उत्तर :- एक नास्तिक है पर वो पिछले जन्मों में पुण्य कमाया था वो संचित है, उसका पिछला संचित पुण्य रूपी प्रारब्ध मजबूत है , पर इस जन्म में गलत कर्म कर रहा है और उसको पिछला मिल रहा है । पर आगे हमेशा मिलेगा ऐसा नहीं है ।
वो इस समय नास्तिक है भगवान को गाली दे रहा है , कमजोर को सता रहा है , जीव हत्या कर रहा है, गलत कर्म कर रहा है तो उसके पिछले किए पुण्य का तेजी से क्षय भी हो रहा है , प्रारब्ध कमजोर होते जा रहा है उसका । जब तक उसके पुण्य का पुरी तरह क्षय नहीं हो जाता उसको मिलता रहता है । जैसे हीं पिछला बैंक बैलेंस खत्म हो जाएगा । उसको भिखारी बनना होगा ।
आज तो रोज देखते हैं हमलोग । कल अरब पति था आज खाक पति हो गया ।
फैक्ट्री में आग लग गया भिखारी हो गया ।
बहुत बड़ा सफल व्यापारी था दशकों से , आज भिखारी बन गया । देश छोड़ कर भागना पड़ा उसे ।
वहीं दुसरे जीव का प्रारब्ध खाली है कमजोर है प्रारब्ध , पिछले जन्मो में दान पुण्य कर्म आदि नहीं किया ठीक ठीक , पर इस जन्म में वो आस्तिक दिखाई देता है किंतु आस्तिक होने का क्या अर्थ है ? केवल पुजा पाठ , मंदीर मंदीर , तिरथ विरथ आस्तिक होने का प्रमाण तो नहीं ।
उसके मन का संयोग भगवान से नहीं है । मन का अटैचमेंट भगवान से नहीं है तो वो धार्मिक प्रपंची है , आस्तिक विल्कूल नहीं ।
आस्तिक होने का मतलव है हर जगह भगवान हैं इसका फिलिंग हो । भगवान हमारे ह्रदय में बैठ कर हमारे सभी संकल्पों को नोट करते रहते हैं , यह हर समय याद रहे । कोई गलत बात न सोचें और न करें । छल प्रपंच कपट ईर्ष्या द्वेष सब कर रहे और साथ साथ पुजा पाठ , कर्मकांड , तिरथ विरथ , उपवास , जप करने से या भगवा चोला पहनने से , कंठी माला धारण करने से , शास्त्रों के अर्थ के नाम पर अनर्थ फैलाने से , मिथ्या भाषण करने से क्या कोई आस्तिक हो जाता है ? महापुरूष नहीं है , भक्त नहीं है पर महापुरुष या भक्ति का दिखावा करना , यह सब आध्यात्मिक प्रपंच है धार्मिक प्रपंच है , और धार्मिक प्रपंच तो और भी हानिकारक माना गया है भगवान और गुरू के यहां । धार्मिक प्रपंच का तो क्षमा भी नहीं है ।
:- पुज्यनियां मां के उत्तर से ।
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