मानव शरीर पाकर भी 99% में से अनेकों भाग्यशाली जीव किसी के द्वारा समझाने के बाबजूद भी इन पुस्तकों का अवलंब नहीं ले पाते हैं क्योंकि उनकी प्रवृत्ति केवल संसारिक बिषय भोग के तरफ हीं है ।
साथ ही साथ कुछ हमारे सनातन धर्म परंपराओं के पवित्र शास्त्रों का नाम जो भारत को विश्व गुरू का गौरव प्रदान किया जो आजकल कुछ अति कुतर्की, कुबुद्धि, अधर्मी, लोभी , स्वार्थी, भ्रांत ज्ञानी , प्रमादी , कर्णपाटव से ग्रसित तथा भ्रमित चंद लोगो के कारण कलयुग में धुमिल हुआ है जिसे फिर से श्री कृपालु जी महाप्रभु द्वारा आसान बना कर सरल भाषा में समन्वय करके पुनर्जीवित किया गया है । जिस बल से हमारा भारत एक बार फिर से अपने खोय हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है ।
हमारे हिन्दू संस्कृति का स्थान दुनिया में सबसे ऊंचा था , कारण हमारे पुर्वजों ने पुरे दुनिया को उच्च कोटी के आदर्शों के साथ तमीज और तहजीब से रहना और जीना सिखाया , भारत विश्वगुरू था , ज्ञान में अव्वल , विज्ञान में अव्वल , आध्यात्म में अव्वल , संस्कार और संस्करण में अव्वल , चरित्र और नैतिकता में अव्वल , मानवता में अव्वल , भक्ति में अव्वल , क्षमा ,त्याग , दया , करूणा और दानादि दैविक गुणों में अव्वल । पर कालक्रम में आताताईयों ने इनसबको खत्म कर अपना झूठा इतिहास सामने रख दिया और इन सबको लुप्त कर दिया ।
लेकिन भारत विश्व का गुरू था , है और रहेगा हमेशा क्योंकि यह सौभाग्य भगवद् कृत है, मानव कृत नहीं जो इसे मिटा सके कोई ।
भारत के बिना विश्व शांति कि परिकल्पना हीं व्यर्थ है । जैसा कि नाम के उद्बोधन से स्पष्ट है ।
'भा' का मतलव ज्ञान और 'रत' का मतलव रचित , बसित खोजित , प्रकटित तथा कण कण में व्याप्त।
अत: भारत के कण कण में दिव्य ऋषि मुनि महापुरूषों , संतो के चरण रज के साथ साथ उनका दिया ज्ञान भी व्याप्त है । जिस कारण यह भारत भूमि परम पवित्र और दिव्य है । लेकिन इसका अनुभव , महत्व और आभास केवल उनके लिए है जो मानव है, मनुष्य है । जो मानव के भेष में असुर है , राक्षस है, उनको न तो इसका अनुभव हो सकता है और न कभी वो अपने कल्याण के प्रति जागरूक हो सकते हैं ।
ऐसे जीव कुतर्क , विचित्र तर्क , अति तर्क में ही अपने दुर्लभ मानव यौनि के जीवन को गवां कर फिर से तिर्यक यौनियों के तरफ बढ़ने के तरफ अपने ही हाथों बाध्य है ।
इसलिए मैं सबसे अपील करता हुं कि अगर आप अपना मानव जीवन सफल बनाना चाहते हैं तो श्री कृपालु जी महाराज जी का पुस्तक पढ़िए । उनकी पुस्तकें सभी ग्रंथों का सार है , जो कठिन से कठिन ग्रंथों को आसान भाषा में समझाने में सक्षम है ।
आज सौभाग्य से हमारे पास निम्नलिखित सभी भारतीय शास्त्रों का सार हमारे श्री कृपालु महाप्रभु जी द्वारा रचित इन उच्चतम कोटी के शास्त्र के रूप में उपलब्ध है जैसे :-
