Dedicted to my sadguru Sri Kripalu Jee Maharaj
जुवाँ खामोश हैं , शब्द परेशां सा क्यूँ है ,वेद वेचैन हैं , श्रुतियां वेजान सा क्यूँ है ,वो साथ हैं, फिर दिले नादां तू तन्हा क्यूँ है ,कुछ तो कहो दिलवर , आज तेरा मौन क्यूँ है आज तेरा मौन क्यूँ है, आज तेरा मौन क्यूँ है ?
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