Showing posts with label mairrage. Show all posts
Showing posts with label mairrage. Show all posts

Friday, 20 November 2020

आज के शहरिकरण , बाजारवाद , भौतिक भोगवाद के युग में शादी विवाह में बहुत सावधानी की जरूरत है :-

मेरी सलाह :- आज के शहरिकरण , बाजारवाद , भौतिक भोगवाद के युग में शादी विवाह में बहुत सावधानी की जरूरत है :- 

 जो परिवार परोपकारी नहीं है । जो मां बाप परोपकार का काम कभी नहीं किया जीवन में या नाम मात्र का किया है  , उसका लड़का भी परोपकारी नहीं होगा कभी ज्यादातर केस में । और जो परोपकारी नहीं होगा तो उसके सीने में दया नहीं होगा । और दया नहीं होगा तो ऐसा लोग कुछ भी ग़लत कर सकता है किसी के साथ । 

संस्कार सबसे पहले मां बाप , दादा दादी से परिवार में मिलता है । तो जो परिवार सामाजिक कामों में , गरीबों के लिए , समाज में धन दान नहीं किया, सेवा भाव नहीं उसमें  । सामान दान ( जैसे अन्न , धन आदि ) नहीं किया या किया तो बस नाम मात्र का औपचारिकता के लिए दिखाने के लिए केवल  । 
बस एक दो दस रूपया किसी भिखाड़ी  के कटोरे में कभी कभी डाल दिया । और मंदिर मंदिर , तिरथ विरथ, पुजा पाठ , कर्मकांड जैसे सत्यानारायण भगवान आदि का पुजा आदि  केवल करता है उनमें से सभी लोग आध्यात्मिक नहीं होता  , यानि परोपकारी नहीं होता ।

दरअसल  ऐसे लोग भगवान को , रिस्तों को , अपनी इच्छा पूर्ती का साधन समझते हैं केवल  , इसलिए कर्म कांड यानि सत्यनारायण का पुजा , हवन आदि करते रहते  है लोग अपनी इच्छा पूर्ति के लिए ।

 ऐसे लौंग जो self centred  होते हैं चाहे धन कितना भी हो , नौकड़ी कितनी भी अच्छी हो । बंगला कितना भी बड़ा हो , गाड़ी कितनी भी बड़ी हो , घर में सोफासेट हो , बढीया फरनिचर हो , झाड़फानुष हो , शरीर पर चमकता दमाकता लिवास हो , मंहगे जुते हो , हाई स्टेटस हो पर जरूरी नहीं कि ऐसे सभी परिवार में बढीया  माइंड सेट हो , चरित्र वरित्र बढीया हो , तो ऐसे घर में आप लड़की देंगे तो एक दिन आपके लड़की को तड़पाऐगे ही ।

तो जिसमें दैविक गुण नहीं है जैसे ईमानदारी , जीवों के लिए दया , प्रेम,  करूणा , त्याग , वलिदान , क्षमा , नैतिकता आदि  मानवता का गुण नहीं है तो वो मनुष्य के रूप में भेड़िया होता है । वो समाज , देश के ऊपर बोझ होता है । ऐसे लोग अयीयास होते हैं । 
तो  ऐसे लोगों के घर में अपनी वे
बेटी का व्याह कभी नहीं करना चाहिए । और बेटी वाले को भी चाहिए की वो अपने बेटी को अच्छा संस्कार दे और बेटी के व्याह के बाद उसको प्रत्येक दिन फ़ोन करके उसके किचन में क्या बन रहा है का खोज खबर ना ले । इससे बेटी का घर बसता नहीं तबाह होता है । अपनी बेटी को संस्कार का शिक्षा दे पहले ।
और अगर बेटा बाला संस्कारी हैं और परोपकारी है तो उसको अपने घर में बहु लाने से पहले वो भी यह चेक करें की जीस घर का वो बहु ला रहा है वो कितना परोपकारी है , कैसा संस्कार दिया है अपने बेटी को ? और दोनों लड़का पक्ष और लड़की पक्ष एक दुसरे के बारे में यह पता लगाएं की दोनों का परिवार परोपकार के लिए कितना काम किया है , कितना धन अपने उपर खर्च किया और अपने आमदनी का कितना प्रतिसत सही सही दान किया । अगर नहीं तो वो परोपकारी नहीं , नैतिक चरित्र का स्वामीं नहीं । दुसरे जीवों के लिए उसमें  दया का भाव , करूणा का भाव , प्रेम का भाव नहीं है ।

