यह धूम धड़क्का साथ लिए, क्यों फिरते हो तुम शहर-शहर,
एक तिनका साथ न जावेगा, बंद हुआ जब अन्न और जल,
घर-बार, अटारी, चौबारे, क्या खासा, तनसुख और मखमल,
क्या चिलमन-पर्दे, फर्श नए, क्या लाल पलंग व रंग महल,
सब शेखी, सब रिस्ते-विस्ते, सब रंजीशे गम व सपने-वपने,
सब यहीं पड़ा रह जावेगा, जब छोड चलेगा तन बन्जारा,
जब प्राण जावेगा निकल निकल ,
भज ले हरिनाम ऐ बंदे ,मत कर अब तू कोई फ़िकर-विकर।।
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