कैसा तुम्हारा काम है
तुमको किताबों की खुशी
मेरे लिए गुरु का ज्ञान हैं ||
आशिक जला दे आग में
सारे किताबों का बरक़
एक नाम श्री कृष्ण का याद कर
यही गुरुवर का पैगाम हैं ||
मुझको तो मारा कुसंग ने
कहता था आ पढ़ किताब
घर मेरे उस महबूव की
हर वक्त ही दिदार है ||
क्युँ तेरा ( ज्ञानियों का) हम सजदा करें
ईश्क है जिसका इमाम्
दम भर भुलाना कृष्ण को
नही प्रेमियों का काम है ||
मुझको बता ऐ ज्ञानियों
कैसा तुम्हारा काम है?
:- गोपियों को उधो जब ज्ञान देने आए थे तो ऐसा ही गोपियों का भाव था |
:- संजीव
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