Wednesday, 6 March 2024

भगवान ने मनुष्य को संकल्प करने कि शक्ति एवं स्वतंत्रता दी है , फिर संकल्पित कर्म‌ करने कि भी स्वतंत्रता दी है लेकिन फल देने का काम अपने पास रखा है ।

कुछ लोग बराबर बोलते रहते हैं कि आप लोग गलत आचरण वाले को क्यों नहीं रोकते ,भगवान के फोटो से सजे स्टेज पर जूता पहन के डांस करने वाले को क्यों नहीं रोकते ? इसको क्यों नहीं रोकते , उसको क्यों नही टोकते ? उसका जबाब :- 
भगवान ने मनुष्य को संकल्प करने कि शक्ति एवं स्वतंत्रता दी है , फिर संकल्पित कर्म‌ करने कि भी स्वतंत्रता दी है लेकिन फल देने का काम अपने पास रखा है । 

इसलिए मनुष्य भोग प्रधान के साथ साथ कर्म प्रधान योनि भी है । यानि मनुष्य अपने पिछले कर्मों के फलस्वरूप भगवान से प्राप्त फल भोगता भी है और अगला कर्म करके अपना प्रारब्ध या भाग्य बनाता भी है । 
इसलिए मनुष्य का भाग्य या प्रारब्ध उसके अपने ही कर्मों का फल है, अत: उसके अपने ही हाथों में है अपना भाग्य बनाना या बिगाड़ना । 

इसलिए भगवान मनुष्य को संकल्प करने तदनुसार कर्म करने की स्वतंत्रता में कभी कोई दखल नहीं देते और ना ही कोई महापुरुष दखल देते हैं । वो अपने विभिन्न अवतारों में किए गये लीला के द्वारा , तत्वज्ञान द्वारा एवं अपने शास्त्रों के द्वारा सही कर्म धर्म क्या है ? गलत क्या है? वो सब समझा चुके हैं और आगे भी महापुरुष के रूप में अवतार लेकर समझाते रहते हैं और रहेंगे भी । 

अब इन ज्ञान के बाबजूद भी कोई मनुष्य भगवान को भी गाली दे , उनका खिलाफत करें , उनके जनों को कष्ट दे या कोई ग़लत काम करें और फल के रूप में रोग , शोक और कष्ट पावे और भोगे या बढ़िया कर्म करके बढ़िया भाग्य बना ले एवं फल के रूप में संसारिक सुख आदि भोगे यहां तक कि उनके प्रति भक्ति करके, शरणागत होकर भगवद् प्राप्ति करले तो यह उसकी स्वतंत्रता है जो भगवान द्वारा प्रदत है मानव योनि को ।

अगर भगवान किसी मनुष्य को कोई भी संकल्प करने और किसी भी कार्य को करने से पहले ही रोकते तो फिर मनुष्य कर्म प्रधान योनि नहीं रह जाता जो भगवान के खूद के कानून का उन्हीं के द्वारा उलंघन होता और मनुष्य परतंत्र होता कर्म करने में । 
इस प्रकार मनुष्य के कर्म का फल देने का कार्य भगवान के लिए तर्क संगत नहीं होता । 

यही कारण था कि तमाम राक्षसों ने , आसुरी प्रवृत्तियों के जीवों ने भगवान के उपर भी आक्रमण किया , उनको गालियां भी दी , उनके मंदिरों को उजाड़ा, और आज भी कुछ आसुरी लोग कर रहे हैं फिर भी भगवान उसे नहीं रोकते । हां फल जरूर मिलता है सबके अपने अपने कर्म के अनुसार। 

जब बुरा कर्म करने के फलस्वरूप फल के रूप में प्राप्त पाप का घड़ा भरा और जीव जैसे हीं पुण्यक्षिण हुआ भगवान ने उसको सजा दे दी और आसुरी शक्तियां मारा गया , उसका विनाश हुआ , इतिहास में सब दर्ज है । 
शिशुपाल भरी सभा में भगवान को गालियां देता रहा, कुछ धर्म परायण लोग उसे रोकना चाहा वहां भी , उसी सभा में लेकिन भगवान ने हर किसी को उसे रोकने से मना कर दिया । 
और मुस्कुराते हुए शिशुपाल के गालियों को गिनते रहे । सौ गालियां पुरी होते ही शिशुपाल के पुण्य का घड़ा खाली हो गया तथा पाप का घड़ा भर गया । फिर भगवान का चक्र चला और शिशुपाल का सिर धर से अलग । 

तो जब यह बातें ( तत्वज्ञान ) मालुम है आपको तो फिर आप क्यों कहते हैं कि भईया वो ग़लत कर रहा है आप कुछ बोलिए ? इसका मतलव तत्वज्ञान आपके मस्तिष्क से फिसल जाता है ।
 
जो जो ऐसा कर रहा है वो आसुरी वृत्ति का मनुष्य है करने दिजिए उसे । 
हमारे आपके समझाने से या रोकने से वे नहीं रूकने वाले हैं , यह मान लिजिए जितना जल्दी हो सके ।

जब वो नहीं समझने वाला समझाने से भी, तो फिर भगवान के द्वारा दिए हुए स्वतंत्रता में हम दखल अंदाजी क्यों करे ?

