Friday, 6 August 2021

EQ development

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️आज लोग आइ ए एस , आईपीएस आदि बन जाते हैं पर प्रोफेशनल या समाजिक जीव में  सफल केवल वही होते हैं जिनका EQ   का सही सही विकास हुआ है । 
नहीं तो आपने बहुत से उदाहरण जानते हैं । कुछ दिन पहले बक्सर का DM क्यों आत्म हत्या कर लिया ? पोस्ट , पोजीशन प्राप्त करना सफलता नहीं है जब तक उससे संबंधित जिम्मेदारी और परिवारिक समाजिक जीवन सफल नहीं हो । 

हमारे बच्चे अपने जीवन में कैसे सफल हो सकते हैं ?
पढीय :- 

IQ = विवेक ,EQ= मानविय भावना , संवेदना ,K = ज्ञान 
PK = व्यवहारिक ज्ञान ,TK = टेक्निकल ज्ञान 
इंटेलीजंस क्वोशन्ट ( IQ) और इमोशनल क्वोशन्ट( EQ)
 दोनो में अंतर को समझने से पहले हमें समझना होगा कि दोनों आखिर हैं क्या? 
इंटेलीजंस क्वोशेन्ट यानी विवेक :- हमारे जानने-समझने-बुझने और जानकारी को सही जगह अप्लाई करने की समझ होती है। ये व्यक्ति की दिमागी क्षमता को दर्शाता है। 

जबकी इमोशनल क्वोशन्ट ( EQ) व्यक्ति की खुद की और दूसरों की भावनाओं को मापने की एक क्रिया है। वे कितने भावुक हैं और दूसरों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं। समाज में , ग्रुप में , परिवार में , प्रोफेशन में व्यक्ति का व्यवहार कैसा है । व्यक्ति अपने व्यवहार को कैसे मैनेज करता है । 

EQ और IQ एक व्यक्ति की मानसिक योग्यता को जानने का तरीका है। 
जबसे हम पैदा होते हैं तभी से हम एक रेस का हिस्सा बन जाते हैं। फिर जब बड़े होते हैं तो वह चीज़ हमारे लिए कॉम्पिटिशन बन जाती है , जिसका सामना हमें हर क्षेत्र में करना पड़ता है। फिर चाहे प्रोफेशनल लाइफ हो, सोशल लाइफ हो या पर्सनल लाइफ। 

पुराने ज़माने से बुद्धिमत्ता  यानी इंटेलीजेंस को ही सफलता की कसौटी माना है। ऐसा माना जाता है की व्यक्ति का इंटेलीजेंस क्वोशन्ट और उसकी सफलता का आपस में कुछ संबंध है, यानी अगर इंटेलीजेंस क्वोशन्ट अधिक हैं तो आदमी के सफल होने के चांस ज्यादा हैं। 

इंटेलीजेंस क्वोशन्ट और इमोशनल क्वोशन्ट का अंतर यहीं से शुरू होता है। इंटेलीजेंस क्वोशन्ट आपको सिर्फ परीक्षा में अच्छे अंक दिलाता है लेकिन इमोशनल क्वोशन्ट आपको जीवन की परीक्षा में सफलता दिलाता है। जिनका इमोशनल क्वोशन्ट ज्यादा होता है वे बदलते पर्यावरण के साथ जल्दी एडजस्ट हो जाते हैं और इसलिए उनके जीने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। चार्ल्स डार्विन ने भी सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट का सिद्धांत इसी के आधार पर दिया था। 

इमोशनली इंटेलीजेंट लोग सिर्फ फैक्ट्स नहीं देखते बल्कि उसके साथ इमोशंस से भी काम लेते हैं। उन्हें यह पता होता है कि हर कोई अलग है इसलिए उस अंतर को ध्यान में रखते हुए वे सबसे एक सा व्यवहार नहीं करते। वे अपने इमोशंस के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं की भी कद्र करते हैं। ऐसे लोग कम्युनिकेशन में अच्छे होते हैं और अच्छे मैनेजर होते हैं। 

इंटेलीजेंस क्वोशन्ट और इमोशनल क्वोशन्ट के बारे में सबसे पहले गोलमेन ने बताया था। उनका कहना था कि जीवन में 20 प्रतिशत सफलता इंटेलीजेंस क्वोशन्ट से मिलती है जबकि 80 प्रतिशत सफलता और इमोशनल क्वोशन्ट के कारण मिलती है। जिन व्यक्तियों का इमोशनल क्वोशन्ट कम होता है उनका जीवन अपनी परेशानियों को गिनने में ही कट जाता है। जीवन के प्रति आपका दृष्टिकोण ही आपको सफल बनाता। 

