Sunday, 31 January 2021

इन्हीं संतों के कृपा से हमारा देश और हमारा संस्कार‌ और संस्कृति जीवित है अमीट है ।

इन्हीं संतों के कृपा से हमारा देश और हमारा संस्कार‌ और संस्कृति जीवित है अमीट है । 
और ऐसें हीं संतों के कृपावल से , हमारे देश का अस्तित्व अमीट है । हम इन सबका ह्रदय से सम्मान करतें हैं । और अपने भावी पीढ़ी को शिक्षा देतें हैं कि हमेशा संतों का सम्मान करना , चाहे दुनिया कुछ भी कहे । किसी में दुर्भावना मत करना । 
इनके चरण रज को अपने मस्तक पर लगाना । 
जो एक वार भी ह्रदय से राधा नाम लेता है । हम उनके सेवक हैं । हमें अपने संतों पर नाज हैं । हम अपने सदगुरू देव कृपालु महाप्रभु का भक्त हैं‌। और उनकी हर आज्ञा हमारे लिए सिरोधार्य है । हम उनके संतों का अति सम्मान करतें हैं , उनके भक्तो का सेबक हैं । उनके जनों का दास हैं । यह हमारी भारतीए संस्कृति हैं । वैदिक संस्कृति और वैदिक आज्ञा का पालन करना हमारा आत्मीक कर्तव्य है । 
सियाराम मय सब जग जानी 
करहु़ं प्रणाम जोरी जुग पाणी ।।

अगर हम किसी संसारी के अपने प्रति या किसी भी दुसरे जीव के प्रति रूखे व्यवहार का विरोध करें , तो वो भी शालीनता से , संयमित और मर्यादित भाषा का प्रयोग से , सहजता , दीनता , सहिष्णुता पहले हमें खुद अपनाने के लिए हमारे गुरूदेव ने कहा हैं । 

राष्ट्र के नागरिक होने का फर्ज कैसे पुरा किया जाता है । यह भी हमारे गुरू देव ने मिशाल पेश किए हैं और अब दीदी लोग और मां कर रहीं हैं तिरंगा लहराकर और उसी सेवा को और आगे बढ़ा कर । केदार नाथ , कोशी बाढ़ पीड़ितों कि सहायता करना , तीन तीन होस्पिटल गरीबों के लिए, नी:शूल्क स्कूल , कौलेज आदि का निर्माण और संचालन उनके जन सेवा का परिचायक है , गौशाला आदि मिशाल तो है हिं परन्तु सबसे बड़ी सेवा है उनकी हम सभी को भगवद् संबंधी ज्ञान का दान करके हमारा परम कल्याण करना । 

देश का सम्मान , देश के शहिदों का सम्मान , और देश के प्रति हमारे फर्ज निर्वहन , निरीह जीवों के लिए , साधु संतों के लिए , गरीवों की सेवा के लिए हमारे कृपालु महाप्रभु का योगदान समुचे भारत के बुद्धिजीवियों के लिए मिशाल हैं ।
प्रेम मंदीर , प्रेम भवन , कीर्ति मंदीर , भक्ति मंदीर , भक्ति भवन आदि उनका देन है हमें प्रेरणा देने के लिए कि हरि गुरू की सेवा और उन्हीं से प्रेम करना हमारा अंतिम और सर्वोपरि लक्ष्य है।

श्री महाराज जी ने यह सब करके विश्व सेवक होने का एहसास हमें कराया है ठीक श्री कृष्ण की तरह । 
यह श्री कृष्ण के सीवा और कोई नहीं कर सकता , ममता की अपार समुद्र श्री महाराज जी में ऐसे हैं जैसे साक्षात राधारानी की करूणा बरसती है । वहीं गुण उन्होंने तीनों दिदियों और पुज्यनियां हमारी मां रासेस्वरी देवी जी को दिए हैं ।
हमने ऐसा गुरू पाया है । कि जो जीव उनको अपने ह्रदय में सच्ची निष्ठा से जैसे हीं धारण करना शुरू करता हैं , ह्रदय भगवद् प्रेम से भर कर अंखियां हरि दर्शन के लिए तरप उठती है । यही उनकी कृपा है , कृपा हो गयी , अब पाना क्या शेष है !
श्री राधे ।

