Tuesday, 28 November 2023

प्रश्न :- भगवान के दरबार में लाखों जाते हैं कुछ को मिल जाता है , और अधिकतर को कुछ नहीं मिलता ऐसा क्यों ?

प्रश्न :- भगवान के दरबार में लाखों जाते हैं कुछ को मिल जाता है , और अधिकतर को कुछ नहीं मिलता ऐसा क्यों ? 
उत्तर :- " बोया पेड़ बबुल का तो आम कहां से पाओगे "
किसी काम के लिए धन चाहिए बैंक से लोन के रूप में ? बैंक सबसे पहले हमारा CIVIL SCORE चेक करती है। सिबिल स्कोर ठीक ठाक है तो लोन मिल जाता है । जिसका गड़बड़ है उसका दरखास्त ठुकरा देती है । हां अगर कोई सेठ जिसका सिबिल स्कोर अच्छा है और वो गारंटर बन जाए तो बैंक उसको भी लोन दे देती है जिसका सिबिल स्कोर कुछ कम ठीक है । 

उसी तरह भगवान से कुछ मांगने पर भगवान जीव का CIVIL SCORE चेक करते हैं। जिसका सिबिल स्कोर परलोकिक एकाउंट में ठीक ठाक है उसको मिल जाता है प्रारब्ध रूपी बैंक एकाउंट से , जिसका सिबिल स्कोर गड़बड़ है उसको कुछ नहीं मिलता वहां से भी । बेचारा भगवान को भी भला बुरा बोल कर और भी अपना‌ बचा खुचा सिबिल स्कोर बिगाड़ लेता है और नास्तिक बन जाता है । और ऐसा जीव उल्टा भगवान के भक्त से द्वेष करने लगता है । और भी पाप कमाना इसी को कहते हैं , विनाश काले विपरीत बुद्धि । 

भगवान केवल अपने भक्त का सिबिल स्कोर चेक नहीं करतें है । क्योंकि भक्त का गारंटर गुरू होता है । इसलिए जीवन में गुरू का होना आवश्यक है । 
ऐसे तो वास्तविक भक्त भगवान से कुछ नहीं मांगता कभी केवल उनका प्रेम और भक्ति के सीवा पर भगवान और गुरू स्वयं उसका योगक्षेम वहन करते हैं । ताकि जीव को कोई परेशानी ना हो और वो और भी भक्ति पथ पर आगे बढ़े , अग्रसर हो ।

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