मिटा कर कामना संसार की जो सजदा करें सरकार की,
न हो जन्नत की तमन्ना, न ऐश्वर्य सुख सम्राट की ,
न चाहत हो कर्मकांड की, न मुक्ति की,न भुक्ति की,
बिठाके हृदय में सियाराम को जो सेवा करें सरकार की,
मिल जाती है उसे हर खुशियां गोलोक की, दोनों जहान की ।।
लाखों जन्म कोई यदि तप करें, कोई यज्ञ या तिरथ करे ,
नहीं मिलती उसे भक्ति कभी प्रभु राम की या राधाकृष्ण की,
न हो ज्ञान की कोई कामना, न योग की, ना मंत्र जाप की
ना लोभ हो संसार की, न हो मोह माया लोक की ,
मिलते उसे भगवान है जो शरणागति करें रसिक सरदार की,
वहीं पाया उन्हें जो अनन्य निरंतर गाय गुण गोपाल की,
न हो कामना संसार की, न मुक्ति की, ना हीं भुक्ति की,
कामना बस एक हो, सेवा मिले सरकार की,
दर्शन मिले,भक्ति मिले, मिले निवास गोलोक की,
मिलते उसे भगवान है जो शरणागति करें कृपालु सरकार की ।।
:- श्री गुरूदेव के प्रेरणा से मेरे द्वारा रचित भक्ति गीत , संजीव कुमार ।।
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