एक प्रेरक प्रसंग हमारे देश के युवा से ( Must read):-आप बन्दर मत बनिए: -संजीव

एक प्रेरक प्रसंग हमारे देश के युवा से ( Must read):-
आप बन्दर मत बनिए

एक बार कुछ वैज्ञानिकों (scientists) ने एक बड़ा ही रोचक प्रयोग (interesting experiment) किया। उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से पिंजरे (cage) में बंद कर दिया और बीचों-बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे। जैसा की उम्मीद थी, जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ पड़ा। पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं, उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी। इससे वह घबरा गया और उसे उतर कर भागना पड़ा। 

पर प्रयोग (experimenters) यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया। बेचारे बन्दर हक्के-बक्के एक कोने में दुबक कर बैठ गए।

पर वे कब तक बैठे रहते? कुछ समय बाद एक दूसरे बन्दर को केले खाने का मन किया। वह भी उछलता-कूदता सीढ़ी की तरफ दौड़ा। लेकि अभी उसने चढ़ना शुरू ही किया था कि पानी की तेज धार से उसे नीचे गिरा दिया गया। और पहले की तरह इस बार भी इस बन्दर के गुस्ताखी की सज़ा बाकी बंदरों को भी दी गयी। उन्हें एक बार फिर पानी की ठंडी धार का सामना करना पड़ा।

एक बार फिर बेचारे बन्दर सहमे हुए एक जगह बैठ गए। थोड़ी देर बाद जब तीसरा बन्दर केलों के लिए लपका तो एक अजीब वाक्य हुआ। बाकी के बन्दर उस पर टूट पड़े और उसे केले खाने से रोक दिया, ताकि एक बार फिर उन्हें ठन्डे पानी की सज़ा ना भुगतनी पड़े..

अब वैज्ञानिकों ने एक और interesting चीज़ की। उन्होंने अंदर बंद बंदरों में से एक को बाहर निकाल दिया और एक नया बन्दर अंदर डाल दिया। नया बन्दर वहां के नियम (rules) क्या जाने, केले देखते ही उसके मुंह में पानी भर आया और वह तुरंत केलों की तरफ दौड़ पड़ा। पर यह देखकर बाकी बंदर अपने आप को रोक न सके। उन्होंने मिलकर उस नये बंदर पिटाई कर दी। नये बंदर को यह समझ में नहीं आया कि आख़िर क्यों ये बन्दर ख़ुद भी केले नहीं खा रहे और उसे भी नहीं खाने दे रहे। लेकिन एक बार पिटने के बाद उस भी यह समझ में आ गया कि केले सिर्फ देखने के लिए हैं खाने के लिए नहीं।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने एक और पुराने बन्दर को निकाला और नया बंदर अंदर कर दिया। इस बार फिर वही हुआ। नया बन्दर केलों की तरफ लपका पर बाकी के बंदरों ने उसकी धुनाई कर दी और मज़ेदार बात ये है कि पिछली बार आया नया बन्दर भी धुनाई करने वालों में शामिल था, जबकि उसके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था!

प्रयोग (experiment) के अंत में सभी पुराने बन्दर बाहर जा चुके थे और नए बन्दर अंदर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था। पर उनका व्यवहार (behaviour) भी पुराने बंदरों की तरह ही था। वे भी किसी नए बन्दर को केलों को नहीं छूने देते थे।

दोस्तो, आप सोच कर देखि‍ए, क्या हमारे समाज (society) में भी यही बंदरों वाला व्यवहार (behaviour) देखने को नहीं मिलता है? जब भी कोई नया काम शुरू करने की कोशिश करता है, चाहे वो पढ़ाई, खेल, एंटरटेनमेंट, business, राजनीती, समाजसेवा या किसी और field से related हो, उसके आसपास के लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं, उसे असफलता (failure) का डर दिखाया जाता है। और मजेदार (interesting) बात ये है कि उसे रोकने वाले ज्यादातर (maximum) लोग वो होते हैं जिन्होंने ख़ुद उस क्षेत्र (field) में कभी हाथ भी नहीं आज़माया होता..

