क्रोधाद्भवति. सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति। । (गीता 2.63)
जब कोई क्रोध करता है तो क्रोध से व्यक्ति सम्मोहित हो जाता है और सम्मोहित होते हीं उसकी स्मृति चली जाती है तुरंत। वो स्मृतिविभ्रम का शिकार हो जाता है, मनुष्य भूल जाता है , क्या अच्छा है, क्या बुरा है, वह राक्षस बन जाता है व्यवहार से ।
राक्षस के तरह व्यवहार करने लग जाता है क्रोध के समय । उसकी बुद्धि का नाश हो जाता है। और बुद्धि नाश होते ही अनेकानेक पाप कर वैठता है।
अत: क्रोध सबसे खड़ाव बिमारी है। यह सबसे बड़ा शत्रु है मनुष्य के स्वयं का तथा इससे दुसरे को भी अनेक नुकसान होता है। क्रोध मे अनेकों पाप कर वैठता है मनुष्य।
क्रोधी अपने मन को और गंदा कर लेता है। पाप की तरफ धकेल देता है क्रोध । क्रोध खुद के विनाश का कारण तो बन ही जाता है , दुसरे को भी बहुत नुकसान पहूँचाता है। क्रोधी व्यक्ति भस्मासुर बन जाता है।
भगवान् तो इन्द्रियादि के द्वारा किए कर्मो को नहीं नोट नहीं करते, आपको कई बार बताया जा चुका है, वो मन मे उठे संकल्पो को अंदर वैठकर नोट करते जाते हैं।
क्योकि कोई भी कार्य करने से पहले मन में ही संकल्प उठते हैं। अब क्रोध मे व्यक्ति सोचता है उसको यह कर दुगां , तो वह कर दुंगा, तो उसका ये हो जाये, तो वो हो जाये आदि। सारे पाप भगवान् नोट करते जाते हैं जिससे मनुष्य के स्वयं का बड़ा नुकसान हो जाता है।
अहंकार बढता जाता है। क्रोध बढता जाता है, पाप होता जाता है। पुण्य का छय होता जाता है। और व्यक्ति अपने पतन का कारण बनता जाता है। पुण्य का छय और पाप की बढ़ोतरी। कष्ट ही कष्ट। जीवन नरक, फिर दोष भगवान् को नसीब को, भाग्य को, अरे तुम खुद को देखो, खुद को।
आपका क्रोध ही आपके हीं विनाश का कारण है। इसलिये आप सब हर समय यह महसुस करें की हम अकेले नहीं है, हम अकेले नहीं हैं वो अंदर वैठे है, वो अंदर वैठे है। वो सब देख सुन रहे हैं, नोट कर रहे हैं। गलत न सोचें किसी के विरुद्ध, अरे उनसे बच कर कहां जाऐगें आप , वो तो आपके ह्रदय में बैठे हैं , ठीक वही पर है जहां आप है । झुठ वोलते है , वो सब देख सुन रहे हैं, नोट हो रहा है । इसलिये क्रोध न करें कभी। क्रोध आये तो भगवान् को याद करें, गुरू को याद करें , क्रोध समाप्त हो जायेगा। प्रैक्टिस करें। देखो क्रोध से दुनिया में कोई काम आज तक नहीं बना किसी का। और न कभी बनेगा ,यह याद रहे हमेशा नंबर एक और नंबर दो भगवान हमारे अंदर बैठे हैं सब नोट कर रहें हैं , तो यह दोनों याद रखें हर क्षण तो कोई ग़लत काम आप नही करेंगें :- श्री महाराज जी ।।
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