उत्तर :- शारीरिक मां बाप को केवल शरीर का जन्म दाता मानो वो भी भगवान के कृपा से हमको और तुमको मानव शरीर मिला और उन्हीं के कृपा से हमारे माता पिता को भी मानव शरीर मिला है जिस कारण उनके गर्भ में हमको भगवान द्वारा मानव शरीर देकर भेजा गया , इसमें हमारे मां बाप का कोई कमाल नहीं है । इसिलिए शारीरिक माता पिता भगवान कि कृपा से शरीर को जन्म देने का एक माध्यम भर है वो हमारे आत्मा का पिता माता नहीं हैं ।
शारीरिक माता पिता को भगवान बोल कर हम तुम अपने आत्मा के माता पिता तथा अपने शारीरिक माता पिता के भी आत्मा के माता पिता का अपमान मत करो ।
सभी जीवों के माता पिता परम पिता है , उनका अपमान मत करो ।
अपने शारीरिक माता पिता का सम्मान करो , उनके प्रति अपना फर्ज पुरा जरूर करो। लेकिन उन्हें भगवान मत मानो ।
क्या तुम्हारे माता पिता को मालुम था तुम्हारे जन्म से पहले कि तुम उसका पुत्र या पुत्री बनने बाले हो , क्या जन्म से पहले वो तुमको जानते भी थे ? उनके कोख में भगवान ने तुम्हें बनाया है तुम्हारे मां बाप तो तुमको जन्म के बाद जाना समझा है ।
जब वो जाना तक नहीं तो किसी भी अल्पज्ञ को भगवान बोल कर सर्वज्ञ , सर्वांतर्यामी, भगवान का अपमान मत करो । नहीं तो रो रो नरक भोगना होगा अगले जन्मों में ।
हमारे तुम्हारे अनंत जन्म हो चुके हैं , हर जन्म में अलग अलग प्रकार का शरीर मिला अपने कर्म के अनुसार और न जाने कितने को मां बाप , बेटा बेटी बहन भाई बनाया होगा हमने ।
अत: भगवान श्री कृष्ण को ही अपना माता पिता मानो और उनकी भक्ति करो ।
शारीरिक माता पिता को भगवान मानने , मदिरा पान करने , मांस मछली भक्षण करने , विष्णु भगवान को भगवान न मानने , मौज मस्ती करने, लुट मार करने , अपहरण करने , दुसरों का धन छिनने तथा अधर्म पर पर चलने आदि की शिक्षा आसुरी शिक्षा है । असुर गुरू शुक्राचार्य ने ही यह आसुरी शिक्षा असुर बच्चों को दिया था ताकि वो देवताओं से , भगवान से युद्ध करें , और देवताओं के लोक पर कब्जा करके अपने आसुरी सत्ता को कायम रखें ।
हिरण्यकश्यप जैसे असुर ने प्रह्लाद को कहा कि मैं ही तुम्हारा भगवान हूं क्योंकि माता पिता भगवान होते हैं इसलिए तुम हमको भगवान मानो । लेकिन प्रह्लाद ने नहीं माना । हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को सताया तो भगवान नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का बध कर दिए ।
आज कल बहुत से लोग आसुरी शिक्षा का ही प्रसार करते हैं इसलिए लोग ऐसा भ्रामक बात मानते हैं , ऐसे लोगों के दुर रहना चाहिए।
ध्यान रहे कहीं इसी भ्रम में न रहना तुम भी , तुम भी तो किसी का माता पिता हो इसलिए खुद को भगवान न समझ लेना गलती से ।
ये शरीर के माता पिता को भगवान बोल कर अपने चिर सनातन माता पिता श्री राधा कृष्ण का अपमान मत करो । नहीं तो अगले जन्म से घोर नरक में परे रहोगे ।
न मानव शरीर मिलेगा और न किसी को मां बाप बनाने लायक रहोगे और न बोलने लायक । अगर यह समझ में न आवे तो करो जो मन में आए वो ।
लेकिन कर्म फल का भोग तो सबको भोगना ही होगा ।
गुरू कृपा से प्राप्त ज्ञान के आधार पर :- संजीव कुमार
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