Tuesday, 29 June 2021

मेरी कविता

तुम चले गए इस धराधाम से
पर तुम जा नहीं सकते मेरे अन्तर्मन से 
अटुट प्रेम का सागर उड़ेल कर 
मेरे तन मन में अपना खुशबु उड़ेल कर 
वोलो प्रिय फिर कब आओगे ?
कब फिर मेरे प्राण लौटाओगे ?

सार जगत का मुझको समझाकर ,
अपने निज शीतल स्वरूप दिखला कर 
अलक्षित हो गए तुम जहान से ‌,
पर कैसे जाओगे मेरे अंतर्मन से 

नस नस में विरह की अग्नी बुझाने 
वोलो प्रिय फिर कब आओगे ?
या तो अपने पास बुला लो 
या प्रिय तुम खुद हीं आ जाओ ,

श्री राधे जय जय श्री राधे , बोलो प्रिय तुम कब आओगे ?
( मेरी रचना )

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