का दुसरा महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है । मनुष्य को क्या खाना चाहिए क्या नहीं , कब खाना चाहिए , कितना खाना चाहिए , कितना सोना चाहिए कितना व्यायाम करना चाहिए , कितना योगा करना चाहिए ?
यानि हम अपने शरीर को कैसे स्वस्थ रखें हमेशा ? यह कम से कम दसवें क्लास तक के स्टुडेंट को सही सही जरूर ज्ञान हो जाना चाहिए , एक स्वस्थ शरीर में हीं स्वस्थ मस्तिस्क का विकाश होता है वर्णा एक मां वाप अस्वस्थ हैं तो उससे विकारयुक्त बच्चे का , कमजोड़ मन वाले बच्चे का जन्म होता है , शारीरिक ज्ञान के विकाश के क्रम में यह भी ज्ञान होना चाहिए की एक दम्पत्ति को कब साथ करना चाहिए कब नहीं जिससे मेधावी और संस्कारवाण बच्चे का जन्म हो , पर आज की शिक्षा में इन सब बातों का स्थान शुन्य सा है ।
३. तीसरा उद्देश्य है बौद्धिक विकास - बौद्धिक शिक्षा का विकास का मतलब , मेडिकल साइंस , लौ , इंजिनियरिंग, सीए , शिक्षक , विद्वान , ज्ञान , विज्ञान , वैज्ञानिक , राजनितिज्ञ ( राष्ट्र समाज देश के हित में निति बनाने बाला ना की लुटकर अपना घर भरने वाला ) यानि बौद्धिक विकास का मतलब हीं हैं ज्ञान विज्ञान ,न्याय शास्त्र , टेक्नौलौजी आदि में दक्षता हासिल करना ।
४. चौथा और अंतिम उद्देश्य है आर्थिक व भौतिक विकास - जब उपर का सभी शिक्षा , ज्ञान का विकास सही सही हो जाएगा तो आर्थिक उन्नति उस व्यक्ति का हीं नहीं पुरे समाज का , देश का और राष्ट्र का अपने आप हो जाएगा , सारी बुराई समाज से समाप्त हो जाएगी ।
लोगों के हाथ में स्कूल कौलेज युनिवर्सिटी आदि कागज का टुकड़ा ( डिग्री ) धरा कर यह नहीं कहेगा की जाओ रोजगार के लिए वेरोजगारी के लाईन में खड़े होकर नौकड़ी की भीख मांगों , सारा बचपन और युवा वस्था और धन गलत शिक्षा नीति के जाल में खर्च कर दिया , मैकोले कि दूषित , प्री प्लान , गंदे शिक्षा नीति में जो देश में , वैरोजगार नहीं वेकार लोगों की फौज बना रहा है यह रोमन शिक्षा नीति , जो अंग्रेजों की देन हैं ।
1828 ई में जब विलियम बैंटिक भारत का गवर्नर जेनरल था , मैकोले ने हमारे देश के प्रमुख शिक्षा संस्थान , नालंदा , तक्षशिला , विक्रमशीला विश्वविधालय को तबाह कर दिया जिससे वेकार लोग पैदा किया जा सके , हमारे देश की शिक्षा विश्व में अव्वल था , विदेशी यहां पढ़ने आतें थे । ह्वेनशांग , फाहीयान आदि ।
उस वक्त की हमारी अपनी शिक्षा नीति उपर के चारों उद्देश्य को सौफी सदी पुरा करता था , देश के लोगों का चरित्र ऊंचा था , घरों में ताले नहीं लगते थे , हमारे देश की तत्कालिन टेक्नोलौजी विश्व में ऊंचा था , चाणक्य , आर्यभट्ट , आदि पैदा हुए , अनेकों रियल देश भक्त पैदा हुए ।
शिक्षा का अगर उपर का प्रथम तीन उद्देश्य पुरा होगा तो लोग दक्ष होंगें , अंतर्पन्योर , लोभ-लालच रहित उधोगपति , व्यवसाई ज्यादा पैदा होंगें जो रोजगार देने वाले बनेंगें , पूंजी बाद समाप्त हो जाएगा , लोग चरित्रबाण बनेंगें , टीभी के स्टुडियो में बैठकर लंबी लंबी भाषण देश सेवक दिखाने का नाटक , समाज सेवी होने का प्रचार नहीं करेंगें वल्कि वास्तव में अपनें कर्तव्यों का निर्वाह बिना लोभ लालच , छल प्रपंच , के करेंगें । श्री राधे ।
आज देश में फिर से हमारा अपना वही स्वदेशी शिक्षा नीति की नितांत आवश्यकता है । मैकोले की शिक्षा नीति में पढ़ने वाले से स्वकल्याण असंभव है । - संजीव कुमार , रांची ।
बहकुं ना अब बहकाने से ।
तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे .....अब तो तरस खाओ ,साँवरे तुम बिनु जिया नाही लागे ,साँवरे ......
Monday, 23 November 2020
“What is the aim of human life?”
