Sunday, 27 June 2021

विश्वास और श्रद्धा को दृढ़ करने का आधार है तत्वज्ञान,

विश्वास और श्रद्धा को दृढ़ करने का आधार है तत्वज्ञान, 
हम लोग इट और कंक्रीट का घर बनाते हैं । तो हम सभी लोग क्या करते हैं छत ढालते समय ? तो सबसे पहले निचे से बांस बल्ला आदि लगा कर सेंट्रीग तैयार करते हैं छत ढालने से पहले , मजबुत सेंट्रींग होना चाहिए जो छत ढालने में कंक्रीट व छड़ के भार को ठीक तरह से संभाल कर उसको नीचे धंसने नहीं दे ।
अब "इक्कीस दिन" बाद जब सिमेंट और क्रंक्रीट का छत मजबुत हो जाता है तब क्या करते हैं । चेक करते हैं कि अब छत इतना मजबुत हो गया है कि वो दुसरे महले का भार भी उठा लेगा या नहीं । तब जाकर उस ढले छत के नीचे बाला बल्ला जो अपने आप ढीला हो जाता है उसको हटा देते है और सेंट्रींग भी निकाल देते हैं । 
क्योंकि अब छत को सहारे का जरूरत नहीं ।

ठीक उसी प्रकार भगवान और गुरू पर दृढ़ विस्वास रूपी छत को पक्का करने के लिए , मजबुत करने के लिए तत्वज्ञान रूपी बांस बल्ले और सेंट्रींग की बहुत आवश्यकता है । 
जब गुरू और भगवान पर श्रद्धा और विश्वास रूपी छत जम जाए , मजबुत हो जाती है तब ज्ञान रूपी बांस बल्ले और सेंट्रींग की जरूरत नहीं होती ।
तक वो कंक्रीट रूपी दृढ़ विश्वास, ‌‌श्रद्धा रूपी सिमेंट के साथ इतना मजबूत हो जाता है कि उसको अब ज्ञान रूपी बांस और सेंट्रींग रूपी पुस्तकों का जरूरत नहीं परती । 
तब मजबुत छत पर प्रेम रस अनुभव होने लगता है थोड़ा थोड़ा , फिर प्रेम रूपी अनेक महला खड़ा होने में देर नहीं लगता । श्री राधे । 🙏❤️🙏 आपका संजीव कुमार रांची ।( मेरे ब्लौग से )

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