Wednesday, 8 November 2023

दान का महत्व।

श्री महाराज जी से एक साधक जिज्ञासा की थी समझाने के लिये कि :-  हम सभी साधक गण महाराज जी के आश्रम में,  धाम में आते हैं और रहते हैं, उनके यहां का स्वादिष्ट खाना खाते हैं जिसका लाभ हानी क्या हैं ? 
श्री महराज जी ने बड़े सरल तरीके से समझाया है जो मै आपसे शेयर कर रहा हूँ | 

प्रश्न का जबाब देते हुए श्री महाराज जी ने कहा की आप लोग आश्रम में आते हैं रहते हैं खाते पीते हैं | मै तो एक श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ट ब्राह्मण हूँ तो कुछ लोगों ने मतलव लगाया की उनको पाप लगेगा ! 
महाराज जी ने हंसते हूए कहा की अरे भाइ देखोऽऽऽ मैं तो कमाता वमाता नही हूँ | ऐ सब तो आपलोगों का ही है | आपलोगों का दिया हुआ आपही लोगों के सेवा में लगता रहता है | मेरे पास तो कुछ भी नही है ,मेरा एक भी बैंक एकाउंट तक नहीं है , मेरे नाम पर एक गज जमीन भी नहीं है , एक पेन तक मेरे पास नहीं  | ये सब जो देख रहें है ये सब आपही लोगों का आपही की सेवा में लग रहा है | फिर भी अगर आपको लगता है कि श्रोत्रिये ब्रह्मनिष्ट ब्राह्मण का खाने से पाप लगेगा जो की शास्त्रानुसार सही भी है तो जाने के समय यथा शक्ति अपनी इच्छानुसार दान खाते में दान दे दिजिये ! इससे तो आपही का कल्याण होगा | आपका ही लोक परलोक दोनों बनेगा | 
भगवान तो उनके भक्त के निमित्त निष्काम दान देने वाले से बड़ा खुश होते हैं, बड़ा प्यार करते हैं , उसका योग क्षेम वहन करते हैं, उसको जो मिला है उसकी रक्षा करते हैं और जो अप्राप्य बस्तु  है वो भी देते हैं । साथ साथ संत महापुरुष अपने अनुयायियों से प्राप्त धन को जीव की सेवा में हीं लगा देतें है, जिसका फल दान करने वाले को हीं मिलता है । वो भी लाखों  गुणा । तो आप लोग जो दान करेंगे करते हैं  तो आपहीं का बढ़ीया प्रारब्ध बनेगा, इसलिए  प्रत्येक जीव को दान पर विशेष जोर देना चाहिए । धन से सेवा , तन से सेवा और नहीं कुछ है आभाव है धन का और तन का तो मन से मानसी सेवा जरूर करना चाहिए । 
और धन है , तन भी है और फिर भी केवल मानसी सेवा कर रहे हैं तो ये चालाकी है । इसका मतलव धन से आसक्ति है, ये नहीं चलेगा । 
मन से तो सभी को करना हीं है चाहे जिसके पास धन हो या ना हो , तन हो या ना हो , पर जिसके पास धन है उसको धन से सेवा अवश्य करना चाहिए , धन के दान में मन को डिसिजन लेना परता है , मन में धन से आसक्ति हटा कर धन दान करने में धन और मन दोनों लगता है , इससे बहुत लाभ है । 
हां अगर किसी के पास दस रूप्या भी नहीं , दो रूप्या भी दान करने में बेचारा सक्षम नहीं पर भीतर से यह सोचता है कि हमारे पास दो रूप्या होता तो दान करते , रोता है बेचारा अंदर हीं अंदर की दान करने में भी मैं सक्षम नहीं, इतना दीन है वो ,  तो उसको मन से दान करने में लाभ होता है उसका भी लोक परलोक बनता है । 

पर आज संसार में ऐसा कोई नहीं की उसके पास दो रूप्या भी नहीं है , अरे नहीं है तो भिक्षा मांग कर खाते हो तो भिक्षा मांग कर थोड़ा  दान जरूर करो । 
शरीर तो है ना जिससे भिक्षा मांग कर पेट भर रहे हो अपना तो दान भी करना चाहिए भिक्षा मांग कर । 
इससे दरिद्रता मिटेगी । 

अपलोग तो जानते हैं सुदामा के पास खाने के लिए भी नहीं था,बहुत दरिद्र था , उसके घर में थोड़ा सा चावल था । वही थोड़ा सा एक मुठ्ठी चावल लेकर गया भगवान के लिए , और शर्म से नहीं दे रहा था उनको की एक मुठ्ठी चावल देंगे तो भगवान के महल में उनकी श्रीमति जी के सामने हंसाई होगी ,  भगवान वो चावल छीन कर खाये और सबकुछ दे दिया सुदामा को, भक्ति-वक्ति, लोक भी और परलोक भी सबकुछ । 
जब वो घर लौटा तो अपने झोपड़ी के जगह महल पाया,  

आपलोगों में से बहुत लोग दान नहीं करना चाहते । वो तो मैं आपके पीछे पड़ा रहता हुं आपही के कल्याण के लिए । आप लोग जो दान करते हैं वहीं आपको भगवान हजार गुणा बना कर देते हैं , आपलोग देखते हैं एक  कड़ोरो कमा रहा है थोड़े से श्रम में ,‌ वो पिछले जन्मों में खूब दान पुण्य किया रहा होगा । और एक बेचारा दिनरात मेहनत कर रहा है फिर भी उसको खाने के लाले हैं , उसने दान नहीं किया । तो ए दान वान सब आप अपने लिए करते हैं , अपना लोक परलोक बनाने के लिए ।  दान के बल पर जीव स्वर्ग का सम्राट तक बन जाता है जैसे हरिश्चंद्र, राजा रघु आदि । वशर्ते कि दान सही जगह, सही पात्र में हो । गलत व्यक्ति को किया गया दान नरक भी दिला देता है । 

तो आज संसार में ऐसा कोई नहीं जो सुदामा से भी अधिक निर्धन हो , दरिद्र हो । अत: दान सबको करना चाहिए । 

हां अब धन भी नहीं और तन भी नहीं भिक्षा मांगने के लिए , दुसरे पर आश्रित है पुरी तरह से तन के लिए भी तो ऐसे जीव मन से भी दान कर सकता है । उसको भी वही फल भगवान देते हैं जो एक करोड़ दान देने वाले को देते हैं । तो कलयुग में दान अवश्य करना चाहिए , क्योंकि कलयुग में दान करने का बहुत अधिक महत्व है । 
"दानमेकं कलयूगे "
और अगर दान नहीं करोगे तो दरिद्री बनोगे इस जन्म में भी और अगले जन्म में भी । 
:- श्री महाराज जी के प्रवचन विडियो से , स्थान , ब्रजगोपिका सेवा मिशन , टांगी ।

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