Tuesday, 9 February 2016

वो मुस्कुराता सा चेहरा

वो मुस्कुराता सा चेहरा , वो सिमटी सी चादर
कहो मैं तुम्हे किस तरह भुल पाऊँ !
वो लम्हा तेरे साथ जो मैने विताया
कहो ऐ सितमगर तुझे किस तरह भुल जाऊँ !
वो शोखी अदाएँ , वो दयामय चेहरा 
कहो मेरे गुरुवर तुझे कैसे मै भुल जाऊँ !
है इल्जाम मुझ पर की मै जी रहा हूँ
भला तुमसे मै किस तरह दुर जाऊँ |
न आता है मुझको ये दुनियादारी
कहो मेरे या रव मै कैसे वादा निभाऊँ ?
मै गीतो में अपने तुझे जो सजाऊँ
कहो मेरे रहवर, तेरे विन मै किस तरह गीत गाऊँ ?
हमें छोड़ कर जो तुम चल दिए हो
कहो मेरे जाऩिव मै किस तरह जी पाऊँ ?

  ये वियोग गीत  सिर्फ तेरे लिये मेरे खुदा :- आपका संजीव

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