मेरा खुदा
मुझसा ही आलसी है मेरा खुदा
ना मैं कुछ मांगता हूं और ना वो कुछ है देता !
पल पल जल रही है सांसो की डोरी
तेल तो कब का जल चुका
अब है बाती की बारी
न सामने आता है मेरा खुदा
न मुझे बुलाता है मेरा खुदा
चलो अच्छा है उनके जाऩीव निसार हो जाएँ
उनके सुख के खातीर हर हद् से गुजर जाएँ ||||
No comments:
Post a Comment