इसलिए यदि आप भी कुछ नया करने की सोच रहे हैं और आपको भी समाज या आसपास के लोगों के विरोध (opposition) का सामना (face) करना पड़ रहा है तो थोड़ा संभल कर रहिये। अपने तर्कों (logic) और क्षमताओं (guts) की ओर देखि‍ए, ख़ुद पर और अपने लक्ष्य पर विश्वास क़ायम रखिये और बढ़ते रहिये। कुछ बंदरों की ज़िद के आगे आप भी बन्दर मत बन जाइए...
:- Sanjeev Kumar , Ranchi 

Thursday, 28 January 2021

भगवान ने जवाब दिया :" संसार कीहर वस्तु तुझे मैनें हीं दी है। तेरे पास अपनीचीज सिर्फ तेरा अहंकार है, जो मैनेंनहीं दिया ।उसी को तूं मुझे अर्पण कर दे।

एक बार एक मेहमान किसी के घर
गया। वह अंदर
गया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। 
वह खाली हाथ
आया था तो उसने सोचा कि कुछ
उपहार देना अच्छा रहेगा।
तो
उसने वहा उसके घर में से टंगी एक पेन्टिंग उतारी
और जब घर का मालिक
आया, उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै
आपके लिए
लाया हुँ। घर का मालिक, जिसे पता
था कि यह मेरी चीज
मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया !!!!!
अब आप ही बताएं कि क्या वह भेंट
पा कर, जो कि पहले
से ही उसका है, उस आदमी को खुश
होना चाहिए ??
मेरे ख्याल से नहीं....
लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ
भी करते है। हम
उन्हे रूपया, पैसा चढाते है और हर चीज
जो उनकी ही बनाई
है, उन्हें भेंट करते हैं! लेकिन
मन मे भाव रखते है कि ये चीज मै
भगवान को दे रहा हूँ!
और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो
जाएगें। यह हमारी नादानी है !
हम यह नहीं समझते हैं कि उनको इन सब
चीजो कि जरुरत
नही। अगर हम सच मे उन्हे कुछ देना
चाहते हैं
तो हमें श्रद्धा के साथ, उन्हे अपने
हर एक श्वास मे याद
करना है , 
विश्वाश करना है हरि पर , गुरु पर , प्रभु जरुर खुश
होगें !!
किसी ने सच कहा है कि -

अजब हैरान हूँ भगवन
तुझे कैसे रिझाऊं मैं;
कोई वस्तु नहीं ऐसी
जिसे तुझ पर चढाऊं मैं ।

भगवान ने जवाब दिया :" संसार की
हर वस्तु तुझे मैनें हीं दी है। तेरे पास अपनी
चीज सिर्फ तेरा अहंकार है, जो मैनें
नहीं दिया ।
उसी को तूं मुझे अर्पण कर दे। अपने गुरु की हर बात मान , उनकी चरण- शरण में जा , तेरा
जीवन सफल हो जाएगा |

