Tuesday, 15 June 2021

ऐसे नकली घी तेल कपुर के उपयोग से लक्ष्मी आएगी नहीं , उल्टे जाएगी आपके यहां से डौक्टर के घर । अब हम बात करते हैं घी के बारे में या ( कपुर ) कैम्फर के बारे में ।

ऐसे नकली घी तेल कपुर के उपयोग से लक्ष्मी आएगी नहीं , उल्टे जाएगी आपके यहां से डौक्टर के घर । 
अब हम बात करते हैं घी के बारे में या ( कपुर ) कैम्फर के बारे में । 
मैं आप हीं सब से पुछता हुं । क्या आप अपने मां पिता या बच्चे के कमरे में नकली घी का दीपक जला कर रख सकते हैं ? 
आपका ज़बाब होगा विल्कूल नहीं । कारण की नकली घी में खतरनाक केमिकल होता है । उसी प्रकार ओरिजनल कपुर नौ सौ से हजार रूप्या किलो है ।
नकली कपुर में खतरनाक केमिकल मिला होता है , जिसके जलने पर बड़ी मात्रा में जहरीली गैस निकलती है।
 जिससे घर के सभी लोगो को भारी नूकसान होता है ।
आज 90% लोग अपने घर के मंदीरों में या सार्वजनिक मंदीरों में खुब नकली घी , नकली कपुर नकली तील के तेल का इस्तेमाल करके दीपक जलाते हैं ।
मंदीर में अनेको लोग आते हैं उनको बहुत नुक्सान होता है । 
जब आप अपने मां बाप के कमरे में , या अपने बच्चे के रूम में ऐसा दीपक नहीं जला सकते तो फिर भगवान के प्रति आपकी कैसी श्रद्धा है ? उनके आगे नकली घी नकली कपुर, तेल । घटिया अगरवत्ती , धूप बत्ती जलातें है हर दिन ।
क्या हमें अपने ईष्ट से प्यार नहीं ? अरे मंदीर में हजारों लोग आते हैं प्रति दिन , लाखों लोग आते हैं । वहां के वातावरण को क्यों प्रदुषित करते हैं आप लोग ? पांच सौ प्रति लीटर से उपर आता है तिल का तेल । अच्छा घी छ सौ प्रति किलो है । पक्का घी नौ सौ प्रतिकिलो है ।

पर आप शनी देव के पत्थर पर क्यों नकली तेल चढ़ाते हैं? । दस ग्राम ही चढ़ाइए ओरिजनल तेल ना मिले तो पिसवा कर चढ़ाइए । जरूरी है क्या एक एक किलो चढ़ाना उनको नकली तेल ।‌ नकली दुध , नकली शहद , आदि से भगवान के प्रतिमा का अभिषेक करना महापाप है । जरूरी है क्या एक सौ आठ दीपक नकली तेल घी का जलाकर कर्मकांड के नाम पर गलत करना ? एक हीं जले शुद्ध जले । वाकी बचा पैसा‌ दान करदें ।‌ भाव जरूरी है । कर्मकांड बिना‌ भक्ति भाव के अभिषाप है । वरदान नहीं । 

नकली चीजों के इस्तेमाल से सार्वजनिक मंदीर हीं नहीं आपके घर के मंदीर से उठा धुआं बहुत जहरीली होती है । यह आप सबके स्वास्थ्य को बर्बाद करता है । 
आप फिर डौक्टर को फीस और दवा में खर्च करके दस गुणा नुकसान में हैं । ऐसे नकली घी तेल कपुर के उपयोग से लक्ष्मी आएगी नहीं , उल्टे जाएगी आपके यहां से डौक्टर के घर । 

उससे बढ़िया है मंदीर में खाने से भी ज्यादा शुद्ध घी , तेल , अपुर , शहद आदि का इस्तेमाल करना चाहिए हमें ।
अगरबत्ती में तो और खतरनाक जहर होता है ।

हमारा सनातन धर्म पुरी तरह वैज्ञानिक हैं ।
ओरिजनल चीज का इस्तेमाल से वातावरण शुद्ध होगा घर का , मंदीर का । अच्छा वातावरण से मन शांत होगा और मन लगेगा ध्यान में ।
एक बार ओरिजनल तेल घी कपूर को हाथ में लेकर सुंघिए पहले फिर पता चलेगा उसको जलाने का महत्व ।
ऊसका लाभ । बहुत सुंदर महक से घर , मंदीर सब भर झाऐगा । इससे वैक्टिरिया आदी सब मर जाएगा घर का , मंदीरो का । 
कम इस्तेमाल भले किजिए पर बाजार से आरती और मंदीर बाला घी , तेल अगरवत्ती ,‌शहद , फौर्मलीन मिला , हाईड्रोजन पैराक्साइड बाला , कास्टिक सोडा मिला नकली दुध भगवान को ना चढ़ाएं । ध्यान रहे वो हमारे सनातन पिता है। हमे उनका अपमान नहीं करना चाहिए । ना अपने स्वास्थ से और ना दुसरो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना चाहिए हमें ।
बढ़िया से बढ़िया ओरिजनल बस्तु का इस्तेमाल से वातावरण शुद्ध होता है । मंदीर के आस पास पाखंडी पंडितों का दुकान होता है । मोटी कमाई के लिए वो सब लालची कुछ पंडित लोग दुकान लगा कर नकली सामान बेचते हैं ‌ बचिए उनसे ।
श्री राधे :- आपका संजीव कुमार ।

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