Monday, 13 November 2023

समुद्र मंथन का रहस्य

एक भाई के शंका का समाधान । 
Abhiram Kuwar जी ने पुछा है कि :- राधे राधे संजीव भैया !🙏
एक प्रश्न है जो परेशान कर रहा है ।
वह यह कि समुद्र - मंथन वाली एक घटना से हमें पता चलता है कि मोहिनी रूप में विष्णु ने देवताओं को अमृत - पान कराया था जिसके कारण देवता अमर हो गए । वहीं, विष्णु की मंशा भाँपकर राहु नामक एक राक्षस चुपके से देवताओं की पंगत में जा बैठता है । पवन देव उसे देख लेते हैं और विष्णु को इशारा कर देते हैं । विष्णु तुरंत सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट देते हैं किंतु तब तक अमृत की कुछ बूंदें उसके गले से नीचे उतर चुकी होती हैं । परिणामतः वह भी नहीं मरता बल्कि उसका कटा हुआ सिर राहु तथा धड़ केतु के नाम से अमर हो जाते हैं । 
दूसरी तरफ, हमें मालूम है कि देवताओं  का पुण्य क्षीण होने के पश्चात उन्हें वापस कुकर - शूकर बनना पड़ता है अर्थात उनका जीवन - चक्र पुनः नियमपूर्वक प्रारंभ हो जाता है ।
यह विरोधाभास क्यों? आशा है, मेरे प्रश्न का आप अन्यथा नहीं लेंगे अपितु शंका समाधान करना चाहेंगे । धन्यवाद! राधे राधे 🙏

उत्तर -  एक कल्प यानि चारों युग  के काल ( अबधी ) को जोड़ कर 71 से  गुणा करते हैं तो एक मन्वंतर होता है इसको 14 से गुणा कर दिजिए तो जितना हिसाब बनेगा  इतने  साल का एक कल्प होता है जो ब्रह्मा जी  के एक दिन के बराबर होता है और इतने हीं काल  का उनका एक रात होता है  और इतने हीं दिनों की देवता की आयु होती है उनके एक दिन यानि एक मन्वंतर  के बराबर  या कुछ देवताओं का उम्र एक कल्प के लिए भी होता है ,  इसलिए  देवताओं का अमरत्व एक मन्वंतर  के लिए होता है ना की अनंत काल तक के लिए या अनंत कल्प  के लिए। लेकिन कुछ देवता का उम्र एक कल्प के बराबर या एक से अधिक कल्प के लिए भी होता है उनके पुण्य के आधार पर । अत: सभी के अपने-अपने अलग-अलग उम्र है 
इसको अब गणित से समझिए -

चार युग होता है न - सतयुग 17,28,000 वर्ष, त्रेता 12,96,000 वर्ष , द्वापर 8,64,000 वर्ष एवं कलियुग 4,32,000 वर्ष का होता है । तो चारों को मिला कर हुए 43,20,000 वर्ष जिसको चार युग कहा जाता है । ये 71 बार बीतने पर एक मनवंतर होता है । ऐसे चौदह मनवंतर बीतने पर ब्रह्मा का एक दिन यानी 43,20,000 से 71 को गुणा करने से 30,67,20,000 वर्ष और इसमें 14 से गुणा करने से  4,29,40,80,000 वर्ष का दिन  और इतने हीं वर्षों की ब्रह्मा जी एक रात होती है ।  ब्रह्मा के एक दिन में 14 मन्वन्तर होतें हैं जैसे स्वयंभुव , उत्तम , तामस , रैवत, वैवस्वत, सावर्णि, दक्ष सावर्णि , ब्रह्म सावर्णि , धर्म सावर्णि , रुद्र सावर्णि , देव सावर्णि , इन्द्र सावर्णि इत्यादि । वर्तमान, जो मन्वन्तर चल रहा है , वह है सातवाँ मन्वन्तर , जिसका नाम है वैवस्वत ।
तो 14 मन्वंतर बीत जाने के बराबर एक कल्प होता है , जो ब्रह्मा जी का एक दिन होता है और इतने काल का उनका एक रात भी होता है ।  उनके एक दिन यानि एक कल्प के दिन बाले भाग में सृष्टि का उदय रहता है और उनका एक दिन यानि एक कल्प के दिन बाला भाग के अस्त होने पर प्रलय हो जाता है और सृष्टि भगवान के महोदर में चला जाता है  ।
जिस प्रकार हम रात होने पर सो जाते हैं तो सोते समय गहरी निंद में हमको कुछ मालुम नहीं रहता । उसी प्रकार पुरी सृष्टि सो जाती है  यानि निष्क्रिय हो जाती है ।‌
तो ब्रह्मा जी के जागृत अवस्था वाली एक दिन यानि एक कल्प के एक मनवंतर के  बराबर देवताओं को अमरत्व मिलता है उस अमृत से तथा इसी अमरत्व के कारण वो हमेशा युवावस्था में बने रहते हैं तथा स्वस्थ रहते हैं स्वर्ग में जीवन के अंत तक, पुण्य क्षीण होने तक  । कुछ ऐसे भी देवता हैं जिनका उम्र एक चतुर्युगी या किन्ही का एक कल्प भी होता है ‌किन्ही का दो कल्प आदि अपने अपने पुण्य के अनुसार। 

लेकिन उनके पास कर्म करने के लिए मानव शरीर नहीं है , उनके पास  शरीर सूक्ष्म शरीर है जिससे नया कर्म करना संभव नही‌ है । देवता का शरीर भोग शरीर है , स्वर्ग का सुख भोगने के साथ साथ उनका पुण्य क्षीण होते रहता है पल पल ।   अंत में सभी पुण्यो के समाप्ति के बाद उनको निकृष्ट योनि में जाना परता है मृत्यु लोक में । 
 अत: उनको भी कुकर शूकर की योनि में जाना परता है और फिर दुसरा जीव इंद्रादिक आदि देवता बनते हैं ‌, यानि ब्रह्मा जी जब एक कल्प यानि अपने एक दिन के बाद रात आने पर एक रात यानि एक रात के बराबर कल्प में सो  जाते हैं तो उनके सोने के काल में यह पुरा चतुर्युगी ब्रह्मांड प्रलय काल में भगवान के महोदर में पेंडिंग में चला जाता है परा रहता है  एक कल्प तक , जब तक ब्रह्मा जी सोय रहते हैं तब तक । फिर जब रात वाली एक कल्प बीत जाती है तो भगवान चतुरर्मुखी ब्रह्मा जी के ब्रह्मांड का फिर से सृष्टि कर देते हैं अपने संकल्प शक्ति से,  फिर ब्रह्मा जी अनेकों जीवों को प्रकट करते हैं और भगवान का फिर से सभी लीला दुहराया जाता  है फिर दुसरे जीव जो  देवता बन कर आते हैं  वो लोग अमर होते हैं यह चक्र चलता रहता है  । अत: देवताओं का अमरत्व सिमित समय के लिए मिलता है ,  अनंत काल और अनंत कल्प  के लिए कदापी नहीं । आशा है आप समझ गए होंगे । श्री राधे 🙏❤️🙏

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