Wednesday, 9 December 2020

धर्म से क्या मिलता है ? धर्म क्या है ?

एक शक्स ने बड़े रूआब से मुझसे पुछा !
बता धर्म से क्या मिलेगा ?
मैंने कहा ' धर्म से सब कुछ मिलेगा !
उसने पुछा कैसे ?
मैंने पुछा पहले तु बता तुम धर्म को जानता भी है ?
उसने बड़े आत्मविश्वास से वोला हां , हिंदु , मुस्लिम , सिख , इसाई ।

मैनै कहा नहीं मेरे दोस्त मैं जिस धर्म को जानता हुं और मानता हुं , उससे सबकुछ मिलेगा , 
तेरे धर्म को मैं नहीं जानता , लेकिन मैं जिस धर्म को जानता हुं , वह हैं इंसानियत ,
धर्म वह है जिससे इंसानियत जिंदा रहता है , वांकी सब अधर्म हैं ।
धर्म के बल पर हीं  एक मजबुत एक मजलुमों को सहारा देता है ।
एक इंशान , एक प्यासे को पानी पिलाता है ।
एक मां बाप अपने बच्चे को सही शिक्षा देता है और ख्याल रखता है, सुसंस्कार देता है   ‌।
एक बच्चा अपने मां बाप और अपने से बड़े का कदर करता हैं , देख भाल करता है ।
एक शिष्य अपने इष्ट और गुरू के प्रति श्रद्धावान और समर्पित होता है । 
एक नागरिक अपने देश के लिए जान देता है ।
एक सैनिक बोर्डर पर शहिद होता है 
एक इंसान दुसरे इंसान का कदर करता है ।
धर्म दुसरे के लिए जीना सीखाता हैं ।
अधर्म खुद के लिए , दुसरे को लुटना सिखाता है ।
धर्म जोड़ना‌ सिखाता है , अधर्म तोड़ना सिखाता है । 

धर्म है तो परिवार है , धर्म है तो समाज हैं , धर्म है तो राष्ट्र है । धर्म है तो इंसानियत हैं । 
धर्म अपने इष्ट के चरणों में , गुरू के चरणों में समर्पण सिखलाता है । 

धर्म हीं  सत्य है । धर्म हीं जय है ‌, धर्म हीं विजय है । धर्म हीं जीवन है । धर्म हीं न्याय है । धर्म हीं देश की धड़कन हैं , धर्म हीं सांस हैं । धर्म हीं मानवता है। धर्म जिलाता है ।
अधर्म जलाता है ।

धर्म फुल है , अधर्म कांटा है ।
धर्म शुद्ध जल है , अधर्म जह़र है । 
धर्म गंगा यमुना सरस्वती है ।
अधर्म गंदी नाली है ।

और तुमने जिसको धर्म कहा वो तो संस्कृति हैं मेरे दोस्त । संस्कृति बदलती हैं , धर्म शाश्र्वत है । हमेशा था , है और रहेगा ।
जो धर्म को जीता है वो इंसान हैं ।
जो अधर्म को जीता है वो खुंखार है ।

मैकोले के स्कूल से डिग्री लेकर जी न्यूज पर "क्या कहता है इंडिया ' में डिवेट करने वाले और वाली सो कौल्ड विद्वान और विदुषी को मेरा पैगाम   ।

"मजहब नहीं सिखाता आपस में वैर रखना,
हिन्दी हैं हम वतन है,  हिन्दोस्तां हमारा "

No comments:

Post a Comment