Saturday, 16 January 2021

हमारा सनातन माता पिता ।

याद रखो इस संसार में सभी का आसक्ति केवल धन से है , धन के बिना मां वाप भी नहीं पुछेगा एक समय एक बेटा आवारा हो जाए तो ।   अगर पति काम न करके धन से बीबी को , मां वाप , पुत्र पुत्री को या बीबी पति को खुश करेगा तो ।
इस लिए सबको केवल धन से आसक्ति है , पर भ्रम बस मां बाप कमाऊ पुत्र को मेरा बेटा , मेरा बेटा और पत्नी मेरा पति और बच्चा मेरा बाप करता रहता है , मर जाने पर प्रेम के लिए नहीं रोता है कोई वल्कि इस लिए रोता है सब की अब मेरा सहारा कौन होगा , कौन करेगा हमको ।
इसलिए संसार में स्वार्थ आधारित प्रेम है । निस्वार्थ नहीं । 
और मृत्यू के कुछ दिन सब लोग अपने मां बाप दादा दादी को भुल जातें हैं । 
अगर नहीं तो देखो अपने आप में कितनी बार आप अपने पुरखे , दादा दादी को याद करते हो । कितने लोग अपने दादा दादी , को याद करता है वो आज कल के जमाने में तो बच्चा अपने मां बाप का तस्वीर भी नहीं रखता है अपने बर्तमान निवास पर । पैतृक घर पर कहीं लटका हो तस्वीर तो अलग बात है । फिर वो दादा दादी का बात हीं मत पुछो । मैने तो युथ शीविर में बहुत से बच्चों से जब पुछता हुं उसके दादा दादी का नाम तो वो बता नहीं पाता है । 
अतः केवल और केवल हमारा सबका एक ही सनातन मां वाप है राधा कृष्ण , क्या हम उनके लिए कभी रोए , उनसे प्रेम करतें हैं ?
जबकी सारा बल उन्हीं से हमें प्राप्त होता है । 
और हम गद्दार कभी उनके लिए नहीं‌ रोए । धिक्कार है हमारे मानव जीवन को ।
उनके लिए मात्र रोओ ।
वही एक हमारे माता पिता हैं सनातन । हम आत्मा है शरीर नहीं । शरीर के सारे रिश्ते हैं संसार में । पर हम शरीर नहीं । शरीर त्यागा रिस्ते समाप्त  ।
पर  हमारा सब ख्याल रखने वाला सिर्फ और सिर्फ एक जगरनाथ जी हैं । उनसे प्रेम करो , उनके प्रेम में आंसु वहाओ केवल ।
संसारी के लिए नहीं , संसारी के प्रति अपना फर्ज पुरा करो इमानदारी से ।
किसी के धन संपत्ति का नूकसान ना करो ,‌किसी से रंग द्वेष मत करो , झूठ मत बोलो , नही तो अगले जनम में उसका नौकर बन कर चूकाना होगा । कम पैसे मिलेंगें , काम ज्यादा लेगा मालिक , चूकाना परेगा हीं । नहीं बच पाओगे ।
भगवान का संविधान हैं । उससे कोई नहीं बचेगा  और ना बचा है । 
इसलिए संसार के लिए अपना फर्ज निष्ठा के साथ पुरा करो और आसक्ति , प्रेम , केवल जगरनाथ जी से रखो । जगन्नाथ जी हीं राधा कृष्ण हैं । वहीं राम और सिता है । कोई अंतर नहीं । वे हीं हमारा असली  मां बाप है । 
श्री राधे । :- पुज्यनियां मां राजेश्वरी देवी ।

Thursday, 7 January 2021

हमारा प्यारा प्रेम मंदिर , वृंदावन , हमारे प्यारे श्री कृपालु महाप्रभु जी का देश ।

