याद रखो इस संसार में सभी का आसक्ति केवल धन से है , धन के बिना मां वाप भी नहीं पुछेगा एक समय एक बेटा आवारा हो जाए तो । अगर पति काम न करके धन से बीबी को , मां वाप , पुत्र पुत्री को या बीबी पति को खुश करेगा तो ।
इस लिए सबको केवल धन से आसक्ति है , पर भ्रम बस मां बाप कमाऊ पुत्र को मेरा बेटा , मेरा बेटा और पत्नी मेरा पति और बच्चा मेरा बाप करता रहता है , मर जाने पर प्रेम के लिए नहीं रोता है कोई वल्कि इस लिए रोता है सब की अब मेरा सहारा कौन होगा , कौन करेगा हमको ।
इसलिए संसार में स्वार्थ आधारित प्रेम है । निस्वार्थ नहीं ।
और मृत्यू के कुछ दिन सब लोग अपने मां बाप दादा दादी को भुल जातें हैं ।
अगर नहीं तो देखो अपने आप में कितनी बार आप अपने पुरखे , दादा दादी को याद करते हो । कितने लोग अपने दादा दादी , को याद करता है वो आज कल के जमाने में तो बच्चा अपने मां बाप का तस्वीर भी नहीं रखता है अपने बर्तमान निवास पर । पैतृक घर पर कहीं लटका हो तस्वीर तो अलग बात है । फिर वो दादा दादी का बात हीं मत पुछो । मैने तो युथ शीविर में बहुत से बच्चों से जब पुछता हुं उसके दादा दादी का नाम तो वो बता नहीं पाता है ।
अतः केवल और केवल हमारा सबका एक ही सनातन मां वाप है राधा कृष्ण , क्या हम उनके लिए कभी रोए , उनसे प्रेम करतें हैं ?
जबकी सारा बल उन्हीं से हमें प्राप्त होता है ।
और हम गद्दार कभी उनके लिए नहीं रोए । धिक्कार है हमारे मानव जीवन को ।
उनके लिए मात्र रोओ ।
वही एक हमारे माता पिता हैं सनातन । हम आत्मा है शरीर नहीं । शरीर के सारे रिश्ते हैं संसार में । पर हम शरीर नहीं । शरीर त्यागा रिस्ते समाप्त ।
पर हमारा सब ख्याल रखने वाला सिर्फ और सिर्फ एक जगरनाथ जी हैं । उनसे प्रेम करो , उनके प्रेम में आंसु वहाओ केवल ।
संसारी के लिए नहीं , संसारी के प्रति अपना फर्ज पुरा करो इमानदारी से ।
किसी के धन संपत्ति का नूकसान ना करो ,किसी से रंग द्वेष मत करो , झूठ मत बोलो , नही तो अगले जनम में उसका नौकर बन कर चूकाना होगा । कम पैसे मिलेंगें , काम ज्यादा लेगा मालिक , चूकाना परेगा हीं । नहीं बच पाओगे ।
भगवान का संविधान हैं । उससे कोई नहीं बचेगा और ना बचा है ।
इसलिए संसार के लिए अपना फर्ज निष्ठा के साथ पुरा करो और आसक्ति , प्रेम , केवल जगरनाथ जी से रखो । जगन्नाथ जी हीं राधा कृष्ण हैं । वहीं राम और सिता है । कोई अंतर नहीं । वे हीं हमारा असली मां बाप है ।
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