जिन बच्चों की इमोशनल स्किल्स विकसित नहीं हो पाती हैं वे जल्द ही बुरी संगत और बुरी गतिविधियों में पड़ जाते हैं। इमोशनल क्वोशन्ट की कमी एकाग्रता भंग करती है और फिर फ्रस्ट्रेशन होता है जिससे उनका मन ना पढ़ाई में लगता है ना कहीं और। एक बच्चे में शुरू से ही इमोशनल स्किल्स विकसित की जा सकती है। इसके लिए पूरे परिवार को एफर्ट लगाने होंगे। 

बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जिनको आपने स्कूल-कॉलेज में हमेशा बहुत अच्छे अंक प्राप्त करते देखा होगा लेकिन अगर उनके दोस्तों की गिनती कर के देखें तो संख्या बहुत ही कम मिलेगी। वे जीवन में एकेले ही रह जाते हैं और किसी भी रिलेशन को निभा नहीं पाते हैं क्योंकि वे इतना अकेला रह चुके होते हैं कि या तो उन्हे किसी के आने-जाने से फर्क नही पड़ता या फिर किसी के आ जाने से वे बहुत असहज हो जाते हैं। 

आज की पीढ़ी के लिए ज़रूरी है कि सभी शैक्षिक संस्थानों में आई.क्यु और इ.क्यु के कुछ बेसिक लेसंस होना चाहिए और इस मॉड्यूल को सिलेबस में शामिल करना चाहिए क्योंकि स्कूल-कॉलेजों का ज़िम्मा केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, उन्हे समझदार बनाना भी उन्ही का कर्तव्य है। इस मॉड्यूल में ये बातें शामिल करनी होगी- 

कॉंफिडेंस डेवलपमेंट- बच्चों को आत्मविश्वास और अहंकार के बीच का अंतर समझाना जरूरी है। उनके मन से डर और संकोच दूर करना उनके व्यक्तिगत विकास में बहुत मदद करेगा। 

क्रिएटिविटी बच्चों के विचारों को आज़ादी से व्यक्त करने की अनुमति हो। इससे एक व्यक्ति के रूप में उनका नेतृत्व करने का गुण डेवलप होगा। उन्हें सिखाने की ऐसी टेक्निक हो जिसे सीखने के साथ मज़ा भी आए। 

टीम बिल्डिंग- बच्चों को बचपन से टीम में काम करना सिखाएं। इससे उनमें रिश्तों को लेकर सकारात्मकता आएगी। वे जब प्रोफेश्नली काम करेंगे तो टीम स्पिरिट के साथ करेंगे। इसी के साथ उन्हे सामाजिक मुद्दों के बारे में बताएं और जागरूक बनने के लिए प्रोत्साहित करें। मधुर संबंध एक सुखी जीवन का सार है इसलिए अपने भीतर इंटेलीजेंस क्वोशन्ट की अपेक्षा इमोशनल क्वोशन्ट ज्यादा डेवलप करें।

इसी प्रकार अगर हम EQ में दक्ष हैं तो अपने प्रोफेशन में टीम को भी और्गनाइज्ड करतें हैं , मैनेज करतें हैं , एक अच्छे और्गरनाईजेशन में जहां ओपेन प्लेटफार्म हों , हमारे स्किल की प्रोपर यूटिलाइजेशन की छुट हो , मैनेजमेंट ओपेन हो , रूढ़िवादी ना हो , कन्टीन्यूअस ईम्प्रूभमेंट के लिए तैयार हो तो हम E Q का इस्तेमाल करके  वेहतर प्लानिंग , और्गनाईजिंग , स्टाफिंग, कंट्रोलिंग ,सबौर्डिनेटिंग , डाईरेक्टिंग , मोटीभेटींग,  ट्रेनिंग एण्ड डेवेलपमेन्ट ,  एलोकेटिंग औफ जौब, मैपिंग औफ परफौरमेंश , रिएलोकेशन औफ टास्क के द्वारा अच्छा कर सकतें हैं ।।

