पहले पुर्ण रूप से हरिगुरू पर श्रद्धा और विस्वास करो
फिर मेरा प्रचार करो ।
मैं और मेरा संत एक हैं, भक्त (संत) और भगवान एक हैं ।
मेरे निज-जनों का सम्मान करो , फिर मेरा प्रचार करो ।।
नवधा भक्ति भावयुक्त हो हर क्षण मेरा ध्यान करो,
छल कपट व्यवहार रहित हो मेरे संतों का गुणगान करो,
प्रत्येक जीव में, खड़ग खंभ में मेरा हीं तुम भान करो,
निष्कामभाव से गुरू की सेवा करके मुझको प्राप्त करो,
मैं जगत , जगत मुझमें हैं , ऐसा तुम विश्वास करो ,
कण कण में वास मेरा है इसका तुम एहसास करो ,
पुर्ण समर्पण भावयुक्त हो, फिर मेरा प्रचार करो ।।
योगक्षेम मैं वहन करूंगा, गुरू चरणों का ध्यान करो ,
श्रद्धा भक्ति भाव युक्त हो हरि गुरू का प्रचार करो ।।
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