Saturday, 11 November 2023

ब्राह्मण का धर्म और कर्तव्य।

ज्ञानयोग तथा भक्तियोग द्वारा ब्रह्म से साक्षात्कार करना और अन्य जीवों को कराना हीं ब्राह्मणों का एक मात्र धर्म तथा कर्तव्य है । वेदानुसार , शास्त्रानुसार तत्व ज्ञान हासिल करना एवं न्याय, निति, नैतिकता, कर्तव्य-परायणता, ईमानदारी, त्याग , दया , करूणा , एवं उच्च आदर्श, सिद्धांतों आदि का पालन करना तथा दुसरे जीवों को उस पर चलने के लिए प्रेरित करना, समाज में समरसता तथा सामंजस्य स्थापित करना ही ब्राह्मणों का मुख्य लक्ष्य , उत्तरदायित्व तथा कर्तव्य, सनातन धर्म में निर्धारित किया गया है । :- आचार्य चाणक्य का कथन ।।

आज अधिकांश ब्राह्मण, समाज में अपना सम्मान खो रहा है , क्योंकि आज अफसोस कि बात यह है कि इस कलयुग में 90% ब्राह्मणों के बात-व्यवहार से , सोंच से , चाल चलन से ऐसा लगता है कि हमारा ब्राह्मण समाज खुद पथ-भ्रष्ट होकर पतन कि ओर अग्रसर हैं , मांस मदिरा का सेवन ,‌ झूठ , व्यभिचार, अन्याय , अनिति , अधर्म , अज्ञानता , और सभी प्रकार के माया के दुर्गुणों से युक्त अधिकांश ब्राह्मण समाज हर प्रकार से आज अपने हीं जमीर का दमन दिन रात करते रहते हैं तथा तर्क को छोड़कर कुतर्क , वितर्क , अतितर्क से स्वयं के तुष्टिकरण में जुटे हुए है । 
यही कारण है आज अधिकांश सनातन समाज दिशाहीन हो चुकि है और गर्त में जा रही है । ब्राह्मणों कि दशा और दिशा देख कर इन पर बड़ा तरस आता है । आज ऐसा अनुभव प्रायः हो रहा है कि दुसरे वर्गो कि तो कुछ उन्नति हो रही है लेकिन हमारा अधिकांश ब्राह्मण समाज आज किस दिशा में जा रहा है , वो किसी से छुपी नहीं है , भगवान सब देख रहे हैं और व्यथित हैं ।  
आज बदलते युग में , समय के अनुसार ब्राह्मण पुत्र पुत्री डौक्टर , बने , इंजिनियर बने वकील बने बहुत अच्छी बात है पर अधर्म अनिति , अन्याय , मांस, मदिरा का सेवन, व्यभिचार तथा शास्त्रों के विपरित, धर्म विरूद्ध आचरण कम से कम ब्राह्मणों से अपेक्षित नहीं - संजीव कुमार ।।

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