बेखुदी तुमने मुझको, सताया बहुत
बाखुदा इश्क में हम, तड़पने लगे
तुमने कांटों से दामन, भरा था मेरा
फुल बन के तुम्हीं को, लुभाने लगे
बेखुदी तुमने मुझको सताया बहुत
बाखुदा इश्क में हम, तड़पने लगे
इश्क में तुमने मुझको, रूलाया मगर
आंसु बनकर तुम्हीं से, इश्क करने लगे
बेखुदी तुमने मुझको सताया बहुत
बाखुदा इश्क में हम, तड़पने लगे
ये सच है कि मैं, तेरे काबिल नहीं
काबिलों को भी तुमने, रूलाया बहुत
बेखुदी तुमने मुझको सताया बहुत
बाखुदा इश्क में हम, तड़पने लगे
तुमने लुटे हो मस्ती, कई दिल का
लुटो मस्ती मेरा भी तो, जाने तुझे
बेखुदी तुमने मुझको सताया बहुत
बाखुदा इश्क में हम, तड़पने लगे
:- संजीव ।
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