Saturday, 3 July 2021

फिर हम पतितो का उद्धार कैसे हो ?

सफर कितना भी मुश्किल हो
प्यास और प्रयास सही हो तो राह,
"गुरूदेव" आसान कर देंगे,,
जो हमसे हो न पायेगा
उसे " गुरू भगवान " स्वयं कर देंगे !!!

भगवान तो केवल अधिकारी जीव को हीं पुछते है, बने बने को पुछते हैं । वांकी के लिए वो न्यायी बन जाते हैं । वो तो भक्त वत्सल हैं। और हम तो पतित है भक्त हैं हिं नहीं । उनके भक्त तो केवल सभी महापुरुष और उनके वास्तविक संत आदि हैं । वो पतितो के तरफ देखते भी नहींं ।

फिर हम पतितो का उद्धार कैसे हो ? 
फिर तो अनाधिकारी जीवों का कभी कल्याण हो हीं नहीं ।
पर एक रास्ता है -  
" भक्त वत्सल नाम सुनि तब हृदय कांपत मेरे श्याम,
पतित पावन नाम सुनि तब होत साहस बनहीं काम ।। (श्री महाराज जी )

तो वो स्वयं गुरू रूप धारण करके हम पतितो का उद्धार करने के लिए कभी कभी धरा धाम पर आतें है ।
 अब जो जीव एक बार गुरू वरण कर लेता है और गुरू का अनुगामी होकर भक्ति करता है उसके लिय सातों खुन माफ । अब वो उस गुरूवर्णेश्वर के लिए अपना जैसे का तैसा और भक्त वत्सल, दोनों स्वरूप भुल जाते हैं । उसके लिए वो पतित पावन स्वरूप हो जाते हैं और इस रूप मे हम पतित जीवों के अवगुणों के तरफ , दोषों के तरफ देखते भी नहीं । माफ कर देते हैं । और थोड़ा भी प्रेम भक्ति करने वाले को अपना लेतें हैं ।

गुरू तो है माता सम गोविंद राधे,
शिशु मन मल धोवे हरि गोद बैठा दे । :- श्री महराज जी ।।

अवगुण करूँ समुद्र सम , गिनत ना अपनों जान ।
राई के सम भजन को मानत मेरू समान ।।

ये तो हमारे कृपालु महाप्रभु की परम उदारता है । अवगुण धारण किए हुए हम दिन-रात अपराध कर रहें हैं, लेकिन समुद्र जैसे अवगुणों को मेरे गुरूवर देखते हीं नहीं हैं , क्यों - 

गिनत न अपनों जान ।

अरे यह मेरा है, कोई बात नहीं । 
और राई सम यानी थोड़ा सा भी हम भजन करतें हैं तो - 

मानत मेरू समान ।

विभोर हो जातें हैं । बड़े विभोड़ हो जाते हैं । अरे मेरा बच्चा कर तो रहा है न । चल रहा है, मेरी आज्ञा-पालन कर रहा है । काम-वाम सब हो जाएगा । 

इतने आशावादी हैं हमारे गुरूवर । तो सद्गुरू की कृपा से हीं यह उत्कट लालसा प्राप्त होती है ।:- पूजनीयां मां राजेश्वरी देवी जी 

🙏🌹जय श्रीमहाराज जी, जय श्री राधे,जय श्रीकृष्णा 🌹🙏

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