विश्वास और श्रद्धा को दृढ़ करने का आधार है तत्वज्ञान,
हम लोग इट और कंक्रीट का घर बनाते हैं । तो हम सभी लोग क्या करते हैं छत ढालते समय ? तो सबसे पहले निचे से बांस बल्ला आदि लगा कर सेंट्रीग तैयार करते हैं छत ढालने से पहले , मजबुत सेंट्रींग होना चाहिए जो छत ढालने में कंक्रीट व छड़ के भार को ठीक तरह से संभाल कर उसको नीचे धंसने नहीं दे ।
अब "इक्कीस दिन" बाद जब सिमेंट और क्रंक्रीट का छत मजबुत हो जाता है तब क्या करते हैं । चेक करते हैं कि अब छत इतना मजबुत हो गया है कि वो दुसरे महले का भार भी उठा लेगा या नहीं । तब जाकर उस ढले छत के नीचे बाला बल्ला जो अपने आप ढीला हो जाता है उसको हटा देते है और सेंट्रींग भी निकाल देते हैं ।
क्योंकि अब छत को सहारे का जरूरत नहीं ।
ठीक उसी प्रकार भगवान और गुरू पर दृढ़ विस्वास रूपी छत को पक्का करने के लिए , मजबुत करने के लिए तत्वज्ञान रूपी बांस बल्ले और सेंट्रींग की बहुत आवश्यकता है ।
जब गुरू और भगवान पर श्रद्धा और विश्वास रूपी छत जम जाए , मजबुत हो जाती है तब ज्ञान रूपी बांस बल्ले और सेंट्रींग की जरूरत नहीं होती ।
तक वो कंक्रीट रूपी दृढ़ विश्वास, श्रद्धा रूपी सिमेंट के साथ इतना मजबूत हो जाता है कि उसको अब ज्ञान रूपी बांस और सेंट्रींग रूपी पुस्तकों का जरूरत नहीं परती ।
तब मजबुत छत पर प्रेम रस अनुभव होने लगता है थोड़ा थोड़ा , फिर प्रेम रूपी अनेक महला खड़ा होने में देर नहीं लगता । श्री राधे । 🙏❤️🙏 आपका संजीव कुमार रांची ।( मेरे ब्लौग से )
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