Saturday, 5 June 2021

माया के तीन गुणों के अधीन जीव, चाहे वो संसार में आज बड़ा नाम बाला क्यूं ना हो , वो क्या भगवान का वास्तविक संत का महापुरुषों का गुण गान करेगा भला !

माया के तीन गुणों के अधीन जीव, चाहे वो संसार में आज बड़ा नाम बाला क्यूं ना हो , वो क्या भगवान का वास्तविक संत का महापुरुषों का गुण गान करेगा भला ! अरे लोक व्यवहार के नाते दो सुंदर संसारिक शब्द बोल देगा वो भी बिना भाव के , और उसके ह्रदय में क्या है आप हम कैसे जानेगे ? अंतर्यामी तो है नहीं हम आप ?? वो बोलने बाला अभी मायाधिन है हमारे आपके तरह, न उसका पंचकोस भष्म हुआ ना त्रिगुण से मुक्त हुआ , ना उसका पंचक्लेश गया और ना उसको भगवान मिले । 

त्रिताप में जलता हुआ उस आदमी पर सतोगुण हावी है तो भगवान के बारे में हमारे व आपके गुरू के बारे में अच्छा बोल देगा , वो भी लोकव्यवहार , लोकलाज और अपने न्यस्त स्वार्थ के लिए , स्वलाभ हेतु कि लोग मुझे भी अच्छा समझे ।

 वही जीव जब रजोगुण से युक्त होगा जिस समय तो वो राजा का बड़ाई करेगा , प्रधानमंत्री , संतरी का गुण गाएगा । समाज में उसको रहना है , सत्ता से हित साधना है । दुनिया दारी है बुद्धिमानी है , उसके हित में हैं ।

और जब वही तमोगुण के प्रभाव में आया तो भगवान को असली संतों को भी नहीं छोड़ेगा , उल्टा पुल्टा उसी अपने स्टेज से बोलने लगेगा । कल हमारे आपके गुरू को अच्छा बोला , उसका दो चार हजार फोलोवर जैसे हीं वहां से खिसका , ऐसा लगा उसको , वो वास्तविक संतों के खिलाफ , भगवान के खिलाप बोलने लगेगा।
खुब होता है दुनियां में आजकल ।
और बहुत से बहुत अनुकूल भी बोलेगा तो क्या बोलेगा । हां हां वो बड़े ज्ञानि है , बड़े बुद्धिमान हैं बड़ा भक्त हैं रसिक सिरोमणी हैं , उनके जैसा मेमोरी किसी का नहीं आदि आदि । यही दो चार गढ़ा हुआ शब्द बोल देगा और क्या बोल सकता है वो ।

भगवान का उनके जन का कोई संसारी जीव भला संसारिक शब्दो में हीं तो गुणगान करेगा । वो भी अंदर क्या है उसके यह तो भगवान और असली संत हीं जान सकता है । हम आप भोले लोग तो नहीं जान सकते ।
अब जो असली शिष्य है उसकी श्रद्धा , विश्वास किसी के कहने और सुनने के आधार पर नहीं है अपने गुरू के प्रति । असली शिष्यों को इन सब बातों से कोई मतलव नहीं कि कौन क्या कहता है उसके गुरू के बारे मे ।
उसकी अपनी निष्ठा , श्रद्धा ,विश्वास इतना प्रबल होता है कि कोई कुछ भी बोले (अच्छा बोले या बुरा बोले ) कोई फर्क नहीं पड़ता है ।
वो संसार बालों के लिए है , कमजोर शिष्य के लिए है कि वो फलाना बाबा हमारे गुरू के लिए ऐसा इतना बढ़िया बातें की अब वो उसके इस बात को सबसे कहता फिरता है कि फलाना बाबा बड़ा अच्छा है वो मेरे गुरूदेव के लिए बहुत अच्छा बोला है अच्छा कहा है , वो बाबा बड़ा अच्छा बाबा है ।

ये ल् लो । हम आप उस बाबा का गुण गाने लगे , उस बाबा का स्टेटमेंट घुमाने लगे चारों तरफ सब शरणागति , छोड़ वोड़ कर , कई दिन तक वो हमारे आपके ह्रदय में आ गया । उसका भी चिंतन होने लगा । उसके लिए हमारे आपके दिल में सम्मान‌ चुपचाप पैदा हो गया । 
हमारी आपकी सहानुभूति उसके साथ भी हो गई । 
तो यह सब कमजोर शिष्य का निशानी है । वो शिष्य है भी नहीं दरअसल जिसका विश्वास अपने गुरू के प्रति दूसरे के कहने के आधार पर टिका है । 
वो आज अनुकूल बोल दिया तो हमने, आपने मन हीं मन में वास्तविक संत के साथ साथ उसको भी अच्छा मान लिए । 

और कल वो दो विरोधी बातें बोल देगा तो हमारा आपका विश्वास धड़ाम । अरे आजकल बड़े लोगों को छोड़ दो वो तो कोई साधारण संसारी जीव भी आपके गुरू के खिलाफ हो जाए , खिलाफ बातें कर दे , लिख दे , विडियो बना कर डाल दें तो बहुतों का विश्वास क्षण भर में डबांडोल हो जाता है । 
ऐसा है हमारा आपका विश्वास । इतना कमजोर हैं आपका विश्वास और श्रद्धा आदि ।

लेकिन जो सही शिष्य है वो हर हाल में दृढ़ है , उसका विश्वास दृढ़ है । वो कभी किसी भी हाल में नहीं टुटता और ना उसका विश्वास कम होता वल्कि उसका विश्वास और मजबूत होता है कारण कि भगवान और गुरू आपकी परीक्षा के लिए ऐसा विपरित और अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण खुद करतें हैं । 
यह आपको जनाने के लिए कि आप कहां खड़े हैं आपको ज्ञान हो जाए ।
नहीं तो हम आप कहां खड़े हैं? अपना गुरू अच्छी तरह जानतें है । लेकिन हमारे आपके आंतरिक भाव गुरू के द्वारा जानने से हमारा आपका काम नहीं बनेगा । इसलिए दुसरों को माध्यम बना कर हमारी आपकी परीक्षा ली जाती है जिससे हम आप अपनी कमी जानकर खुद को ठीक करें ।

हम आप असली शिष्य हैं तो आप किसी के कहने में नहीं जाएगें । ना अच्छा कहा उससे मतलव और ना बुरा से मतलव है । 
अब वो संसारी बड़ा आदमी , बाबा आ गया आपके आश्रम में , आपके गुरू के सामने हांथ जोड़ा , आपका गुरू भी लोक व्यवहार के नाते हाथ जोड़कर उसका अभिवादन स्वीकार किया । वो एक्टिंग कर लिया , गुरू भी एक्टिंग कर दिया । वो जाने लगा तो आपका गुरू आपके चार पांच साधक भाई बहनों को इशारा किया उनको दरबाजे तक छोड़ आओ , लोक व्यवहार है , कटसी है । लेकिन आप में से बहुत लोग उठ कर उसके साथ साथ उसको छोड़ने चल दिए अापका गुरू प्रवचन दे रहा है किर्तन करा रहा है आप चल दिए उसके साथ । यह करते हैं आप सब । 
श्री राधे ।

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