Sanjeev Kumar blogs
Friday, 12 February 2016
निज चरण शरण मोही दो
हे नाथ दया कर दो , हे नाथ दया कर दो,
निज चरण शरण मोही दो
हे नाथ दया कर दो ,
अब द्वार खड़ा तेरो ,
हे नाथ दया कर दो ||
जल विनु तलफति मीन के जैसे
तुम्हरी ही द्वार पड़ो
हे नाथ दया कर दो ||
हौं पतितन हर जनम जनम के
तुम्हरी ही आस धड़ौ
हे नाथ दया कर दो ||
कहत 'कृपालु' दया निधि तुम हौं
अपनी ही लाज रखो
हे नाथ दया कर दो ||
अब हमरी भी पीर हरो
हे नाथ दया कर दो
निज चरनशरण मोही दो
हे नाथ दया कर दो ||
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