Thursday, 10 December 2020

मानव के रोगी होने का महत्त्वपूर्ण कारण ।

मानव शरीर के सभी आर्गन ( आंतरिक अंगों का भी ) का संचालक मानव का मस्तिष्क है, मनुष्य के खुद का दुर्गुण - ईर्ष्या, द्वेष, घृणा , काम , क्रोध , जलन और नकारात्मक भाव आदि मानव मस्तिष्क में डूपामिन और सोरोटोनीन नामक अमृत समान रसायन के स्तर बहुत कम कर देता है जिस कारण मानव मस्तिष्क का संचालन क्षमता खराब हो जाता है, ऐसी परिस्थितियों में शरीर के सभी आंतरिक अंग एक ड्राइवर विहिन वाहन के समान हो जाता है और फिर मानव शरीर बहुत से रोगों का शिकार बन जाता है ।
ठीक वैसे हीं जैसे विना लुब्रीकेंट के या इसकी कमी हो जाने से मोटर गाड़ी का इंजन सीज हो जाता है ।

अतः हम किसी से राग , द्वेष , क्रोध आदि करते हैं तो दुसरे के नुकसान से कई गुणा ज्यादा नुकसान हमारा होता है । 

डुपामीन और सोरोटीनीन एक ऐसा अमृत रासायन है जिससे हमारा मस्तिष्क हमेशा संतुलित रहता है और संसार में अपने जीवन में हम बहुत सारे संसारिक बस्तुओं के अभाव के बाबजूद भी खुशी महसूस करते हैं । हम समाज में दुसरे से अच्छा ताल मेल बना पाते हैं ।

वर्णा इसके अभाव में आदमी डिप्रेशन , चिंता , का शिकार होकर आत्महत्या तक कर लेता है । 

अतः हमेशा योग ,ध्यान और साधना का सहारा लेकर हम अपने इन दोनों रसायनों के स्तर को ठीक ठीक बनाए रख कर निरोगी जीवन जी सकते हैं , और सफल हो सकते हैं ।
सुख अंदर की इन्ही रसायनों पर निर्भर करती है , वर्णा अरबों की प्रोपर्टी और सुख सुविधा के बाबजूद आदमी आत्महत्या तक कर लेता है ।  ।। :- संजीव कुमार , रांची ( लेख नंबर 181)।

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