Tuesday, 9 February 2016

हसरतो के बाजार


हसरतो के बाजार से मुझको बचा लो मेरे मोहन
या तो, तु आजा मेरे पास
या मुझको बुला लो मेरे मोहन |

तेरे वगैर यहां सब सुना है

यह दुनिया तो एक सपना है
मै सपने को ही सजा लुगां
सपनो में ही सही तु आजा मेरे मोहन |

चांदनी रात भी अब जलन देती है
ओस की बुंदे भी चुभन देती है
मैं आंसुओं मे ही नहा लुगां
आंसुओ के दरिया को बहा दो मेरे मोहन |

जगत के रंग अब लुभाते नही
चमन के फुल अब सुहाते नही
मैं तेरे यादो से ही दिल बहला लुगां
यादो मे ही सही तु आ जा मेरे मोहन |

जिन्दगी का अब क्या भरोसा
न जाने कब कयामत आ जाए
इससे पहले की कयामत हो
तु कयामत से पहले आ जा मेरे मोहन |

तु जानता की सब तेरे अपने है
यहां गैर कहां कोई
दोस्तो के साथ ही सही
युगल रुप में दरस दिखा जा मेरे मोहन |

मैं आंसुओं मे ही नहा लुगां
आंसुओ के दरिया को बहा दो मेरे मोहन |

:- मेरी
 ए रचना आपकी दया से आपको समर्पित मेरे मोहन , आपका संजीव

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