Tuesday, 15 June 2021

श्री महाराज जी कहते हैं हम कर्मयोग करें चाहे कोई भी काम हो भगवान को ह्रदय में जान कर मान कर अपना अच्छा कर्म करना , यहां तक की आताताईयो के विरुद्ध खड़ा होना भी कर्मयोग से हो सकता है । और अपने द्वारा हर किए गय प्रत्येक अच्छे कार्य का श्रेय एक मात्र भगवान और गुरू को देना चाहिए ।

भगवान व श्री महाराज जी  यह नहीं कहें है  कभी की  तुम अकर्मण्य बन जाओ और सारा काम मुझे पे छोड़ दो । 
श्री महाराज जी कहते हैं हम कर्मयोग करें चाहे कोई भी काम हो भगवान को ह्रदय में जान कर मान कर अपना अच्छा कर्म करना , यहां तक की आताताईयो के विरुद्ध खड़ा होना भी कर्मयोग से हो सकता  है । और अपने द्वारा हर किए गय प्रत्येक अच्छे कार्य का श्रेय एक मात्र भगवान और गुरू को देना चाहिए । 
वो यह नहीं कहते की तुम कर्महीन बन जाओ ।
कोरोना हो जाए और डौक्टर के पास जाओ हीं ना ।

वो तो कहें है जो मैं समझा हुं कि तुम घबराओ नहीं बिमारी से , निडर बनो ,  मुझे अपने ह्रदय में मान कर , बिठा कर डौक्टर से इलाज करो , अपना कर्मयोग करो ।
उसके बाद सब भगवान और गुरू की इच्छा , मर्जी पर छोड़ो ।  फिर मुझे जो करना है सो करूंगा । मुझ पर दृढ़ विश्वास रखकर अपना काम करो । तुम कर्म करने के अधिकारी हो । फल क्या होगा , मत सोचो , फल तुम्हारे हाथ में नहीं है ।  अब तुम कर्म हीं करना छोड़ दोगे तो मरोगे हीं ।
वो कर्म करने के बाद फल को उनकी इच्छा पर छोड़ने के लिए बोले है । ( पर लोग कल मुझे सिखा रहे थे कि कर्म ही मत करो , कर्म करने से पहले ही उनकी इच्छा पर छोड़ दो , यही समझा है श्री महाराज जी के तत्वज्ञान को , मुझे नहीं समझना उनलोगों से ) 

 वो तो हजार बार कहें है  कि "मनुष्ययोनि कर्म प्रधान, ज्ञानप्रधान  योनि के साथ साथ भोग योनि भी है , मत भुलो , कर्मयोग करने से कोई कर्म नोट नहीं होगा । " 

तो मैंने तो उनका लगभग सभी विडियो  सभी किताब पढ़ चुका हुं और उनके कृपा से समझ चुका हुं और मस्तिष्क में भी ऐसा बैठ गया है कि प्रैक्टिकल युक्ति करने में कोई परेशानी नहीं है । 

मुझे वहीं लोग समझाए जिनके ह्रदय में दंभ कपट छल छिद्र और माया नहीं है । खुद श्री महाराज जी के बतलाए से पचास प्रतिशत भी अपने स्वयं के जीवन में सच सच उतार चुके हैं । उनका मैं दास हुं । 🙏❤️🙏 और हां मुझे मेरे कर्मयोग करने से कोई रोके ना । मैं गलत का पुरा विरोध करूंगा हीं । जितना लोग मेरा विरोध करेंगे उतनी ही मेरी शक्ति बढ़ेगी । मेरा बल मेरा राम हैं मेरा गुरू हैं ।

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