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Tuesday, 26 November 2024

लक्ष्मी कौन है क्या है ?

*कितने अजीब लोग हैं!*

जरा अपने संसार को देखो कैसे अजीब लोग हैं हमारे संसार में। ये बड़े-बड़े पैसे वाले वो दुकानदार हो छोटे-छोटे या बड़े-बड़े खरबपति हों। ये लोग इस दिवाली पर हिसाब करते हैं और अपने बहीखाता में लिखते हैं- सदा लक्ष्मी सहाय! सदा कुबेर सहाय! लक्ष्मी सदा हमारे पास रहे। कुबेर सदा हमारे पास रहे। ये पंडित लोग जो पूजा कराते हैं आपके यहां शादी ब्याह में, यज्ञ बगैरा में, तो पूजा के बाद में एक श्लोक बोलते हैं- 

*यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।* 
  
सब देवता अपने-अपने धाम को जाओ, हम पूजा कर चुके। पहले बुलाते हैं ना! गणेश जी और दुर्गा जी और षोडस मातृका, नवग्रह और अंत में कहते हैं- सब लोग जाओ। *लक्ष्मीम कुबेरेण च विहाय* लक्ष्मी और कुबेर तुम दोनों रहो और बाकी लोग जाओ। ये कितने अजीब लोग हैं अजीब! अजीब मायने समझते हैं आप लोग ना? हां! जिनकी खोपड़ी उल्टी हो वो अजीब होते हैं। भगवान सबसे अधिक अजीब हैं क्योंकि वो अन्यथाकर्तुम समर्थ है। वह आंख से सुनते हैं, कान से देखते हैं। अजीब हैं ना? हां!
तो ये हमारे संसार के लोग भी अजीब है और इनको बताने वाले पंडित जी वगैरह भी अजीब हैं! इनको यह नहीं पता है कि लक्ष्मी बिना भगवान के कैसे रहेंगी। वो तो सदा भगवान के बाएं तरफ रहती हैं। जब तुम भगवान को भेज रहे हो कि सब जाओ अपने-अपने लोक में और लक्ष्मी तुम रह जाओ। तो लक्ष्मी कहेंगी- तुम्हारा दिमाग खराब है, मैं अपने पति को छोड़कर तुम्हारे यहां रह जाऊं? यह तो संसारी स्त्री को भी अगर कोई ऐसे कहे कि आज जितनी स्त्रियां आई हैं वो सब रुकें हमारे घर में और जितने पति आए हैं वह जाएं अपने-अपने घर! तो लोग पिटाई कर देंगे। यह पागल हो गया है! तो लक्ष्मी तो तभी रहेंगी जब भगवान को बुलाओ। ना! कोई नहीं लिखता बही खाता में- 'राम सहाय', 'श्री कृष्ण सहाय', 'भगवान सहाय'। लक्ष्मी सहाय, कुबेर सहाय! यह लक्ष्मी कैसे रहेंगी भगवान के बिना? और कुबेर कैसे रहेगा? वह तो सर्वेंट है। तुलसीदास ने लिखा है, बड़ा मजेदार- 

*बिंधि न ईंधन पाइऐ सागर जुरै न नीर।*
*परै उपास कुबेर घर जो बिपच्छ रघुबीर।।*

अगर भगवान को आप नहीं मानते और ये कुबेर और लक्ष्मी की भक्ति करते हैं तो आपका क्या हाल होगा? विंध्याचल पहाड़ में इतने वृक्ष हैं और खाना पकाने को लकड़ी नहीं मिलेगी आपको। हां! इतना पानी भरा है समुद्र में, उंगली डूबोने को भी पानी नहीं मिलेगा। और अनंत धन है कुबेर के पास लेकिन वहां उपवास शुरू हो जाएगा, फाके पड़ेंगे। तो लक्ष्मी और कुबेर की भक्ति कर रहे हो और भगवान को विदा कर रहे हो! ये अजीब लोग हैं ना? हां! यह कृपालु बोल रहा है और कोई नहीं बोला आज तक। हां ! पूजा करवाते हैं और लक्ष्मी को सिर झुकाते हैं। और एक बात और बताएं आपको बड़ी मजेदार कि लक्ष्मी तो भगवान की अंतरंग शक्ति है। दिव्यानंद उनके पास है। और यह माया को लोग लक्ष्मी कहते हैं, माया को! यह जो संसारी संपत्ति है- सोना, चांदी, रुपया, मकान, जमीन इसको कहते हैं- लक्ष्मीवान है यह बड़ा! धनवान है इसलिए लक्ष्मीवान है! लक्ष्मीपति है! यह लक्ष्मी नहीं है यह तो माया है। संसारी वस्तु तो माया कहलाती है। यह पृथ्वी है ना! इसी से तो पैदा हुआ सोना, चांदी, हीरा। जितना भी आप लोग वैभव कहते हैं यह पत्थर सब है ना! यह मिट्टी से तो बने हैं। सोना कहां से निकलता है? इसी पृथ्वी से, चांदी इसी पृथ्वी से, हीरा इसी पृथ्वी से। वो जिसके पास अधिक हो गया वो लक्ष्मीपति हो गया! वो तो मायापति है। लक्ष्मीपति नहीं है कोई। लक्ष्मी तो भगवान की अंतरंग शक्ति है वो तो दिव्यानंद देती हैं मैटेरियल नहीं, स्पिरिचुअल हैप्पीनेस। लेकिन सब अजीब हैं ,अजीब काम करते हैं और चल रहा है परंपरा बस उसी प्रकार। आप लोग समझे रहिए आपको राधा कृष्ण की भक्ति करना है अनंत कोटि दुर्गा, लक्ष्मी, कुबेर सब अपने आप भागे आएंगे। आप सुप्रीम पावर की शरण में रहें और सबको अपने आप बिना बुलाये आने दें, डरे नहीं। लेकिन किसी का अपमान नहीं करें। हां! सबको नमस्कार है लेकिन मन बुद्धि का समर्पण श्यामा श्याम और उनके जन गुरु के प्रति होना है। ये रहस्य आज धनतेरस को आप लोग मस्तिष्क में रख लें।

*-प्रवचनांश भक्तियोगरसावतार अनंतश्रीविभूषित पंचम मूल जगद्गुरुत्तम १००८ स्वामि श्री कृपालु जी महाराज*