अगर हम उसको समझाने गए भी तो उल्टा वो हमको ही अपने व्यवहार से अशांत करेगा , कुसंग बोलेगा ।‌ और कुसंग अच्छी चिज़ नहीं है हमारे लिए । 

तो इतना तो समझदारी होना ही चाहिए ! जो लोग मुझे कहते हैं रोकने के लिए, उनको तत्वज्ञान याद नहीं रहता इसलिए ऐसा गलती करते हैं और मेरे मैसेज बौक्स में भर देते हैं मैसेज दे देकर और प्रमाण के रूप में मेरे मैसेंजर में और व्हाट्सएप्प पर भी विडियो भेज कर कि आप क्यूं नहीं कुछ बोलते ? अरे पुरे दुनिया का आप ही ठेका ले रखा है क्या ? 

मै तो भाई बहुत साधारण जीव हुं , मेरी इतनी सामर्थ नहीं कि मैं आसुरी प्रवृत्तियों वाले मनुष्य को समझा सकूं और रोक सकूं गुरू द्वारा दिए गए तत्वज्ञान के बाबजूद भी । 

जिसको अहंकार है कि वो उस आसुरी प्रवृत्तियों वाले मनुष्य को समझा देगा , रोक देगा तो जाईए आप ही समझा दिजिए उसको !

अरे जब भगवान नहीं रोकते किसी मनुष्य को गलत या सही संकल्प करके गलत और सही कर्म करने से तो मैं क्यों जाऊं अनाधिकार चेष्टा करने ? 

जब भगवान और महापुरूष ऐसे लोगों को नहीं समझा सके अनेकों अवतार के बाबजूद तो हम आप क्या है भाई ? 

रहने दो उसे उसके हाल पर । छोड़ो उसे । 
भगवान उसके भी कर्मों का फल एक दिन जरूर देंगे ही, जब बड़े बड़े रावण , कुंभकर्ण , हिरण्यकश्यप, हिरण्याक्ष , कंस , शिशुपाल , जरासंध जैसा महावली नष्ट हो गया स्वयं के उदंडता के कारण तो भला हम आप और वो क्या है ? करने दो उसे उदंडता । 

आप क्यों परेशान हो रहे ? क्या भगवान आप ही को ठिकेदारी दी है उसे गलत करने से रोकने के लिए ? आप दुसरे को मत देखो कि दुसरा क्या क्या कर रहा है । आप खूद को देखो कि आप क्या कर रहे हो ? साधना न करके यही सब विडियो आदि देखते रहते हो कि कौन कौन क्या क्या ग़लत कर रहा है क्या नहीं ? 

अरे अपना बना लो न । आपको हमको हमारे किए का फल मिलेगा उसको उसके किए कि फल (सजा) मिलेगा भगवान से । आपको चिंता क्यों हो रही है , क्यों अपना समय आप बर्बाद कर रहे हो ? 
जितना समय और श्रम आपने किया मेरे मैसेंजर पर उसका विडियो भेजने में और मुझे लिखने में , उतना समय आप अगर सिरियसली श्री महाराज जी का प्रवचन सुन लेते , उनका विडियो देख लेते , कुछ तत्वज्ञान और भी पक्का कर लेते , कुछ राधा नाम ले लेते , पांच मिनट साधना कर लिए होते तो आप कुछ और आगे बढ़ चुके होते ।
उल्टा अपना भी समय बर्बाद कर रहे हो, मेरा भी समय खड़ाब करना चाहते हो और मनगढ़ में जाके जिजियों से कंप्लेन करके उनके द्वारा रोकवाने के लिए मुझे बोलते हो !
इतना फालतु समझते हो महापुरुषों के समय को क्या ? इतना भी ज्ञान नहीं है आपको ?

और रही बात समाज की, तो समाज मे अगर कोई असंवैधानिक काम कर रहा है और आपको लगता है गलत है, तो कानून कहता है पुलिस में कंप्लेन कर दो आप , कोर्ट में जाकर कंप्लेन कर दो , काननू अपने हाथ में लेने का अधिकार तो देश का कानून भी नहीं देता है किसी को संसार में भी ।

ठीक उसी प्रकार भगवान के बनाए कानून के खिलाफ काम करने वाले को भगवान ही दंड देंगे, हम क्यों अनाधिकार चेष्टा करें । वो सबको देखते रहते हैं हम सभी के कर्मों को नोट कर रहे हैं । हम क्यों उनको बतलाने जाए । वो तो सर्वांतर्यामी है , सभी के कर्मों को नोट करते हैं , और स्वत: संज्ञान लेने में भी समर्थ है, फल देने में भी स्वतंत्र है और हर तरह से समर्थ भी है भगवान ।

No comments:

Post a Comment