फ़कीर ने कहा यही तो मै तुम लोगो को समझाना चाहता हूँ की तुम लोग जो सदा यह कहते रहते हो की एक बार जीवन की ज़िम्मेदारियाँ पूरी हो जाये तो हरि गुरू सेवा, रूपध्यान संकिर्तन ,सत्संग शुरू करेंगे;
जैसे नदी का जल खत्म नही होगा, हमको इस जल से ही पार जाने का रास्ता बनाना है इस प्रकार याद रखो जीवन खत्म हो जायेगा पर जीवन के काम खत्म नही होंगे इन कार्यो , जिम्मेदारियों के बीच मे से ही आगे की तैयारी यानि हरि गुरू सेवा, रूपध्यान संकिर्तन ,सत्संग का मार्ग बनाना है ,जिससे परलोक बनेगा , गोलोक मिलेगा , परमानंद की प्राप्ति होगी , सदा के लिए सुखी हो जायेंगें ।
No comments:
Post a Comment