Saturday, 21 November 2020
परामनोवैज्ञानिक शक्ति और घटना पर मेरा अपना अनुभव । :- संजीव
मानव का प्रकार :- संजीव कुमार
मेरे जीवन कि दिशा का बदलना गुरूदेव के कृपा से ।।
Friday, 20 November 2020
सूक्ष्म संवेदिता
सूक्ष्म संवेदिता एक रहस्य , एक सच्चाई । निज अनुभव ।
धनवान कौन ?
आज के शहरिकरण , बाजारवाद , भौतिक भोगवाद के युग में शादी विवाह में बहुत सावधानी की जरूरत है :-
तेरा हर फैसला मंजूर है , कबुल है ।।
what is real meaning of freedom ?
सफ़र-ए- जिंदगी का तू अकेला ही मुसाफिर है,
Thursday, 19 November 2020
दर्द कागज़ पर, मेरा बिकता रहा,
दर्द कागज़ पर,
मेरा बिकता रहा,
मैं बैचैन था,
रातभर लिखता रहा..
छू रहे थे सब,
बुलंदियाँ आसमान की,
मैं सितारों के बीच,
चाँद की तरह छिपता रहा..
दरख़्त होता तो,
कब का टूट गया होता,
मैं था नाज़ुक डाली,
जो सबके आगे झुकता रहा..
बदले यहाँ लोगों ने,
रंग अपने-अपने ढंग से,
रंग मेरा भी निखरा पर,
मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..
जिनको जल्दी थी,
वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,
मैं समन्दर से राज,
गहराई के सीखता रहा..!!
"ज़िन्दगी कभी भी ले सकती है करवट...
तू गुमान न कर...
बुलंदियाँ छू हज़ार, मगर...
उसके लिए कोई 'गुनाह' न कर.
कुछ बेतुके झगड़े,
कुछ इस तरह खत्म कर दिए मैंने
जहाँ गलती नही भी थी मेरी,
फिर भी हाथ जोड़ लिए मैंने ।।
Learn Shortcut Keys System!! Computer
ईश्वर की मर्जी हमारे लिए शुभदायक है ।।
जीवन की बहुत बड़ी सीख
जीवन की बहुत बड़ी सीख इस सत्य कहानी से :- बहुत महत्त्वपूर्ण घटना है सीख के लिए ।
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"
माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था!
किसी सेे साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की
जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे
खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी
छोड़ दिया
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया! और
अपने दोस्त भी गोरे बनाए
शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो
से विवाह किया,
जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997)
तथा
पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को
जन्म दिया।
वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर
चल रहा था!
हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले
डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था,
ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें
या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत
पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की
बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ
25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन
रुकने लगी,
उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में
हालत काबू में नहीं आए,
सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए
वह भी उसे नहीं बचा पाए।
उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी
50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था
और 25 जून 2009 को
वह इस दुनिया से चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था!
उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि,
उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था,
उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे,
उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!
माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा
देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।
माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger
यह सभी क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलता ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने
माइकल जैकसन को सर्च किया!
ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर
सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और
गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले
हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!
सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग
कुदरती मौत की बजाय
बनावटी मौत ही मरते हैं!
"क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर"...
कुछ गंभीर प्रश्न--
चिन्तन अवश्य कीजियेगा.......
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?
हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और
बेहद खर्चीली शादियों से, जन्म दिन पर करोंड़ों उड़ा कर
किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?
क्या आपको याद है कि,
दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने
क्या खाया था ?
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में,
क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?
कितनी पीढ़ियों के,खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है। बहुतों को एक भी नहीं ।
"हमारी जरूरत कितनी हैं ?और
हम पाना कितना चाहते हैं"?
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी
कमाने में सक्षम नहीं है जो,
हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा
सेविंग कर देना चाहते हैं ?
क्या हम प्रत्येक दिन आधा घंटा एकांत रूपध्यान साधना ( मेडिटेशन) में खर्च नहीं कर सकते ?
क्या हम गरीबों को , अपने से कमजोर व नीचें बाले की छोटी छोटी सहायता नहीं कर सकते ?
क्या हम अपने मित्रों के लिए दुआ नहीं कर सकते ? क्या हम सबके लिए दुआ नहीं कर सकते ?
क्या आप अपनी मासिक आय का
5% से 10% दान सही जगह पर नहीं कर सकतें ?
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है। बहुत कम लोग हैं सात अरब में से शायद एक प्रतिशत भी नहीं ।
इससे पहले कि हम आप
स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ,
इससे पहले कि,
कोलस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
परमानंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसते हैं
जब कोई उनसे कहेगा कि,
"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "
किसी के बारे में,
उसके शानदार कपड़े और
बढ़िया कार देखकर,
राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक
स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!*
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले...
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे,
तब अपनी बातें,
अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे,
शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर
हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?
तब हम मुस्कुराकर
अपने अदृश्य आँसुओं के साथ
बड़े फख्र से कहेंगे---
"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने
अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "
श्री राधे ।।
:- संजीव कुमार , रांची , झारखंड ।
16 जुलाई 2016 समय 11.45 AM