EQ यानी Emotional quotient हमारी  feelings से जुड़ा है। इसकी मदद से हम  खुद अपने emotions और दूसरों के emotions को समझते हैं और उन्हें manage करते हैं। EQ आपस में अच्छे रिश्ते बनाने और  सही वक्तपर सही तरीके से react करने जैसे कामों में हमारी मदद करता है। अगर हम  अपने दोस्त या भाई-बहन की बहुत care  करते हैं, उनके साथ चीजें share करते हैं, खाने पीने की चीजें उनके लिए बचाकर रखते हैं, किसी अनजान को भी चोट लगे तो उसे देखकर हमें तकलीफ होती है तो इसका मतलब है  हमारा EQ काफी अच्छा है। जो इंसान  बहुत बड़ी कामयाबी हासिल करता  हैं, उसमें EQ काफी बड़ा role play करता है । हमारा कोई भी  फैसला IQ के लेवल पर सही साबित हो सकता है , लेकिन यह जरूरी नहीं है की वही फैसला EQ के level पर भी सहीं हो । IQ हमें सिर्फ academics  में अच्छे marks दिलवा सकता  है पर EQ हमें  अपने ज़िंदगी की परीक्षा  में अच्छे marks दिलवाता है. Emotional intelligence का concept सबसे पहले 1995 मे goleman ने दियाँ। उनके अनुसार ज़िंदगी में 20% success IQ के कारण मिलती है जबकि 80% success  Emotional Intelligence के कारण मिलती है। जहां IQ हमारे जानने समझने और जानकारी को सही जगह apply करने की एक सही समझ होती है वहीं Emotional Quotient इंसान की खुद की और दूसरों की भावनाओ(feelings and emotions) को समझने और manage करने की एक कला है। जिनका Emotional Quotient ज्यादा होता है वह लोग बदलते Environment के साथ easily adjust हो जाते है।

EMOTIONAL QUOTIENT (EQ) की TESTING – जानिए अपना EQ
EQ बढ़ाने के तरीके

अपनी feelings and emotions में झाँकिए। देखिये कि आपकी feelings और behavior कैसे एक दूसरे से connect हैं। जब आपकी emotions ज़ोर मारती हैं, तब आपका reaction क्या होता है।

Emotional Quotient का मतलब सिर्फ दूसरों की तकलीफ़ों को समझना नहीं है। बल्कि उनके  दर्द और तकलीफ़ों को महसूस करना भी है। Negative Emotions को कम करना, stress नहीं लेना, मुश्किल फैसले लेना, बुरे वक्त से लड़कर बाहर निकलना और  Reactive के बजाय pro-active बनकर Emotional intelligence को बेहतर किया जा सकता है।
दोस्तो आपने IQ word तो सुना ही होगा। साथ यह भी सुना होगा की दुनिया मे सबसे ज्यादा IQ  अल्बर्ट आइंस्टाइन और स्टीफन हॉकिंग का है। इन दोनों वैज्ञानिको का IQ 160 है। लेकिन 160 IQ का क्या मतलब है? आपका iq कितना है? इसके क्या फायदे नुकसान है? हम अपना iq कैसे बड़ा सकते है? इस article को पड़ने के बाद आपको इन सभी सवालो का जवाब मिल जाएगा।  

क्या है IQ

“IQ” word जर्मन शब्द Intelligenz-Quotient से निकला है जिसका पहली बार use जर्मन psychologist  विलियम स्टर्न ने 1912 मे किया। IQ यानी intelligent quotient आपके सोचने-समझने और knowledge हासिल करने से जुड़ा है। हम दिमागी तौर पर किसी काम को कितने बेहतर तरीके से कर सकते हैं, यह हमारा  EQ तय करता है। कोई इंसान किसी सवाल या problem को  चुटकियों में solve कर  लेता है तो कोई इंसान लंबे समय के बाद भी असफल रह जाता है। अगर आप किसी सवाल को solve करने, नए idea देने या कुछ भी नया सीखने में अपने दोस्तों से आगे रहते हैं, उनसे कम पढ़ाई करके भी  ज्यादा marks लाते हैं तो possible है कि आपका iq उनसे ज्यादा  हो। आमतौर पर यह पैदाइशी होता है । आपकी job performance, leadership capability, फैसले लेने की क्षमता जैसी चीजों पर भी इसका असर होता है। वैसे,इसमे तो कोई शक नहीं है की  life में अकेले iq के दम पर कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती। कड़ी मेहनत और प्रयास की बिना कुछ भी पाना संभव नहीं है। , 

( ब्लौग नंबर 58, date :- 28 / July 2011 ,  संजीव कुमार ) 

IQ की गणना

इसकी गणना किसी व्यक्ति की मानसिक उम्र (mental age) में real age(chronological or biological age) से भाग देकर उसे 100 से multiply कर के निकाला जाता है।

intelligent quotient = mental age ÷ Physical age × 100

For example; अगर आपकी age (physical age) 20 साल की है और आपकी mental age 25 साल है तो आपका iq होगा

intelligent quotient = 25 ÷ 20 × 100 = 125

Mental age निकालने के लिए कई तरह के psychologist test का इस्तेमाल किया जाता है।

IQ SCORES के मतलब

iq Range – iq Classification

145–160 – Very gifted or highly advanced

130–144 – Gifted or very advanced

120–129 – Superior

110–119 – High average

90–109 – Average

80–89 – Low average

70–79 – Borderlines impaired

:- संजीव कुमार

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