 तो ऐसे परिवार में शादी करने के बाद लोग पछताते हैं । और पछताऐगे हीं । 
आज कल लोग शादी तय करते हैं इस आधार पर कि लडका लडकी कितना पढ़ा लिखा है , कितना धन है , कितना बढ़िया नौकड़ी व्यापार है । कैसा बंगला मकान है , कैसा समाजिक स्टेटस है आदि ।
पढ़ाई लिखाई , बंगला गाड़ी , नौकर चाकर , स्टेटस यह कभी गारंटी नहीं देता की परिवार कितना  परोपकारी है । धन का लोलुप , मानवता के दुश्मन , धन के रेस का  स्वामी  जरूरी नहीं चरित्रबान हो । आजकल लोग शादी को ऊंचे घर , पावर , दौलत , पैरवी , ऊंचा स्थान , आदि के लोभ में करते हैं । स्टेटस सिंबल मानते हैं रिस्ते को जिस कारण लड़का लड़की के वैबाहिक जीवन के सफलता का ध्यान कहीं से नहीं रखा जाता । शादी विवाह आदी  में खुब खर्च , पैसों का दुरूप्योग स्टेटस सिंबल से जोड़ दिया जाता है । तो ऐसी घटना शादी के बाद घटना स्वाभाविक है कि संबंध में दरार पैदा हो जाए और दोनों घर तबाह हो जाए ।  
अत: दोनों परिवार परोपकारी है या नहीं , लड़का लड़की परोपकारी है या नहीं । अगर है तो लड़के के स्टुडेंट लाइफ में लड़का के पास कितना ऐसा सर्टिफिकेट्स है जो उसको सोसल वर्क , समाजिक काम में भाग लेने पर मिला है ? फिर जब से वो नौकड़ी या व्यापार कर रहा है तो उसने कितना दान पुण्य अपने कमाई से किया है ? चेक करें पहले । उसके मां बाप का भी समाजिक काम , परोपकार के काम को चेक करें । नहीं तो वो केवल मुख से अपना बड़ा बड़ा बड़ाई कर देगा पर अंदर कोई काम ऐसा नहीं किया है पता चलेगा बाद में । 

अत: यहां आध्यात्मिक परिवार से मतलव यह है कि उसमें त्याग , दान पुण्य , परोपकार , दया का काम कितना किया है । नहीं तो आपको बोल देगा की हम बहुत पुजा पाठ करते हैं , एक एक घंटा घंटी डोलाते है घर में , खुब धार्मिक यात्रा करते हैं । और समझ लेंगे वो आध्यात्मिक है फिर आप ठगा जाएंगे ।  कारण ऐसा लोग भगवान को , समाज को , देश को ,  रिस्तो को केवल अपने ईच्छा पूर्ति का साधन समझते हैं और किसी के जीवन का इस्तेमाल अपने हित के लिए करतें हैं , यही कारण है कि इन दैविक गुणों और कर्मो के अभाव में लोग लड़का लड़की का जीवन बर्बाद करने में भी नहीं चुकते । 
अत: जो वास्तविक परोपकारी होगा वो अनैतिक काम कभी नहीं करेगा । 
आज ऐसा अच्छा बहुत लोग हैं , बहुत परिवार अच्छा है नहीं तो धरती समाप्त हो गया होता । अभी साठ सत्तर  प्रतिशत से ऊपर अच्छे लोग हैं इसलिए समाज रहने लायक बचा है । पर हम खोजना नहीं चाहते , हम बाहरी चकाचौंध के तरफ,  स्टेटस के तरफ जाते हैं और परेशानी खुद मोल लेते हैं । 
- संजीव कुमार , रांची , मुजफ्फरपुर।।