Wednesday, 24 January 2024

इस कलयुग के दुष्प्रभाव से बचने का एक मात्र उपाय है ,

इस कलयुग के दुष्प्रभाव से बचने का एक मात्र उपाय है , श्री कृपालु महाप्रभु जी को पुरे मनोयोग से अपना गुरू मान कर उनके सत्संग के द्वारा तत्वज्ञान हासिल करके उनके सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए जीवन जीना तथा अपने मानव जीवन को सफल बनाकर अपने लक्ष्य को हासिल करना । इस कलयुग का दुसरा कोई दवा नहीं है ।

जब परीक्षित सरिखे राजा के मस्तिष्क में छल से कलयुग घुस गया और उनके विवेक को‌ हर लिया और उनके द्वारा ऐसा नामापराध करवा दिया की उनको भी अपने उद्धार के लिये श्री शुकदेव जी से तत्वज्ञान प्राप्त करना परा , तो हम पतित जीवों की हैसियत हीं क्या है भला ? हमें यह बहुत गहराई से सोचना चाहिए ।

हम जीवों पर तो कलयुग इस तरह हावी है कि आज अच्छा क्या है और बुरा क्या है इसकी पहचान तक नही हमें चाहे हम कितना भी बड़ा किताबी पंडित हों ।

आज इस कलिकाल में हरेक मनुष्य चाहे वो किसी भी धर्म संप्रदाय या मजहब से क्यों न हो, स्वयं को महान पंडित समझने वाले ( वास्तविक संतों को छोड़ कर ) अंदर से खूद अशांत है, बैचैन है, दुखी हैं, अतृप्त हैं किंतु दुसरे को जीवन का सार और धर्म कर्म समझा रहे हैं । भला ऐसे लोगों से क्या मिलने वाला है ?

वेचारे इन स्वघोषित पंडितों, तथाकथित गली गली के वैज्ञानिको, बड़े बड़े किताबी ज्ञान के पंडितों आदि के दिमाग पर कलिकाल का ऐसा असर आज देखने को मिल रहा है कि वो क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हैं , उस पर खुद हीं उनको भरोसा नहीं है और ये लोग भ्रम को ही यथार्थ समझने की भुल करके अपना तो विनाश कर हीं रहे हैं बेचारे अपने चेले चपाटियों के जीवन का भी सर्वनाश करने पर तुले हुए हैं ।

ये कलयुग इतना शक्तिशाली है कि जब वो अपने शुरुआत में ही राजा परिक्षित सरिखे व्यक्ति को गुमराह करके उनसे पाप करा सकता है जो अपनी मां उत्तरा के गर्भ में ही भगवद् दर्शन कर लिया था तो हमलोगों और इन स्वघोषित विद्वानों की विशात ही क्या है भला ? 

इसलिए अब भी समय है आ जाईए इस युग के सबसे बड़े परमाचार्य पंचम मूल जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी के शरण में जो शुकदेव सरिखे महान महान परमहंसों द्वारा भी पुजित तथा सेवित है , उनसे तत्वज्ञान प्राप्त करके अपना तथा अपने शिष्यों का कल्याण करके सदा के लिय आनंदमय हो जाईए ।
नहीं तो यह कलयुग तो बैठा ही है हम सबके मस्तिष्क में अपना प्रभाव डालने के लिए और उसका प्रभाव तो दिखाई हीं दे रहा है हमसब पर कि हम आज स्वयं को समझने में हीं जब असमर्थ हैं तो दुसरे के बुद्धि को आप और हम कैसे समझ सकते हैं भला की यह हमें किस ओर ले जा रहा है ? 

नहीं तो गलत सलत पुजा पाठ , कर्म कांड और झूठ बोलना स्वयं को सही समझना और पाप का भागी बनना हीं नियती बना रहेगा इस कलियुग के प्रभाव के कारण । 
श्री राधे :- संजीव ।।🙏❤️🙏

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