Saturday, 12 December 2020

कैसा तुम्हारा काम है!

मुझको बता ऐ ज्ञानियों 
कैसा तुम्हारा काम है
तुमको किताबों की खुशी 
मेरे लिए गुरु का ज्ञान हैं ||

आशिक जला दे आग में 
सारे किताबों का बरक़
एक नाम श्री कृष्ण का याद कर
यही गुरुवर का पैगाम हैं ||

मुझको तो मारा कुसंग ने 
कहता था आ पढ़ किताब 
घर मेरे उस महबूव की 
हर वक्त ही दिदार है ||

क्युँ तेरा ( ज्ञानियों का) हम सजदा करें 
ईश्क है जिसका इमाम् 
दम भर भुलाना कृष्ण को 
नही प्रेमियों का काम है ||

मुझको बता ऐ ज्ञानियों 
कैसा तुम्हारा काम है? 

:- गोपियों को उधो जब ज्ञान देने आए थे तो ऐसा ही गोपियों का भाव था | 
:- संजीव

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