Thursday, 10 October 2024

श्री कृपालुजी महारप्रभु के अनुयायी भगवान श्री राधाकृष्ण के अनन्य भक्त ।

पुर्व जन्मों का पुण्य पुंज तथा उस पर भगवद् कृपा से जबतक किसी भी जीव के कुसंस्कारों का नाश नहीं होगा तथा उनके चित्त में सर्वश्रेष्ठ संस्कारों का उदय नहीं होगा तबतक वो जीव श्रीमद्पदव्याक्य, प्रमाणपारावरीण, वेदमार्ग-प्रतिष्ठापन, निखिलदर्शन समन्वयाचार्य, सनातन वैदिक धर्म प्रतिष्ठापन सत्संप्रदाय परमाचार्य, भक्तियोग रसावतार, भगवदनन्त श्री विभूषित पंचम मूल जगद्गुरूतमई १००८ स्वामी श्री कृपालु जी महाराज द्वारा दिए गए वैदिक दर्शन, तत्वज्ञान , विशुद्ध एवं श्री राधाकृष्ण की निष्काम भक्तिरस एवं भक्ति सिद्धांतों में रूचि नहीं रख सकता, चाहे वो आज कलयुग में किसी भी धर्म , किसी भी संप्रदाय , किसी भी मत , किसी भी मार्ग के बड़े से बड़े धर्मपीठ पर बैठे बड़े बड़े धर्माधिकारियों , कर्मकांडी पंडितों तथा दुनियां में महान कहलाने वाला जीव या ज्ञानी ध्यानी विज्ञानी आदि ही क्यों न हो । इन बड़े बड़े पंडितो तथा ज्ञानियो से वो चंडाल श्रेष्ठ तथा बंदनिए है जो श्री राधाकृष्ण की अनन्य तथा निष्काम भक्ति करते हैं , उनमें रूचि रखते हैं, उनसे प्रेम करते हैं । 

परम दिव्य तत्व , अवतारी महापुरूषों में सर्वश्रेष्ठ श्री कृपालु जी महाप्रभु द्वारा श्री राधाकृष्ण की निष्काम भक्ति में रूचि इस युग में केवल उन्हीं सौभाग्यशाली जीवों को है जो अपने पुर्व जन्मों में परम तत्व श्री राधाकृष्ण की भक्ति की है तथा भगवान श्री कृष्ण के परमगुप्त,अद्वितीय,अनुपम , अलौकिक अति दुर्लभ प्रेम रस को प्राप्त करने के लिए लालायित हुए थे और हैं । 

श्री राधाकृष्ण के अनुपम , अपरिमेय , अद्भुत, अतुलनीय, अलौकिक, दुर्लभ भक्तिरस के प्रति आकर्षित जीव ही केवल श्री कृपालु जी महाप्रभु को अपना गुरू मानते हैं और आने वाले समय में मानेंगे भी तथा उनके प्रति अनन्य, दृढ़ श्रद्धावान, आस्थावान तथा संकल्पित है तथा होंगे । 

श्री कृपालु जी महाप्रभु जैसे महानतम अवतारी संत के प्रति जिज्ञासु, पिपासु श्रद्धावान, निष्ठावान, अनन्य तथा समर्पित जीवों के सौभाग्य की सराहना करना स्वर्ग के देवी देवताओं तथा सरस्वती एवं बृहस्पति के लिए भी कठीन है ।

अति धन्य हैं वो जीव जो श्री महाराज जी का अनन्य अनुगामी होकर श्री राधाकृष्ण की निष्काम भक्ति करते हैं । 

 मैं संजीव कुमार एक क्षूद्र सा अधम एवं पतित जीव , हमारे गुरूदेव श्री कृपालु जी महाराज के सभी अनुयायियों एवं निष्काम सेवकों के श्री चरणों में मन ही मन नित्य प्रति अपना मस्तक नवाकर स्वयं को धन्य समझता हूं । जय जय श्री राधे , जय जय श्री कृपालु महाप्रभु की जय जय जय, जय जय श्री महाराज जी के साधक समुदाय की जय ।। :- संजीव कुमार ।

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