प्रेम मंदिर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृंदावन में स्थित है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया गया है।[2] प्रेम मन्दिर का लोकार्पण १७ फरवरी को किया गया था। इस मन्दिर के निर्माण में ११ वर्ष का समय और लगभग १०० करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। इसमें इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इसे राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने तैयार किया है। इस मन्दिर का शिलान्यास १४ जनवरी २००१ को कृपालुजी महाराज द्वारा किया गया था।[3] ग्यारह वर्ष के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मन्दिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है।[2] मन्दिर दिल्ली – आगरा – कोलकाता के राष्ट्रीय राजमार्ग २ पर छटीकरा से लगभग ३ किलोमीटर दूर वृंदावन की ओर भक्तिवेदान्त स्वामी मार्ग पर स्थित है। यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का एक नमूना है। सम्पूर्ण मन्दिर ५४ एकड़ में बना है तथा इसकी ऊँचाई १२५ फुट, लम्बाई १२२ फुट तथा चौड़ाई ११५ फुट है।[3] इसमें फव्वारे, राधा-कृष्ण की मनोहर झाँकियाँ, श्री गोवर्धन लीला, कालिया नाग दमन लीला, झूलन लीला की झाँकियाँ उद्यानों के बीच सजायी गयी है। यह मन्दिर वास्तुकला के माध्यम से दिव्य प्रेम को साकार करता है। सभी वर्ण, जाति, देश के लोगों के लिये खुले मन्दिर के लिए द्वार सभी दिशाओं में खुलते है। मुख्य प्रवेश द्वारों पर आठ मयूरों के नक्काशीदार तोरण हैं तथा पूरे मन्दिर की बाहरी दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं को शिल्पांकित किया गया है। इसी प्रकार मन्दिर की भीतरी दीवारों पर राधाकृष्ण और कृपालुजी महाराज की विविध झाँकियों का भी अंकन हुआ है। मन्दिर में कुल 94 स्तम्भ हैं जो राधा-कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से सजाये गये हैं। अधिकांश स्तम्भों पर गोपियों की मूर्तियाँ अंकित हैं, जो सजीव जान पड़ती है। मन्दिर के गर्भगृह के बाहर और अन्दर प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की उत्कृष्ट पच्चीकारी और नक्काशी की गयी है तथा संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविन्द गीत सरल भाषा में लिखे गये हैं। मंदिर परिसर में गोवर्धन पर्वत की सजीव झाँकी बनायी गयी है।

ये याद रखिये की भारत में सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं। इसका परमानेंट समाधान ।

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ये याद रखिये की भारत में सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं। इसका परमानेंट समाधान ।
आप खुद अपने ही घर मैं ऐसे बहुत से लोगो को जानते होंगे जिनका वजन व कोलस्ट्रोल बढ़ा हुआ हे।
अमेरिका की कईं बड़ी बड़ी कंपनिया भारत मैं दिल के रोगियों (heart patients) को अरबों की दवाई बेच रही हैं !
लेकिन अगर आपको कोई तकलीफ हुई तो डॉक्टर कहेगा angioplasty (एन्जीओप्लास्टी) करवाओ।
इस ऑपरेशन मे डॉक्टर दिल की नली में एक spring डालते हैं जिसे stent कहते हैं।
यह stent अमेरिका में बनता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डॉलर (रू.150-180) है।
इसी stent को भारत मे लाकर 3-5 लाख रूपए मे बेचा जाता है व आपको लूटा जाता है। 
डॉक्टरों को लाखों रूपए का commission मिलता है इसलिए व आपसे बार बार कहता है कि angioplasty करवाओ।
Cholestrol, BP ya heart attack आने की मुख्य वजह है, Angioplasty ऑपरेशन।
यह कभी किसी का सफल नहीं होता।
क्यूँकी डॉक्टर, जो spring दिल की नली मे डालता है वह बिलकुल pen की spring की तरह होती है।
कुछ ही महीनो में उस spring की दोनों साइडों पर आगे व पीछे blockage (cholestrol व fat) जमा होना शुरू हो जाता है। 
इसके बाद फिर आता है दूसरा heart attack ( हार्ट अटैक )
डॉक्टर कहता हें फिर से angioplasty करवाओ।
आपके लाखो रूपए लुटता है और आपकी जिंदगी इसी में निकल जाती हैं।
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               अब पढ़िए 
       उसका आयुर्वेदिक इलाज
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अदरक (ginger juice) - 
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यह खून को पतला करता है।
यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।
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लहसुन (garlic juice) 
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इसमें मौजूद allicin तत्व cholesterol व BP को कम करता है।
वह हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।
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नींबू (lemon juice) 
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इसमें मौजूद antioxidants, vitamin C व potassium खून को साफ़ करते हैं।
ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाते हैं।
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एप्पल साइडर सिरका ( apple cider vinegar) 
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इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।
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         इन देशी दवाओं को 
       इस तरह उपयोग में लेवें 
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1-एक कप नींबू का रस लें;
2-एक कप अदरक का रस लें;  
3-एक कप लहसुन का रस लें; 
4-एक कप एप्पल का सिरका लें; 
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चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें;
अब आप 
उसमें 3 कप शहद मिला लें
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रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें जिससे
सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।
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और नहीं तो वेस्टिज का फ्लेक्स ओयल सुबह शाम एक एक गोली ले , आपकी सारी समस्या दूर हो जाएगी । यह दवा नहीं एक स्पलिमेंट है, मैं और मेरी पत्नी इसका सेवन करते हैं  । :- संजीव ।

