Thursday, 1 July 2021

महत्वपूर्ण तथ्य :- भगवद् मार्ग , प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग में कोई भी बाधा आए , डिगना नहीं चाहिए हमें , हिम्मत नहीं हारना चाहिए।

भगवद् मार्ग , प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग में कोई भी बाधा आए , डिगना नहीं चाहिए हमें , हिम्मत नहीं हारना चाहिए , जितनी बाधा आए उतना बल लगा कर अपने गुरू देव के बताए मार्ग का अनुशरण और अनुगमन करके और जोर से अपने भक्ति को बढ़ाना चाहिए ।
इतिहास गवाह है । जब जब कोई भाग्यशाली जीव भगवद् भक्ति , भगवद् प्रेम मार्ग पर चला है , अपने प्रीतम श्री कृष्ण के लिए तड़पा है तब तब कुछ काल के लिए उसकी परीक्षा हुई है ।  और जीत प्रेमी की हुई है । प्रेम मार्ग , भक्ति मार्ग को इसिलिए तलवार के धार पर चलने की उपमा दी गई है । 
जैसे संत ज्ञानेश्वर को जल नहीं पीने दिया कूऐं पर , कुएं पर जाना बंद करवा दिया । तालाव पर धक्का देकर निकालने वाले तो कुछ भटके हुए हिंदू हीं थे ।

सुरदास पर वेश्यागामी का आरोप मढ़ दिया गया उनके हीं समाज के दुष्ट लोगों ने ।

कबीरदास जी के घर में आग लगाने वाले कौन थे ?

तुलसीदास पर मारक मंत्र का इस्तेमाल करवाने वाले तथाकथित अहंकारी हिन्दु हीं तो थे ।

तूकाराम पर व्यभिचार का आरोप लगाने वाले उनके हीं समाज के कलुषित अज्ञानी हिंदु हीं तो थे ।

मीरा को बिष पिलाने वाला हिंदु हीं तो था । अरे दुर का भी नहीं अपने ससुराल वाले हीं थे ।
चैतन्य महाप्रभु को नदियां में नहीं रहने दिया , परेशान किया और पंडालोग पुरी में अपमान किया । 

पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ साजिश करके अपमान करने बाले भी भटके हुए मुसलमान  हीं तो थे ।

जीसस को सूली पर चढ़ाने वाले इसाई हीं तो थे ।

नानक को अपमान करने वाले कुछ भटके हुए सिख हीं तो थे । हजारों उदाहरण हैं ।
जब भगवान और महापुरूषों को नहीं छोड़ा अश्रद्धावान लोगों ने तो हमलोग तो वास्तव में पतित हैं ।

इसलिए भक्ति मार्गी को , भगवद् प्रेम मार्गी को किसी का परवाह नहीं करना चाहिए कभी ।
एवं विरोधी के खिलाफ बुरा भी नहीं सोचना चाहिए , बिना किसी को अपशब्द कहे उल्टा उसके कल्याण के लिय सोंच कर आगे बढ़ना चाहिए ।
यह सब कठीन परीक्षा होती है भक्तों का भगवान के द्वारा , गुरू के द्वारा । कोई बाधा आए , कोई विरोध करें तो खुश होना चाहिए कि हमारा परीक्षा अपने हरिगुरू के द्वारा शुरू हो गया है । 
विरोधी तो निमित्त मात्र है यह सोंच कर और खुश होकर विरोध करने वाले को , कौमेंट करने वाले को धन्यवाद देना चाहिए दिल से और अपने भक्ति को , प्रेम को परीपक्क करना चाहिए ।
मैने जो यह सुनाया आप सबको वो मेरी पुज्यनियां मां रासेश्वरी देवी जी का मुझे समझाया गया निर्देश है ।
श्री राधे ।

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