Friday, 27 October 2023

लोक व्यवहार की कला

श्री महाराज जी द्वारा दिए गए लोक व्यवहार की कला पर प्रवचन का सार , अंश :- 
संसार में सब के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं चल सकता, सबके साथ हर समय विनम्रता दीनता नम्रता सहिष्णुता का व्यवहार करने वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता, संसार में बाहर से काम का , क्रोध का ,‌ लोभ का, मोह का व्यवहार करो, एक्टींग करो जहां जरूरत हो वहां,‌ लेकिन यह ध्यान रहे कि भीतर गड़बड़ न होने पावे किसी के प्रति, भीतर से ,‌ह्रदय के अंदर से किसी के प्रति दुर्भावना नहीं होने पावे , भीतर हमेशा याद रहे कि सबमें हमारे ईष्ट बैठे हैं , हमारे श्याम सुंदर बैठे हैं , राक्षसों में भी , दुष्टों में भी । 

अर्जुन ने, हनुमान जी ने लाखों मर्डर किए पर भीतर गड़बड़ नहीं था इसलिए भगवान ने उनके इस कर्म को नोट नहीं किया । 
संसार में सबके साथ हर किसी से दीनता का नम्रता का व्यवहार कोई करेगा तो दुष्ट लोग उसे जीने नहीं देगा । 
कोई तुमसे गलत बात कर रहा है, तो हट जाओ , उठ के चले जाओ वहां से । फिर भी वो न माने तो 
डांट दो उसको, झिड़क दो उसे । 
पर भीतर से दुर्भावना नहीं होने पावे किसी के प्रति यह ध्यान रहे । 
अरे रात दिन आप लोग रोज ऐसा व्यवहार करते हैं संसार में । 
आपका बेटा बेटी पढ़ाई नहीं कर रहा है , आप समझाते हैं पहले , फिर भी बदमाशी किया तो , लगाऊं क्या दो थाप , ऐसा बोलते हैं । फिर भी नहीं माना तो आप दो थप्पड़ लगा भी देते हैं , पर भीतर से उसके कल्याण कि हीं भावना होती है आपमें , ठीक वैसे हीं दुसरे के साथ भी व्यवहार करना है । कोई गलत बोल रहा है , पहले समझा दो उसको , नहीं समझा , हट जाओ वहां से , फिर भी नहीं समझा, परेशान किया , डांट दो उसको । 
अब आपके घर में कोई आता है, गलत बात करता है बोल दो उसको हाथ जोड़ कर ,‌वो हं हं हं आप यहां से चले जाईए , आपके यहां अब और रहने से यहां का माहौल खड़ाब होगा इसलिए आप कृप्या चले जाइए । ' गेट आऊट" ऐसा नहीं बोलो । 
तो संसार में काम का , क्रोध का , लोभ का एक्टिंग करना पड़ेगा । सबके साथ एक जैसा व्यवहार सही नहीं । 

 अपने गुरू के प्रति पुर्ण शरणागति का व्यवहार , अति दीनता का भाव प्रगट करो , प्रेम का भाव उत्पन्न करो आंसुओं के साथ । साधु जनों के साथ दीनता का व्यवहार, सम्मान का व्यवहार , विनम्रता का व्यवहार करो । अपने से उम्र में बड़े तथा विद्वान लोगों के साथ, सज्जनों के साथ नम्रता का व्यवहार , बच्चों या उम्र में छोटे के साथ स्नेह का व्यवहार , माता पिता आदि संबंधियों तथा शिक्षकों के साथ विनम्रता का, सहिष्णुता का व्यवहार, सम्मान का व्यवहार । गरीबों के प्रति , कमजोर के प्रति , लाचार के प्रति दया का व्यवहार , बीमारों के प्रति सहानुभूति तथा सेवा का व्यवहार । 

दुर्जनो के साथ,‌ दुष्ट लोगों के साथ कठोरता का व्यवहार । गलत लोगो के साथ उदासीनता का व्यवहार करना होगा । वर्ना सबके साथ एक जैसा व्यवहार करोगे संसार में तो लोग जीने नहीं देगा । संसार में बड़े बड़े ठग बैठे हैं । माथ मुड़ा के , टीका लगा के गेडूआ वस्त्र पहन साधु के भेष में डकैत भी घुमते है संसार में । संसार में आंख मुंद कर हर किसी पर विश्वास करना ठीक नहीं । गेडूआ वस्त्र पहनने वाला टीका चंदन लगाने वाला कंठी माला धारण करने वाला हर कोई साधु संन्यासी नहीं है , ठग भी घूमते है संसार में इन भेष भुषाओं में । इसलिए हर समय सावधान रहना आवश्यक है ।  
:- लोक व्यवहार कि कला से

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