परिवर्तन एवं रुपांतरण( change and transformation )

परिवर्तन एवं रुपांतरण( change and transformation ) 
आज समुचे संसार की शिक्षा का फोकस परिवर्तन के उपर है , सैद्धान्तिक शिक्षा के द्वारा बैचारिक परिवर्तन ! शिक्षकों का फोकस संसारिक शिक्षा के द्वारा स्टुडेण्ट का बैचारिक परिवर्तन कराना है । उँचे उँचे , बड़े बड़े कौलेजों, युनिभरसिटियों में परिवर्तन के उपर ध्यान दिया जाता है । यही कारण है फेल्योर का । परिवर्तन कभी स्थाई नही हो सकती । कारगर नही हो सकती !
आप खुद देखिय आप प्रण करते हैं , संकल्प करते हैं कि मै आज से झुठ नही बोलुंगा , क्रोध नही करुँगा आदि आदि पर यह कितने दिन चलता है । दो दिन , तीन दिन चार दिन या बैचारिक परिवर्तन के फलस्वरुप कुछ और दिन , पर जैसे हीं बाहरी परिस्थिति बदलती है , आपके सामने प्रतिकूल परिस्थिति आता है आपका प्रण , संकल्प समाप्त हो जाता है और आप क्रोध कर लेतें हैं , झुठ बोल लेते हैं । 
तो फिर क्यों हुआ ऐसा । ऐसा इसलिए हुआ की ज्ञान के परिणाम स्वरुप आपका केवल बैचारिक परिवर्तन हुआ है , आन्तरिक रुप से आप वही है जो पहले थे । 

लेकिन एक व्यक्ति का जब वास्तविक समर्थ सद्गुरु , संत व महापुरुष के संगति के फलस्वरुप , मेडिटेशन के फलस्वरुप जब रुपांतरित हो जाता है तो वह व्यक्ति हमेशा के लिए बदल जाता है , उसका रुपांतरण (Transformation ) हो जाता है ।

इसलिए ट्रांसफौर्मेशन स्थाई है । चेंज (परिवर्तन )कभी स्थाई नही हो सकता । 
ट्रांसफौर्मेशन केवल वास्तविक संत व महापुरुष के संसर्ग से ही संभव है । 
जैसे डाकु रत्नाकर का नारद जैसे संत के प्रभाव से ट्रांसफौर्मेशन हो गया और एक डाकु "रत्नाकर" महान संत - वाल्मिकि बन गया । 

इस लिए एक डाकु रत्नाकर संत कृपा से वाल्मिकि बन सकता है परंतु वाल्मिकि कभी फिर डाकु नही बन सकता , क्योकि उसका काया पलट हो गया , रुपांतरण हो गया , ट्रांसफौर्मेशन हो गया ।

दुसरा उदाहरण : एक कैटरपिलर वटरफ्लाई बन जाता है । पर एक वटरफ्लाई फिर कभी कैटरपिलर नही बन सकता ।
इसलिए ट्रांसफौर्मेशन जरुरी है , परिवर्तन नही । 
और ट्रांसफौर्मेशन के लिए वास्तविक समर्थ हमारे श्री कृपालु महाराज जी जैसे संत की आवश्यकता है । और महाराज जी ने जो मेडिटेशन बताई है वो परम आवस्यक है करना । नही तो केवल बैचारिक स्तर पर परिवर्तन होगा जिससे कोई लाभ नही है । इसलिए इस युथ शीविर  ( पौजिटीभ एवेयरनेश कैंप) का फोकस आप लोगों के ट्रांसफौर्मेशन पर है जिसका लाभ संसार और आध्यात्म दोनो जगत मे आपको मिलेगा ।
:- संजीव , उड़िसा , टांगी जनवरी 2018