1. प्रेम रस सिद्धांत
2. मैं कौन मेरा कौन
3. नारद भक्ति दर्शन
4. दिव्य स्वार्थ
5. रास पंचाध्यायी
6. कामना और उपासना
7.जीव का लक्ष्य
8.गुरूकृपा
9.रूपद्यान
10.प्रेम रस मदिरा
11.भक्ति शतक
12.गुरू तत्त्व
13.युगल शतक
14. राधा गोविंद गीत
15.गुरू भक्ति
16.गुरू कृपा
17.प्राणधन जीवन कुंज बिहारी
18.गुरु गोविंद आदि
ध्यान रखिए ये श्री महाराज जी के शास्त्र भगवान की आप्त वाणी हीं है ।क्योंकि श्री महाराज जी स्वयं राधाकृष्ण के युगल अवतार हैं । इनके पुस्तक निम्नलिखित पुस्तकों का आसान भाषा में सार है ।
1-अष्टाध्यायी पाणिनी
2-रामायण वाल्मीकि
3-महाभारत वेदव्यास
4-अर्थशास्त्र चाणक्य
5-महाभाष्य पतंजलि
6-सत्सहसारिका सूत्र नागार्जुन
7-बुद्धचरित अश्वघोष
8-सौंदरानन्द अश्वघोष
9-महाविभाषाशास्त्र वसुमित्र
10- स्वप्नवासवदत्ता भास
11-कामसूत्र वात्स्यायन
12-कुमारसंभवम् कालिदास
13-अभिज्ञानशकुंतलम् कालिदास
14-विक्रमोउर्वशियां कालिदास
15-मेघदूत कालिदास
16-रघुवंशम् कालिदास
17-मालविकाग्निमित्रम् कालिदास
18-नाट्यशास्त्र भरतमुनि
19-देवीचंद्रगुप्तम विशाखदत्त
20-मृच्छकटिकम् शूद्रक
21-सूर्य सिद्धान्त आर्यभट्ट
22-वृहतसिंता बरामिहिर
23-पंचतंत्र। विष्णु शर्मा
24-कथासरित्सागर सोमदेव
25-अभिधम्मकोश वसुबन्धु
26-मुद्राराक्षस विशाखदत्त
27-रावणवध। भटिट
28-किरातार्जुनीयम् भारवि
29-दशकुमारचरितम् दंडी
30-हर्षचरित वाणभट्ट
31-कादंबरी वाणभट्ट
32-वासवदत्ता सुबंधु
33-नागानंद हर्षवधन
34-रत्नावली हर्षवर्धन
35-प्रियदर्शिका हर्षवर्धन
36-मालतीमाधव भवभूति
37-पृथ्वीराज विजय जयानक
38-कर्पूरमंजरी राजशेखर
39-काव्यमीमांसा राजशेखर
40-नवसहसांक चरित पदम् गुप्त
41-शब्दानुशासन राजभोज
42-वृहतकथामंजरी क्षेमेन्द्र
43-नैषधचरितम श्रीहर्ष
44-विक्रमांकदेवचरित बिल्हण
45-कुमारपालचरित हेमचन्द्र
46-गीतगोविन्द जयदेव
47-पृथ्वीराजरासो चंदरवरदाई
48-राजतरंगिणी कल्हण
49-रासमाला सोमेश्वर
50-शिशुपाल वध माघ
51-गौडवाहो वाकपति
52-रामचरित सन्धयाकरनंदी
53-द्वयाश्रय काव्य हेमचन्द्र
54- विनय पत्रिका। तुलसीदास
55- रामचरितमानस। तुलसीदास
आज हमको जो इतिहास पढ़ाया जाता है वो फरेव हीं फरेव है । उसमें मुगलों और विदेशियों का और देश के कुछ गद्दारों का महिमा मंडन है जिसको पढ़के आज की पीढ़ी भ्रम विप्रलिप्सा , कर्णपाटव और प्रमाद का शिकार हो गए हैं और हो रहे हैं । मैं आज अपने देश के सभी हिन्दु युवाओं को आवाहन करना चाहता हुं कि स्कूली शिक्षा के अलावा श्री कृपालु जी महाराज जी के पुस्तकों कि सहायता से तत्वज्ञान का अध्ययन करें तो अपने दिव्य विरासत को समझ पायेंगे और चरित्र ऊंचा होगा नहीं तो पतन तो निश्चित है हीं ।
:- संजीव कुमार, रांची ।
No comments:
Post a Comment