Friday, 5 January 2024

भगवान शंकर क्यों नहीं गए रावण की मायानगरी श्री लंका ?

भगवान शंकर क्यों नहीं गए रावण की मायानगरी श्री लंका ? 
उत्तर :- मायिक बिषय बस्तु और मायाबद्ध जीव के साथ राग या द्वेष से दूषित अंत:करण वाले जीव के मन को मनमोहन मोहित नहीं करते कभी, वो केवल सरल तथा निर्मल मन जन से प्रेम करते हैं, उनको अपना बनाना है तो हमें अपने मन को, चित्त को शुद्ध करना हीं होगा,

यह बात गांठ बांधने कि है कि जिस तरह एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकती उसी प्रकार जिस ह्रदय में मायिक बिषय बस्तु और मायाबद्ध जीव हो वहां श्रीराधाकृष्ण नहीं ठहर सकते हैं कभी, दोनों विरोधी तत्व है ।
जहां दासी माया होगी वहां श्री कृष्ण नहीं रहते । या तो हम उनके दासी माया से प्यार करें या माया को त्याग कर उनसे प्यार करें । दोनों एक साथ एक ह्रदय मन में नहीं ठीक सकते कभी । असंभव । 
कोई यह भी सोचे कि श्री राधाकृष्ण न रहेंगे तो हम तो दुर्गा , काली ,‌शंकर जी गणेश जी , विष्णु जी , लक्ष्मी जी , हनुमान जी को, ब्रह्मा जी सरस्वती जी को अपने ह्रदय में रख लेंगे , उनकी भक्ति कर लेगें । 

न न न यह भी असंभव है । जिस ह्रदय में भगवान की दासी माया हो वहां कोई भी माया से परे तत्व नहीं टिक सकते कभी । 
सब श्री राधाकृष्ण के नित्य तथा नीज परिकर है , उनके हीं स्वरूप शक्ति है । उनके सजातिय भेद शून्य तत्व है । 
इसलिए ये सभी भगवान श्री कृष्ण के बिजातिय भेदाभेद तत्व माया के साथ साथ नहीं टिक सकते । अरे टिकना तो दुर की बात ,‌ आ हीं नहीं सकते ।

उदाहरण रावण जैसा महान कर्मकांडी , महान जपी तपी पुजा पाठी भगवान शंकर को प्रसन्न कर लिया और वरदान के रूप में मांगा कि आप हमारे महल श्री लंका में रहें ।
भगवान ऐसा बनाव बना दिए कि रावण को लघुशंका लग गया , वरूण देव घुस गया रावण के अंदर । और वो बैद्यनाथ जी में ही ठहर गए । वो नहीं गए माया की नगरी श्री लंका । 
तो जहां श्री राधाकृष्ण नहीं जाएंगे वहां कोई भी भगवान नहीं जा सकते हैं । भ्रम में न रहे । यह अकाट्य सत्य है । श्री राधे । 
 :- श्री महाराज जी के सिद्धांतों से सिद्ध है ।

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