मृत्यु तीन प्रकार की होती है ।
दैहिक
दैविक
भौतिक
दैहिक मृत्यु - स्वाभाविक , मृत्यु । नेचुरल डेथ । समय पुरा हो जाने पर शरीर छुटना दैहिक मृत्यु है ।
दैविक मृत्यु - नामापराध या पाप कर्म की अधिक्ता , अनाचार , दुराचार कर्म के कारण उम्र का छय होना , उम्र का ह्रास हो जाना, पापाचार में लिप्त रहने के कारण रोग, शोक हो जाना , अनाचार में लिप्त रहने के कारण प्राकृतिक दुर्घटनादि में , प्राकृतिक आपदा में मर जाना , दुसरे को सताना , चोरी , डकैती आदि कर्मों के कारण । कुकर्म में लिप्त रहने कारण मृत्यु । दुसरे के सामान को छिन लेना , दूसरे के हक पर अनिति से कब्जा करने के कारणादि से काल का कोप भाजन बनना दैविक मृत्यु है।यह भी अकाल मृत्यु है , असामायिक मृत्यु है । एक बच्चा जन्म लेते हुए या गर्भ में मर जाना , यानि उसके पिछले जन्म में कर्म अच्छे नहीं थे ।
भौतिक मृत्यु - आत्महत्या कर लेना या दुर्घटना में मृत्यु जो खुद के गलती के कारण होना , गलत खान पान , गलत रहन सहन के कारण मृत्यु को, काल को खुद बुलाना अकाल मृत्यु है , असामायिक मृत्यु है ।
दैविक मृत्यु और भौतिक मृत्यु वाले जीव को कुकर शुकर , कीट , पतंगादि योनि प्राप्त होती है । उसने मानव शरीर का दुरूप्योग किया है ।
No comments:
Post a Comment