रोता हूँ जब तेरी यादो में
तुम ही आंसु बन जाते हो |
तुम ही आंसु बन जाते हो |
लिखता हुँ जब कोई गीत तुझे
तुम छन्द बन छा जाते हो |
तुम छन्द बन छा जाते हो |
बन कर बसंत तुम पतझर में
हर गुलशन को महकाते हो |
हर गुलशन को महकाते हो |
बन कर कभी राधा की करुणा
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
घनघोर निशा की बेला में
तुम ही चन्द्रमा बन जाते हो |
तुम ही चन्द्रमा बन जाते हो |
बन कर गोपी का गीत प्रभु
कृष्ण को तुम ही रीझाते हो |
कृष्ण को तुम ही रीझाते हो |
बन धुन वंशी कभी कान्हा की
भक्ति का गीत सुनाते हो |
भक्ति का गीत सुनाते हो |
बन कर कभी राधा की करुणा
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
मेरे इस निरस जीवन में
तुम बहार बन जाते हो |
तुम बहार बन जाते हो |
बन कर घटा घन घोर प्रभु
बन मोर नाचते मधुवन में |
बन मोर नाचते मधुवन में |
छा जाते बन हरियाली ब्रज में
तब तुम ही कृष्ण बन जाते हो |
तब तुम ही कृष्ण बन जाते हो |
बन कर कभी राधा की करुणा
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
भक्तो पर प्रेम लुटाते हो ||
कभी घनन घनन कभी छनन छनन
तुम वंशी मधुर बजाते हो
तुम वंशी मधुर बजाते हो ||"
तुम वंशी मधुर बजाते हो
तुम वंशी मधुर बजाते हो ||"
( मैं ए गीत गुरुदेव आपके प्रेरणा ही से लिखा है और आपको समर्पित-संजीव आपका चरणानुरागी )

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