Sunday, 31 January 2021

इन्हीं संतों के कृपा से हमारा देश और हमारा संस्कार‌ और संस्कृति जीवित है अमीट है ।

इन्हीं संतों के कृपा से हमारा देश और हमारा संस्कार‌ और संस्कृति जीवित है अमीट है । 
और ऐसें हीं संतों के कृपावल से , हमारे देश का अस्तित्व अमीट है । हम इन सबका ह्रदय से सम्मान करतें हैं । और अपने भावी पीढ़ी को शिक्षा देतें हैं कि हमेशा संतों का सम्मान करना , चाहे दुनिया कुछ भी कहे । किसी में दुर्भावना मत करना । 
इनके चरण रज को अपने मस्तक पर लगाना । 
जो एक वार भी ह्रदय से राधा नाम लेता है । हम उनके सेवक हैं । हमें अपने संतों पर नाज हैं । हम अपने सदगुरू देव कृपालु महाप्रभु का भक्त हैं‌। और उनकी हर आज्ञा हमारे लिए सिरोधार्य है । हम उनके संतों का अति सम्मान करतें हैं , उनके भक्तो का सेबक हैं । उनके जनों का दास हैं । यह हमारी भारतीए संस्कृति हैं । वैदिक संस्कृति और वैदिक आज्ञा का पालन करना हमारा आत्मीक कर्तव्य है । 
सियाराम मय सब जग जानी 
करहु़ं प्रणाम जोरी जुग पाणी ।।

अगर हम किसी संसारी के अपने प्रति या किसी भी दुसरे जीव के प्रति रूखे व्यवहार का विरोध करें , तो वो भी शालीनता से , संयमित और मर्यादित भाषा का प्रयोग से , सहजता , दीनता , सहिष्णुता पहले हमें खुद अपनाने के लिए हमारे गुरूदेव ने कहा हैं । 

राष्ट्र के नागरिक होने का फर्ज कैसे पुरा किया जाता है । यह भी हमारे गुरू देव ने मिशाल पेश किए हैं और अब दीदी लोग और मां कर रहीं हैं तिरंगा लहराकर और उसी सेवा को और आगे बढ़ा कर । केदार नाथ , कोशी बाढ़ पीड़ितों कि सहायता करना , तीन तीन होस्पिटल गरीबों के लिए, नी:शूल्क स्कूल , कौलेज आदि का निर्माण और संचालन उनके जन सेवा का परिचायक है , गौशाला आदि मिशाल तो है हिं परन्तु सबसे बड़ी सेवा है उनकी हम सभी को भगवद् संबंधी ज्ञान का दान करके हमारा परम कल्याण करना । 

देश का सम्मान , देश के शहिदों का सम्मान , और देश के प्रति हमारे फर्ज निर्वहन , निरीह जीवों के लिए , साधु संतों के लिए , गरीवों की सेवा के लिए हमारे कृपालु महाप्रभु का योगदान समुचे भारत के बुद्धिजीवियों के लिए मिशाल हैं ।
प्रेम मंदीर , प्रेम भवन , कीर्ति मंदीर , भक्ति मंदीर , भक्ति भवन आदि उनका देन है हमें प्रेरणा देने के लिए कि हरि गुरू की सेवा और उन्हीं से प्रेम करना हमारा अंतिम और सर्वोपरि लक्ष्य है।

श्री महाराज जी ने यह सब करके विश्व सेवक होने का एहसास हमें कराया है ठीक श्री कृष्ण की तरह । 
यह श्री कृष्ण के सीवा और कोई नहीं कर सकता , ममता की अपार समुद्र श्री महाराज जी में ऐसे हैं जैसे साक्षात राधारानी की करूणा बरसती है । वहीं गुण उन्होंने तीनों दिदियों और पुज्यनियां हमारी मां रासेस्वरी देवी जी को दिए हैं ।
हमने ऐसा गुरू पाया है । कि जो जीव उनको अपने ह्रदय में सच्ची निष्ठा से जैसे हीं धारण करना शुरू करता हैं , ह्रदय भगवद् प्रेम से भर कर अंखियां हरि दर्शन के लिए तरप उठती है । यही उनकी कृपा है , कृपा हो गयी , अब पाना क्या शेष है !
श्री राधे ।

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