Tuesday, 14 November 2023

कृपालु क्यों आया है, अपने लिये आया है क्या ? इतना परिश्रम करता हुं तुम लोगों के पिछे , पर जरा भी परवाह नहीं तुम लोगो को , तुम लोग मुझसे प्यार नहीं करते ।

“ मैं क्या करूं अब , तुम लोगों को लठिया ले के मांरू क्या ? रात दिन तुम लोगों के पिछे परा रहता हुं, तुम्हारे हीं कल्याण के लिए, लेकिन तुम लोगों ने ठान लिया है मनुष्य जीवन ऐसे हीं गवा लेने का ।
कृपालु क्यों आया है, अपने लिये आया है क्या ? इतना परिश्रम करता हुं तुम लोगों के पिछे , पर जरा भी परवाह नहीं तुम लोगो को , तुम लोग मुझसे प्यार नहीं करते । 
अगर प्यार करते तो जो मैं कहता उसको जरूर मानते और करते, पर तुम लोगों को मेरे आने का महत्व हीं नहीं है । 
भगवान ने मुझे भेजा है तुम लोगों के कल्याण के लिए, पर तुम लोग मेरी बात सुनते हो , मुंडी भी हिलाते हो पर जो बतलाया गया है उसको करते नहीं , कुछ लोग तो साधना के समय घर संसार की बातें करने में व्यस्त रहते है यहां , मैं यहां से बैठ कर सबको देखता रहता हुं, अरे जब यहां धाम में भी अपने संसार को लेकर आते हो तो क्या जरूरत यहां आने की ? 

मैं वो बाबा नहीं जो भीड़ को देख कर खुश हो जाए , चढ़ावा देख कर खुश हो जाए , मै तुम्हारा असली माता पिता हुं । मुझे तुम्हारे कल्याण की चिंता है । 

तुम सब नहीं जानते की मैं तुम सबको कितना प्यार करता हुं, तुम सबकी कितनी चिंता करता हुं , अब कलेजा चीड़ के दिखाऊं क्या ? 
जितना तुम्हारे माता पिता , तुमसे प्यार नहीं करते हैं उससे लाख गुणा तुम्हरा ये बाप तुमको प्यार करता है । पर तुम सब लापरवाही करते हो । 

यह बहुत बड़ा नुक़सान है तुम लोगों का । 
जब मानव शरीर छुटेगा तब पता चलेगा की मेरा असली बाप हमको कितना समझाया ! कितना श्रम किया मेरे पीछे , कितना प्यार किया और करता है मुझे पर हम अपना अनमोल मानव देह गवां लिये । 
कृपालु तब कुछ नहीं कर सकेगा । इसलिए कहता हुं इतना तो करलो की फिर से मानव शरीर मिल जाए और तब कृपालु की बात को मान करके , फिर से साधना करके भगवद् प्राप्ति करके सदा के लिए भगवान का लोक प्राप्त कर लोगे , आनंद मिल जाएगा ।

जितना समय शरीर के लिए देना है बस उतने समय के बाद तुम लोग मन हीं मन राधाकृष्ण की भक्ति करो , साधना करो ।
मत परो संसार के प्रपंच में , संसार की बातें करने से तुमको क्या मिल जाएगा ? कुछ नहीं । 
समय मिलते ही तुम लोग आपस में बात करने लगते हो संसार का , वो ऐसा है वो वैसा है , क्या फायदा इससे , अरे जिसको कृपालु नहीं सुधार सका उसको तुम सुधार लोगे क्या ?

तुम लोग अपने कल्याण की सोचों , जो नहीं समझता है, ठान चुका है कि मानव देह गवां करके हीं छोड़ेगें , जाने दो उसको , किसी के प्रति दुर्भावना मत करो । किसी में बुराई मत ढुंढो , अपनी कमी देखो की तुम कहां हो ? कितना आगे जाना है , साधना की स्पीड बढ़ाओ । 
तुम प्रयास करोगे तो मुझे खुशी मिलेगी , फिर कृपालु भी तुमको आगे बढ़ाने में और मदद करेगा । 
पर जब तुम चलना हीं नहीं चाहोगे तो कृपालु क्या कर लेगा ? 
इसलिए आप सब अपना बांकी बचा किमती समय साधना में लगाओ । जब भी चर्चा करो आपस में तो केवल भगवद् चर्चा करो , साधना करो , थक जाओ तो मन हीं मन राधे राधे करते रहो । 

कम से मानव शरीर दुबारा प्राप्त करने के लिए परिश्रम करो । कृपालु तो तुम्हारे लिए परिश्रम कर हीं रहा है, अपना मानव जीवन सार्थक कर लो । दुसरे निकृष्ठ योनि में न जाना परे फिर से , ऐसा सुनिश्चित करलो , फिर मैं तुमलोगो को मिल जाऊंगा , जहां भी मिलु , जिस रूप में मिलु पर मिल जाऊंगा , तुमको ढुंढ लुंगा , जैसे इस जीवन में मिला , ढुंढ लिया, ठीक वैसे हीं कृपालु तुमको फिर ढुंढ लेगा, इसकी चिंता तुम मत करो , तुम अपना काम करो जैसे बताया है मैंने , मैं अपना काम करूंगा । 

नहीं तो मानव शरीर दुबारा नहीं मिला भगवान के द्वारा तो कृपालु फिर कुछ नहीं कर पायेगा तुम्हारे लिए । 
इसलिए अगर मुझसे थोड़ा भी प्यार करते हो तो मेरी बताई बात को मानो और करो । सिर्फ मानने से कुछ नहीं होगा , करने से होगा । संसार में भी सिर्फ प्लान बनाने से कोई काम नहीं होता , करने से होता है ।
इतना तो तुम लोग जानते हीं हो । “
                                       - जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज

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