Friday, 18 August 2023

संसार में केवल दो जाति के मनुष्य रहते हैं एक श्रेय मार्ग वाले जिनको केवल भगवान श्री कृष्ण और उनके जनों से हीं प्रेम है और दुसरा प्रेय मार्ग वाले जिनको संसार से और अपने संसारिक रिश्तेदारों से प्रेम है ।

श्री महाराज जी :- संसार में केवल दो जाति के मनुष्य रहते हैं एक श्रेय मार्ग वाले जिनको केवल भगवान श्री कृष्ण और उनके जनों से हीं प्रेम है और दुसरा प्रेय मार्ग वाले जिनको संसार से और अपने संसारिक रिश्तेदारों से प्रेम है ।

संसार का उपयोग दोनों प्रकार के जीव करते हैं, अंतर इतना है कि श्रेय मार्ग वाले संसारिक संसाधनों, यथा तन , मन ,धन का उपयोग भगवान व उनके जनों के सेवा के लिए करते हैं, भगवान और उनके जनों के सुख के लिए करते हैं और सेवा एवं साधना के माध्यम से जितेंद्रिय होकर परमानंद की प्राप्ति करते हैं वो भी सदा के लिए , जबकि प्रेय मार्ग वाले संसार का उपयोग नहीं उपभोग करते हैं , वो भी खुद के इंद्रियों के क्षणिक सुख के लिए लेकिन अंत में असह्य दु:ख पाते हैं।   

इसलिए बुद्धिमान मनुष्य केवल वो है जो संसार में रहते हुए भी संसार से अनासक्त हैं और अपना निज रिस्तेदार भगवान और उनके जनों को हीं मानते हैं , इसलिए ऐसे जीवों के ह्रदय कमल में भगवान व गुरू पुर्ण रूपेण करूणा कारक रूप में निवास करते हैं, वे ऐसे जीवों के किसी भी संसारिक कर्मो को नोट नहीं करते तथा हर पल हर प्रकार से रक्षा एवं योगक्षेम वहन करते हुए उसको उसके लक्ष्य की प्राप्ति करा देते हैं , परमानंद प्रदान कर देते हैं सदा के लिए । 

जबकि प्रेय मार्ग वाले जीव का ह्रदय तमाम संसारिक काम और वासनाओं का घर होता है , अत: भगवान इनके ह्रदय में इनके आत्मा के साथ केवल सायुज्य सखा के रूप में लेकिन न्यायी भाव में रहते हैं और यहां वो ऐसे जीवों के मन में उठे प्रत्येक संकल्पो को नोट करके उसे उसके कर्मो के अनुरूप हीं फल प्रदान करते हैं । ऐसा जीव अनंत काल तक अपने प्रारब्ध के अनुसार चौरासी लाख योनियों में भटकता रहता हैं और दुख पाता हैं । - श्री महराज जी, साधन साध्य से ।

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